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Saturday, April 25, 2026

“बीजेपी गिद्ध राजनीति कर रही, किसान बदहाल”—अखिलेश यादव

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गाज़ियाबाद।किसान मुद्दे को लेकर बड़ा सियासी तापमान देखने को मिला, जब अखिलेश यादव ने गाजियाबाद से बीजेपी सरकार पर सीधा हमला बोला। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किसानों से संवाद करते हुए उन्होंने एक के बाद एक कई बड़े दावे और वादे किए, जिससे चुनावी रणनीति और किसान राजनीति की दिशा साफ होती दिखी।
अखिलेश यादव ने कहा कि “देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं, बिना एग्रीकल्चर के भारत की ग्रोथ संभव नहीं है।” उन्होंने गाजियाबाद के किसानों को देश में सबसे जागरूक बताते हुए कहा कि किसान आंदोलनों ने पूरे देश को संदेश दिया कि अधिकारों के लिए लड़ना जरूरी है।
उन्होंने बड़ा वादा करते हुए कहा कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी का विज़न होगा कि किसानों का भुगतान 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही किसानों को कर्ज लेने में आ रही समस्याओं को खत्म करने के लिए विशेष कमीशन बनाने की भी घोषणा की।
बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि “किसानों की आय दोगुनी करने का वादा सिर्फ जुमला साबित हुआ। आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में किसानों ने आत्महत्या की है, और उत्तर प्रदेश में हालात बेहद गंभीर हैं।” हालांकि इन दावों के आधिकारिक आंकड़ों पर बहस बनी हुई है, लेकिन सियासी मंच से इस तरह के आरोपों ने माहौल गरमा दिया है।
अखिलेश यादव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मुद्दा उठाते हुए कहा कि अमेरिका के साथ होने वाली डील से भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि विदेशी कृषि संसाधन देश के बाजार को प्रभावित करेंगे।
ऊर्जा संकट को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा और दावा किया कि प्रदेश में जितने बड़े बिजली उत्पादन प्लांट हैं, वे समाजवादी सरकार के समय स्थापित हुए थे। उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि एक गांव में उन्होंने तीन महीने के भीतर 24 घंटे मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई थी, जिसका लक्ष्य एपीजे अब्दुल कलाम ने दिया था।
कोरोना काल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने पीड़ित परिवारों को 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी, जबकि बीजेपी सरकार केवल राजनीति में व्यस्त रही।
अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने तीखा हमला करते हुए कहा, “बीजेपी से बड़ी गिद्ध पार्टी और कोई नहीं है,” जिससे साफ है कि आने वाले चुनावों में किसान मुद्दा सबसे बड़ा हथियार बनने जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गाजियाबाद से उठी यह आवाज पश्चिमी यूपी के किसान बेल्ट में बड़ा असर डाल सकती है, जहां पहले भी किसान आंदोलन ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया था। अब देखना यह होगा कि क्या ये वादे जमीनी हकीकत बनते हैं या फिर सियासी बयानबाजी तक ही सीमित रहते हैं।

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