लखनऊ/फर्रुखाबाद। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर ) को लेकर एक नया सन्देश खड़ा हो गया है। सरदार पटेल युवा वाहिनी के अध्यक्ष अंशुल कटियार नें खास तौर पर कुर्मी समाज के लोगों से अपील है कि एनपीआर में जाति के कॉलम में केवल कुर्मी ही लिखवाएं , किसी भी प्रकार का सरनेम या उपनाम न जोड़ा जाए।उनका ये प्रयास समुदाय विशेष के भीतर जागरूकता फैलाने की कोशिश बताया जा रहा है, विशेषज्ञों का कहना है कि एनपीआर का उद्देश्य देश के निवासियों का डेटा तैयार करना है, लेकिन इसमें जाति के आंकड़ों को लेकर हमेशा से राजनीतिक खींचतान रही है। कई दल पहले से ही जातीय जनगणना की मांग कर रहे हैं, ऐसे में इस तरह के अभियान उस बहस को और तेज कर सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां जातीय समीकरण चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित करते हैं, वहां इस तरह के संदेश आने वाले चुनावों से पहले माहौल बनाने का संकेत भी हो सकते हैं। खासकर पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के आंकड़ों को लेकर लंबे समय से राजनीतिक दलों के बीच टकराव बना हुआ है।
स्थानीय स्तर पर भी इस संदेश को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोग इसे समाज की एकजुटता का प्रयास बता रहे हैं।आंकड़ों की बात करें तो देश में जातीय जनगणना को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। पिछली व्यापक जातीय गणना 1931 में हुई थी, जिसके बाद से यह मुद्दा लगातार राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बना हुआ है।


