फर्रुखाबाद। डिजिटल दौर में जहां मोबाइल और इंटरनेट ने बच्चों की दिनचर्या बदल दी है, वहीं आर्मी पब्लिक स्कूल फतेहगढ़ कैंट में अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक दिवस का आयोजन कर ज्ञान और पुस्तकों के महत्व को केंद्र में लाया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने न सिर्फ पुस्तकों के महत्व को समझा, बल्कि मंच के माध्यम से उसे जीवंत भी किया।
प्रार्थना सभा के दौरान विद्यार्थियों ने एक लघु नाटिका प्रस्तुत कर यह संदेश दिया कि पुस्तकें मानव जीवन का अभिन्न अंग हैं और सच्ची मित्र की तरह हर समय मार्गदर्शन करती हैं। नाटिका के जरिए यह भी दिखाया गया कि इंटरनेट के इस तेज दौर में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ, बल्कि वे आज भी ज्ञान का सबसे विश्वसनीय स्रोत हैं।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं आरजू और दीप्ति ने अपनी कविता से सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में बताया कि पुस्तकें दीपक की तरह स्वयं जलकर हमारे जीवन में ज्ञान का उजाला भरती हैं और अंधकार को दूर कर नई दिशा दिखाती हैं। उनकी प्रस्तुति ने सभा में उपस्थित सभी छात्रों और शिक्षकों को गहराई से प्रभावित किया।
विद्यालय के कार्यवाहक प्रधानाचार्य नितिन चतुर्वेदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पुस्तकों से जुड़ाव ही वास्तविक ज्ञान की कुंजी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “पुस्तकें मां की ममता और गुरुजनों के आशीर्वाद का रूप होती हैं, जो जीवन के हर कठिन मोड़ पर सही दिशा दिखाती हैं।” उन्होंने बच्चों से नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करने का आह्वान किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में शिक्षिकाओं पूर्णिमा अग्निहोत्री और डॉ. शिवाली वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर छात्रों को प्रेरित किया।
फतेहगढ़ कैंट का यह आयोजन एक सकारात्मक संदेश देता है कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच भी पुस्तकों की प्रासंगिकता कायम है और यदि स्कूल स्तर पर ऐसे प्रयास जारी रहे, तो आने वाली पीढ़ी ज्ञान और संस्कार दोनों में मजबूत बन सकती है।


