लखनऊ। उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। ताज़ा समीक्षा में प्रदेश के 20 जिले ऐसे पाए गए हैं, जहां ऑनलाइन उपस्थिति 5 प्रतिशत से भी कम दर्ज की गई है। इससे डिजिटल उपस्थिति प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे खराब स्थिति कौशांबी जिले की रही, जहां ऑनलाइन उपस्थिति मात्र 1.38 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अलावा औरैया, आगरा, गोंडा, एटा, हमीरपुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर और देवरिया समेत कई जिलों में भी ऑनलाइन हाजिरी का प्रतिशत बेहद कम रहा।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था का उद्देश्य विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित करना और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। हालांकि, कई जिलों में तकनीकी समस्याएं, इंटरनेट कनेक्टिविटी की दिक्कतें, ऐप के सीमित उपयोग और स्थानीय स्तर पर लापरवाही जैसी वजहों से इसकी प्रगति संतोषजनक नहीं रही।
विभाग ने कम प्रदर्शन वाले जिलों के अधिकारियों से जवाब तलब करने के साथ ऑनलाइन उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को नियमित मॉनिटरिंग कर विद्यालयों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।
शिक्षा विभाग का कहना है कि ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के लिए तकनीकी समस्याओं का समाधान, नियमित प्रशिक्षण और सतत निगरानी आवश्यक है, ताकि प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली सफलतापूर्वक लागू हो सके।


