– कभी श्रम मंत्री के रूप में रहे सत्तासीन , आज लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई
फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक समय ऐसा था जब इंसाफ सेना के मुखिया रहते बादशाह सिंह सत्ता के केंद्र में हुआ करते थे। बहुजन समाज पार्टी सरकार में श्रम मंत्री के रूप में उनका प्रभाव प्रदेश भर में देखा जाता था। लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और अब वही बादशाह सिंह प्रशासनिक कार्रवाई के कारण चर्चा में हैं।
जिलाधिकारी गजल भारद्वाज द्वारा बादशाह सिंह के रिवॉल्वर और राइफल के शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए जाने की कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले नेता के खिलाफ हुई यह कार्रवाई लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
बादशाह सिंह का राजनीतिक जीवन हमेशा सुर्खियों में रहा। श्रम मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी , लेकिन बाद के वर्षों में उन पर करोड़ों रुपये के कथित श्रमिक कल्याण घोटाले को लेकर आरोप लगे और मामला न्यायालय तक पहुंचा। इसी प्रकरण में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। उस समय यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना था।
वर्ष 2007 के फर्रुखाबाद बिधानसभा उपचुनाव के दौरान भी बादशाह सिंह अपने एक बयान को लेकर चर्चाओं में आए थे। उन्होंने बसपा सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को “असली क्षत्राणी” बताया था। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की थी।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि राजनीति में समय और परिस्थितियां कितनी तेजी से बदलती हैं। कभी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने वाले नेता आज प्रशासनिक कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। जिले में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और लोग इसे प्रदेश की बदलती राजनीतिक तस्वीर के रूप में देख रहे हैं।


