अयोध्या
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण अब देश के सबसे बड़े धार्मिक और वित्तीय घोटालों में से एक बनता जा रहा है। एसआईटी की छह दिनों की गहन जांच में करीब 150 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जबकि 25 लोगों पर सीधे कार्रवाई की तैयारी बताई जा रही है। जांच एजेंसी ने जिन लोगों से पूछताछ की है, उन्हें अगले आदेश तक अयोध्या छोड़कर कहीं न जाने की चेतावनी दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव की भूमिका जांच के केंद्र में है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाने के बाद इन पर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया जा सकता है। शुक्रवार को एसआईटी ने मंदिर परिसर में लगभग छह घंटे तक पूछताछ कर बैंक रिकॉर्ड, चढ़ावा गिनती व्यवस्था और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की।
अब तक की जांच में करीब दो करोड़ रुपये की बरामदगी होने की बात सामने आई है। चढ़ावा गिनने से जुड़े पांच आरोपियों की निशानदेही पर नकदी और अन्य सामग्री बरामद की गई है। वहीं, कुछ कर्मचारियों के घरों से सोना मिलने की भी चर्चा है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी ने करोड़ों रुपये के चढ़ावे और बहुमूल्य शिलाओं के गायब होने का मुद्दा उठाया है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
राम मंदिर जैसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र में चढ़ावे की कथित हेराफेरी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे देश की नजर एसआईटी रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
क्रॉसर
“रामलला के दरबार में करोड़ों के चढ़ावे पर डाका?
150 संदिग्धों की सूची से मचा हड़कंप, ट्रस्ट के बड़े नामों पर गिरी जांच की गाज”


