रायबरेली। जिले के जगतपुर क्षेत्र के छिछोरा गांव में किसान सुरेश पटेल की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के करीब एक महीने बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर सिराथू विधायक पल्लवी पटेल ने पुलिस प्रशासन पर नाराजगी जताई और पुलिस अधीक्षक से सीधे फोन पर सख्त लहजे में बात की।
बुधवार को विधायक पल्लवी पटेल पीड़ित किसान सुरेश पटेल के घर पहुंचीं, जहां उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की और मृतक की पत्नी फूलमती को ढांढस बंधाया। इस दौरान परिवार ने बताया कि 19 मार्च को हुई घटना के बाद पांच आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक ने मौके पर ही पुलिस अधीक्षक रवि कुमार को फोन कर जवाब-तलब किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला दर्ज है तो अब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई। इस पर एसपी ने विवेचना जारी होने और जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया, लेकिन बातचीत के दौरान दोनों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
विधायक ने पुलिस के जवाब से असंतुष्ट होकर एसपी को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो वह स्वयं एसपी कार्यालय पहुंचकर जवाब मांगेंगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन भी किया जाएगा। इसके बाद एसपी ने बातचीत समाप्त कर दी।
परिजनों को आश्वस्त करते हुए पल्लवी पटेल ने कहा कि न्याय मिलने तक वह उनके साथ खड़ी हैं और किसी भी कीमत पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में मामला राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है, जबकि पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ गया है।
15 दिन में गिरफ्तारी नहीं तो ऑफिस पहुंचूंगी: एसपी से फोन पर भिड़ीं विधायक पल्लवी पटेल
बड़ी कार्रवाई: इमामबाड़ा और ईदगाह पर चला बुलडोजर, भारी पुलिस बल तैनात
संभल। जिले में गुरुवार को प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चंदौसी मार्ग स्थित बिछौली गांव में सरकारी जमीन पर बने इमामबाड़ा और ईदगाह को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की मौजूदगी रही, जिससे स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, करीब 12.25 बीघा सरकारी भूमि पर बने ईदगाह और लगभग ढाई बीघा में निर्मित इमामबाड़ा को अवैध कब्जा मानते हुए हटाने की कार्रवाई की गई। ध्वस्तीकरण के लिए चार बुलडोजरों का उपयोग किया गया। कार्रवाई निधि पटेल के निर्देशन और नायब तहसीलदार दीपक जुरैल के नेतृत्व में की गई, जिसमें राजस्व विभाग की टीम भी शामिल रही।
जैसे ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची, स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई और ध्वस्तीकरण का विरोध शुरू हो गया। हालांकि, पुलिस और पीएसी के जवानों ने स्थिति संभालते हुए भीड़ को मौके से हटा दिया। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पांच थानों की पुलिस, एक कंपनी पीएसी और रैपिड रिलीफ फोर्स (RRF) को तैनात किया गया था।
कार्रवाई के दौरान जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया और पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई भी मौके पर पहुंचे और पूरे अभियान की निगरानी की। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे भी ऐसे अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, जबकि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर संसद में मैराथन बहस
कल शाम 4 बजे होगी वोटिंग, 18 घंटे तक चर्चा को तैयार सदन
नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र के पहले दिन महिला आरक्षण, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन से जुड़े तीन अहम विधेयकों को लेकर लोकसभा में जोरदार बहस शुरू हो गई। सरकार ने इन विधेयकों के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को तेज करने का लक्ष्य रखा है, जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि तीनों विधेयकों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर बहस को 18 घंटे तक भी बढ़ाया जा सकता है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन बिलों पर 12 घंटे की चर्चा का प्रस्ताव रखा है। सभी विधेयकों पर मतदान शुक्रवार शाम 4 बजे कराया जाएगा।
इस दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 लोकसभा में पेश किया गया, जिसे 207 सांसदों के समर्थन और 126 के विरोध के साथ पेश करने की मंजूरी मिली। हालांकि मतदान के दौरान एनडीए के 86 सांसद अनुपस्थित रहे, जिस पर विपक्ष ने सवाल भी खड़े किए।
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सदन में तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इस विषय पर कांग्रेस पहले ही अपनी स्थिति जाहिर कर चुकी है। वहीं कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने आरोप लगाया कि महिलाओं के नाम पर दिखावा किया जा रहा है और इस मुद्दे पर पर्याप्त चर्चा नहीं की गई।
दूसरी ओर, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताया। उन्होंने आशंका जताई कि इससे अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है और बड़े राज्यों को अधिक राजनीतिक शक्ति मिल जाएगी।
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है और सरकार संविधान के दायरे में रहकर ही सभी फैसले ले रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जाति आधारित जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
संसद के इस विशेष सत्र में तीनों विधेयकों को लेकर जारी बहस को देश की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन पर होने वाला फैसला महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और देश के चुनावी ढांचे में बड़े बदलाव की दिशा तय करेगा।
सपा सारी टिकटें मुस्लिमों को दे दे, हमें क्या : अमित शाह
नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच तीखी बहस ने सदन का माहौल गर्म कर दिया। चर्चा के केंद्र में महिला आरक्षण में पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए अलग कोटा और जाति आधारित जनगणना का मुद्दा रहा।
बहस के दौरान समाजवादी पार्टी की ओर से महिला आरक्षण में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए पृथक आरक्षण की मांग उठाई गई। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 का विरोध करते हुए कहा कि बिना सामाजिक न्याय सुनिश्चित किए महिला आरक्षण अधूरा रहेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि पिछड़े वर्ग की महिलाओं को विशेष रूप से प्रतिनिधित्व देने के लिए अलग प्रावधान किया जाए।
वहीं, अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि जाति आधारित जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसे पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। शाह के इस बयान पर अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और सामाजिक न्याय के मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
बहस के दौरान अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहती है तो वह अपने सभी टिकट मुस्लिम समुदाय को दे सकती है, इससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इस बयान के बाद सदन में हंगामा और बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर इस तरह की तीखी बहस आने वाले चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक दलों की रणनीति को भी दर्शाती है। यह मुद्दा अब सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहकर देश की राजनीति में बड़ा विमर्श बनता जा रहा है, जिसका असर आगामी चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है।
भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को नई गति: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क्रिश्चियन स्टॉकर की अहम बैठक
नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से गुरुवार को राजधानी स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ग्रीन टेक्नोलॉजी, डिजिटल इनोवेशन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) के आदान-प्रदान की रूपरेखा तय की गई, जिनकी औपचारिक घोषणा प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से की जाएगी।
इससे पहले, भारत दौरे पर पहुंचे ऑस्ट्रियाई चांसलर स्टॉकर ने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी समाधि पर पुष्पांजलि दी। वर्ष 2025 में पदभार संभालने के बाद यह उनकी पहली भारत और एशिया यात्रा है, जिसे दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
बुधवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी चांसलर स्टॉकर से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने पर जोर दिया था। उन्होंने इस बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री स्तर की वार्ता से सहयोग के नए आयाम खुलेंगे।
चांसलर स्टॉकर के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जिसमें कई प्रमुख उद्योगपति, वरिष्ठ मंत्री और सरकारी अधिकारी शामिल हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और ऑस्ट्रिया के बीच आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई ऊंचाई तक पहुंचाना है। दोनों देश मिलकर हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग और सतत विकास के क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग की दिशा में काम करने की योजना बना रहे हैं।
गौरतलब है कि भारत और ऑस्ट्रिया के संबंध लंबे समय से मजबूत और विश्वास पर आधारित रहे हैं। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2024 में ऑस्ट्रिया यात्रा के दौरान बनी सहमति को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच समन्वय और मजबूत होगा।
संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन पर सियासी घमासान: अखिलेश यादव और अमित शाह के बीच तीखी बयानबाज़ी
-जाति गणना, आरक्षण और परिसीमन को लेकर लोकसभा में भिड़ंत, विपक्ष ने विधेयक पर उठाए सवाल
नई दिल्ली
महिला आरक्षण विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन को लेकर संसद में सियासी टकराव तेज हो गया है। गुरुवार को सदन में सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिली, जहां समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और गृह मंत्री अमित शाह के बीच तीखी बयानबाज़ी ने माहौल और गरमा दिया।
अखिलेश यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जनगणना और जाति गणना को जानबूझकर टाला जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार का उद्देश्य आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाना है। अखिलेश ने यह भी कहा कि जाति गणना के बिना वास्तविक सामाजिक प्रतिनिधित्व संभव नहीं है और सरकार इस प्रक्रिया को “धोखे से लागू” करने की कोशिश कर रही है।
वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि जनगणना की प्रक्रिया पहले से ही जारी है और इसमें जाति गणना भी शामिल होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि घरों की गणना में किसी भी प्रकार की जाति नहीं जोड़ी जाती और यह प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी और व्यवस्थित होती है। शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि विपक्ष की मंशा पर चला जाए तो “वे घरों की भी जाति तय कर देंगे।”
इस दौरान लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन आयोग से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए, जिनका विपक्ष ने विरोध किया। विपक्षी दलों का कहना है कि इन प्रस्तावों में कई संवैधानिक और प्रक्रियात्मक खामियां हैं, जबकि सरकार का दावा है कि इन सुधारों से महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलेगा।
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती हैं, ताकि महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। साथ ही विधानसभा स्तर पर भी 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों के पुनर्गठन का प्रावधान किया गया है।
फिलहाल यह मुद्दा संसद में राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बहस होने की संभावना है।








