प्रशांत कटियार
फर्रुखाबाद। जनपद फर्रुखाबाद की राजनीति एक बार फिर गर्माने लगी है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जिले की चारों विधानसभा सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर विपक्ष का पूरी तरह सफाया कर दिया था, लेकिन अब 2027 के चुनाव से पहले हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। भाजपा जहां अपने ही नेताओं की बढ़ती दावेदारी और गुटबाजी से जूझती दिखाई दे रही है, वहीं समाजवादी पार्टी पिछली हार से सबक लेते हुए नए सिरे से रणनीति बनाने में जुट गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि टिकट वितरण में जरा सी भी चूक हुई तो 2027 का चुनाव कई बड़े नेताओं का राजनीतिक भविष्य तय कर सकता है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भोजपुर सीट सबसे चर्चित सीटों में रही थी। चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अरशद जमाल सिद्दीकी को मजबूत माना जा रहा था और माना जा रहा था कि वह भाजपा को कड़ी टक्कर देंगे। लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और एटा सांसद राजवीर सिंह की सभाओं ने माहौल बदल दिया। क्षत्रिय और लोधी मतदाताओं का बड़ा वर्ग भाजपा के पक्ष में एकजुट हो गया और भाजपा प्रत्याशी नागेंद्र सिंह राठौर ने 99,979 मत प्राप्त कर 24,458 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। सपा प्रत्याशी अरशद जमाल सिद्दीकी को 75,521 मत मिले, जबकि बसपा प्रत्याशी आलोक वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी अर्चना राठौर चुनावी मुकाबले में काफी पीछे रह गए। अब यही भोजपुर सीट भाजपा के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण बनती दिख रही है। पार्टी के भीतर कई नेता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं और आपसी खींचतान की चर्चाएं भी खुलकर सामने आने लगी हैं। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी इस सीट पर मजबूत सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है। चर्चा यह भी है कि एक प्रभावशाली भाजपा नेता के भाई समाजवादी पार्टी से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।
फर्रुखाबाद सदर सीट पर भी भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की थी। विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी ने 1,10,950 वोट हासिल कर समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी सुमन शाक्य को 38,795 वोटों से हराया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा को यहां स्थानीय चेहरा न उतारने का नुकसान उठाना पड़ा था। सुमन शाक्य को बाहरी उम्मीदवार के रूप में देखा गया और इसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ा। अब 2027 के चुनाव से पहले भाजपा के भीतर भी सब कुछ सामान्य नहीं दिखाई दे रहा है। नगर पालिका चुनाव के बाद से पूर्व जिलाध्यक्ष रूपेश गुप्ता समर्थकों और विधायक खेमे के बीच दूरी बढ़ने की चर्चाएं लगातार राजनीतिक गलियारों में सुनाई दे रही हैं। वहीं समाजवादी पार्टी इस सीट पर नया दांव खेलने की तैयारी में है। पूर्व लोकसभा प्रत्याशी डॉ. नवल किशोर शाक्य के परिवार से प्रियंका शाक्य का नाम चर्चा में है और माना जा रहा है कि यदि पार्टी स्थानीय और लोकप्रिय चेहरे पर भरोसा करती है तो मुकाबला पिछले चुनाव की तुलना में कहीं अधिक कड़ा हो सकता है।
अमृतपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने जिले की सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। विधायक सुशील शाक्य ने 98,848 वोट हासिल करते हुए समाजवादी पार्टी के डॉ. जितेंद्र सिंह यादव को 44,686 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया था। उस समय भाजपा की जीत एकतरफा दिखाई दी थी, लेकिन अब इस सीट पर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा के भीतर एक पूर्व विधायक और एक चर्चित डॉक्टर की दावेदारी की चर्चा जोरों पर है। पार्टी के सामने चुनौती यह होगी कि टिकट वितरण के दौरान किसी प्रकार की नाराजगी को कैसे नियंत्रित किया जाए। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में जुटी हुई है और संगठन स्तर पर लगातार गतिविधियां बढ़ाई जा रही हैं।
कायमगंज विधानसभा सीट पर भाजपा गठबंधन की प्रत्याशी डॉ. सुरभि ने 1,14,647 मत प्राप्त कर समाजवादी पार्टी के सर्वेश आंबेडकर को 18,247 वोटों से हराया था। यह सीट आरक्षित होने के कारण हमेशा विशेष राजनीतिक महत्व रखती है। फिलहाल भाजपा की ओर से यहां कोई बड़ा दावेदार खुलकर सामने नहीं आया है, लेकिन समाजवादी पार्टी के नेता डॉ. अजीत कठेरिया लगातार क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सपा इस सीट पर मजबूत और स्थानीय समीकरणों को साधने में सफल रही तो भाजपा गठबंधन के लिए यह सीट चुनौतीपूर्ण बन सकती है।
जिले की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि वर्ष 2022 में स…


