बदायूं: एचपीसीएल प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड (double murder case) में बदायूं पुलिस (Badaun police) को बड़ी सफलता मिली है। बदायूं पुलिस ने सोमवार देर रात मुठभेड़ के बाद 50,000 रुपये के इनाम वाले वांछित आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अभय प्रताप सिंह, जो 12 मार्च को दो अधिकारियों की हत्या के बाद से फरार था, मुठभेड़ में दोनों पैरों में घायल हो गया। कांस्टेबल प्रशांत कुमार भी गोलीबारी में घायल हो गया। पुलिस ने अभय के भाई शिवम प्रताप सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया है।
यह अभियान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन में चलाया गया। टीम में अतिरिक्त एसपी अभिषेक कुमार सिंह और सर्किल अधिकारी रजनीश कुमार उपाध्याय के साथ स्थानीय पुलिस और स्वाट/एसओजी इकाइयां शामिल थीं। पुलिस के अनुसार, आरोपी को पहले 13-14 अप्रैल की रात फिरोजाबाद के नरखी थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया और पूछताछ के लिए मूसा झाग थाना लाया गया। पूछताछ के दौरान अभय ने छिपाए गए अवैध हथियारों के बारे में जानकारी दी।
जब पुलिस अभय को हथियार बरामद करने के लिए सजनी गांव के पास ले गई, तो उसने कथित तौर पर एक छिपा हुआ हथियार निकाला और पुलिस टीम पर गोली चला दी, जिससे कांस्टेबल प्रशांत कुमार घायल हो गए। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करते हुए अभय के दोनों पैरों में गोली मारी और उसे गिरफ्तार कर लिया।
अधिकारियों ने मुदसीना वन क्षेत्र के पास अपराध में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद किया, साथ ही .32 बोर की पिस्तौल, मैगज़ीन, दो .315 बोर की देसी बंदूकें, 10 जिंदा कारतूस और चार खाली कारतूस सहित अन्य अवैध हथियार भी बरामद किए। घायल आरोपी और कांस्टेबल दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
घटना 12 मार्च, 2026 की है, जब दोपहर लगभग 1:30 बजे सजनी गांव स्थित एचपीसीएल प्लांट में दो अधिकारियों – सुधीर गुप्ता (58) और हर्षित मिश्रा (34) – की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उन्हें दातगंज के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह को कई अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस ने बताया कि अभय प्रताप सिंह का लंबा आपराधिक इतिहास है, जिसमें हत्या, अपहरण, जबरन वसूली और शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन जैसे मामले दर्ज हैं। उसके भाई शिवम पर भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर अपराधों से संबंधित आरोप हैं।


