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Monday, June 8, 2026

पंचतत्व में विलीन हुईं डॉ. रजनी सरीन, अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

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77 वर्षों की सेवा, संघर्ष और समर्पण की कहानी छोड़ गई जीवन का बड़ा संदेश

फर्रुखाबाद। भाजपा की वरिष्ठ नेत्री, प्रख्यात समाजसेवी और भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय समिति की सदस्य रहीं डॉ. रजनी सरीन को सोमवार को पांचाल घाट पर हजारों नम आंखों के बीच अंतिम विदाई दी गई। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं डॉ. सरीन ने रविवार को अपने लोहाई रोड स्थित आवास पर अंतिम सांस ली थी। उनके निधन से जनपद की राजनीति, समाजसेवा और व्यापारिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

देर रात से सोमवार सुबह तक उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा रहा। भाजपा नेताओं, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों, चिकित्सकों, शिक्षकों, व्यापारियों और आम नागरिकों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। जैसे ही उनकी अंतिम यात्रा निकली, पूरा वातावरण गमगीन हो उठा। हर चेहरे पर उदासी थी और हर आंख नम दिखाई दे रही थी।

डॉ. रजनी सरीन का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का पर्याय था। 77 वर्षों के जीवन में उन्होंने राजनीति को कभी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का माध्यम नहीं बनाया। भारतीय जनता पार्टी के लिए दशकों तक कार्य करते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रीय स्तर तक पार्टी में सक्रिय रहकर उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। फर्रुखाबाद की राजनीति में उनका नाम सम्मान और सादगी का प्रतीक माना जाता था।

उनके जीवन में सम्मान, प्रतिष्ठा, सामाजिक प्रभाव और संपन्नता की कोई कमी नहीं थी। बेटा, बहू और बेटी-दामाद विदेशों में अपने-अपने क्षेत्रों में स्थापित हैं। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में उनकी अलग पहचान थी। लेकिन सोमवार को पांचाल घाट पर उनकी अंतिम यात्रा ने जीवन का सबसे बड़ा सत्य सामने रख दिया।

जिस महिला ने वर्षों तक समाज और संगठन के लिए अपना समय समर्पित किया, जिसने हजारों लोगों की मदद की, जिसने राजनीति में रहते हुए भी मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखा, आज वह शांत अवस्था में अपनी अंतिम यात्रा पर थी। पद, प्रतिष्ठा, शक्ति, प्रभाव और पहचान सब पीछे छूट गए थे। साथ थी तो केवल लोगों की भावनाएं, उनकी स्मृतियां और उनके द्वारा किए गए सत्कर्म।

पांचाल घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद लोगों के मन में एक ही प्रश्न बार-बार उठ रहा था कि आखिर मनुष्य जीवन भर जिस दौड़ में भागता है, उसका अंतिम पड़ाव क्या है? वर्षों की राजनीतिक सक्रियता, संगठनात्मक जिम्मेदारियां, सामाजिक प्रतिष्ठा और उपलब्धियां अंततः यहीं रह जाती हैं। मनुष्य के साथ जाता है तो केवल उसका कर्म और लोगों के दिलों में बनाई गई जगह।

डॉ. रजनी सरीन ने अपने जीवन में दो बार नगर पालिका अध्यक्ष बनने का सपना भी देखा था। यह सपना राजनैतिक द्वेष के चलते पूरा नहीं हो सका, एक बार हराया गया, एक बार कोर्ट नें दखल दे दिया।लेकिन समाज के बीच जो सम्मान और विश्वास उन्होंने अर्जित किया, वह किसी भी पद से कहीं अधिक बड़ा था। यही कारण रहा कि उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब उनके प्रति लोगों के प्रेम और सम्मान का प्रमाण बन गया।

जब पांचाल घाट पर चिता की अग्नि में उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ तो उपस्थित लोगों की आंखें भर आईं। ऐसा लगा मानो फर्रुखाबाद ने अपनी एक ऐसी मां, बहन और संरक्षक को खो दिया हो, जिसने जीवन भर केवल देना सीखा। उन्होंने अपने व्यवहार, सेवा और समर्पण से हजारों लोगों के जीवन को स्पर्श किया।

डॉ. रजनी सरीन की विदाई केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं है, बल्कि एक ऐसे युग का अवसान है जिसमें राजनीति सेवा का माध्यम हुआ करती थी और जनसंपर्क केवल चुनाव तक सीमित नहीं होता था। उनकी जीवन यात्रा आज भी यह संदेश दे रही है कि सफलता का वास्तविक अर्थ पद और सत्ता नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में बनाई गई जगह है।
सोमवार को पांचाल घाट पर उठता धुआं मानो यही कह रहा था जीवन क्षणभंगुर है, लेकिन अच्छे कर्म अमर होते हैं। डॉ. रजनी सरीन आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी स्मृतियां, उनका स्नेह और उनकी सेवा की विरासत हमेशा फर्रुखाबाद के जनमानस में जीवित रहेगी।

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