नई दिल्ली। भारतीय सेना के तोपखाना आधुनिकीकरण अभियान को बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। केंद्र सरकार 300 से अधिक अत्याधुनिक K-9 वज्र-टी स्वचालित ट्रैक्ड तोपों की खरीद के प्रस्ताव पर तेजी से आगे बढ़ रही है। करीब 23 हजार करोड़ रुपये की इस संभावित डील को हाल के वर्षों में सेना के लिए सबसे बड़े आर्टिलरी सौदों में से एक माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव को जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड की मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।
K-9 वज्र-टी 155 मिमी/52 कैलिबर की स्वचालित ट्रैक्ड आर्टिलरी गन है, जिसे दक्षिण कोरिया की कंपनी हनवा एयरोस्पेस ने डिजाइन किया है और भारत में इसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा किया जाता है। यह तोप 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है और अपनी तेज फायरिंग क्षमता, गतिशीलता तथा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी प्रदर्शन के लिए जानी जाती है।
भारतीय सेना ने वर्ष 2017 में पहली बार 100 K-9 वज्र तोपों की खरीद का आदेश दिया था, जिसकी आपूर्ति तय समय से पहले पूरी कर ली गई थी। इसके बाद दिसंबर 2024 में रक्षा मंत्रालय ने 100 और तोपों की खरीद के लिए 7,628 करोड़ रुपये से अधिक का अनुबंध किया था। अब 300 अतिरिक्त तोपों के शामिल होने से सेना की मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
पहले इन तोपों की तैनाती भारत-पाकिस्तान सीमा पर की गई थी, लेकिन वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन तनाव बढ़ने के बाद इन्हें ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में भी तैनात किया गया। अत्यधिक ठंड और शून्य से नीचे तापमान में भी इनका प्रदर्शन प्रभावी रहा, जिससे यह पहाड़ी युद्धक्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुई हैं।
यह खरीद सेना की दीर्घकालिक आर्टिलरी आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है, जिसके तहत वर्ष 2042 तक 155 मिमी कैलिबर को सेना की मानक तोप प्रणाली बनाने का लक्ष्य रखा गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई K-9 वज्र तोपों के शामिल होने से उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता और जवाबी कार्रवाई की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।


