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Monday, July 13, 2026
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नोएडा में इंजीनियर आर्यन की मौत: चार दिन बाद भी एफआईआर नहीं, करंट लगने से मौत का मामला

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नोएडा। सेक्टर-58 क्षेत्र में इंजीनियर आर्यन की करंट लगने से हुई मौत का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। घटना के चार दिन बीत जाने के बावजूद अब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, आर्यन सड़क किनारे बने नाले की स्लैब टूटने या धंसने के कारण नाले में गिर गया। बताया जा रहा है कि नाले में विद्युत करंट प्रवाहित हो रहा था, जिसकी चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने बिजली आपूर्ति बंद कराए जाने के बाद आर्यन को नाले से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी।

मामले में पुलिस का कहना है कि अभी तक उन्हें किसी भी पक्ष से औपचारिक शिकायत या तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

घटना के बाद स्थानीय लोगों और मृतक के परिजनों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि खुले और असुरक्षित नाले तथा बिजली व्यवस्था में लापरवाही के कारण एक युवक की जान चली गई। लोगों ने जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। यदि शिकायत दर्ज होती है तो नाले के रखरखाव, बिजली व्यवस्था और संबंधित विभागों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा मानकों और विभागीय लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बदरीनाथ धाम में भी दान-चढ़ावा हेराफेरी: 32 दिन की सीसीटीवी फुटेज डिलीट

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देहरादून/बदरीनाथ। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावा हेराफेरी के कथित मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि मंदिर परिसर की 32 दिनों की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है, जबकि पहले संबंधित अधिकारियों की ओर से दावा किया गया था कि 45 दिनों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है।

मामले के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने यह जानने की प्रक्रिया शुरू कर दी है कि आखिर 32 दिनों की सीसीटीवी फुटेज कैसे और किन परिस्थितियों में डिलीट हुई। यह भी जांच का विषय है कि फुटेज तकनीकी कारणों से नष्ट हुई या फिर उसे जानबूझकर हटाया गया।

सूत्रों के अनुसार, विशेषज्ञ इंजीनियर डिलीट हुई रिकॉर्डिंग को रिकवर करने का प्रयास कर रहे हैं। यदि फुटेज सफलतापूर्वक रिकवर हो जाती है तो जांच को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते हैं और दान-चढ़ावे के लेनदेन से जुड़े कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।

इस घटनाक्रम के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के उस दावे पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें कहा गया था कि मंदिर परिसर की 45 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित है। अब 32 दिनों की फुटेज गायब मिलने से सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड संरक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

जांच एजेंसियां तकनीकी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। फुटेज गायब होने के कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर साक्ष्य मिटाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: दागी बैंककर्मी को बनाया गया था गणना प्रभारी, एसआईटी जांच में बड़ा खुलासा

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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की गणना से जुड़े कथित घोटाले की जांच में एसआईटी को बड़ा सुराग मिला है। जांच के दौरान सामने आया है कि जेल भेजा गया आरोपी सुभाष श्रीवास्तव पहले सिंडिकेट बैंक में कार्यरत था, जहां उस पर गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इन आरोपों के चलते उसे बैंक सेवा से बर्खास्त भी किया गया था।

 

जानकारी के अनुसार, बाद में न्यायालय के आदेश के बाद उसकी सेवा बहाल हुई, लेकिन उसके पूर्व रिकॉर्ड की समुचित जांच किए बिना उसे राम मंदिर में नियुक्ति दे दी गई। इतना ही नहीं, उसे मंदिर के सबसे संवेदनशील दायित्वों में शामिल चढ़ावे की गणना का प्रभारी बना दिया गया।

 

एसआईटी की जांच में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर ऐसी नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत की गई और उसके पूर्व रिकॉर्ड का सत्यापन क्यों नहीं किया गया। इसी क्रम में जांच एजेंसी ने धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे से भी पूछताछ की है। उनसे नियुक्ति प्रक्रिया और संबंधित तथ्यों के बारे में जानकारी ली गई।

 

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी अब नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेज, अनुमोदन प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या नियुक्ति में लापरवाही हुई या किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई।

 

फिलहाल मामले की जांच जारी है। एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, संबंधित पक्षों की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

अमेरिकी हमलों से दहला ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य टकराव तेज

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बंदर अब्बास, सिरिक और केश्म में धमाकों से बढ़ा तनाव

 

तेहरान/होर्मुज। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल प्रणालियों, एयर डिफेंस सिस्टम और आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की नौसैनिक क्षमताओं को निशाना बनाकर बड़े हमले किए। इसके बाद बंदर अब्बास, सिरिक, केश्म द्वीप और जास्क क्षेत्र में लगातार कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी की और मिसाइल तथा ड्रोन हमले करने की कोशिश की। अमेरिकी नौसेना और वायु रक्षा प्रणालियों ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है।

ईरानी मीडिया के मुताबिक, बंदर अब्बास, सिरिक और केश्म द्वीप के कई इलाकों में जोरदार धमाके हुए। कुछ स्थानों पर संचार टावरों और सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने की भी खबर है। जास्क के आसपास भी कई विस्फोट दर्ज किए गए, हालांकि ईरान ने नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।

उधर अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था जिनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और जहाजों पर हमलों में किया जा रहा था। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

नशा मुक्ति उपचार: स्वस्थ जीवन की ओर लौटने का मार्ग

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डॉ विजय गर्ग

नशे की लत आज दुनिया की सबसे गंभीर स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौतियों में से एक है। शराब, तंबाकू, मादक पदार्थ, जुआ, ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया और स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग भी कई बार लत का रूप ले लेता है। नशा केवल व्यक्ति के शरीर को ही नहीं, बल्कि उसके मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन को भी गहराई से प्रभावित करता है।

 

सकारात्मक बात यह है कि नशे की लत का सफलतापूर्वक उपचार संभव है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नशा कोई चरित्र की कमजोरी या इच्छाशक्ति की कमी नहीं, बल्कि मस्तिष्क और व्यवहार से जुड़ी एक जटिल चिकित्सीय स्थिति है। उचित उपचार, परामर्श, परिवार के सहयोग और निरंतर प्रयास से व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ जीवन की ओर लौट सकता है।

 

नशा कैसे बनता है?

 

जब कोई व्यक्ति बार-बार किसी नशीले पदार्थ या आदत का सेवन करता है, तो मस्तिष्क के पुरस्कार (रिवॉर्ड) तंत्र में परिवर्तन होने लगते हैं। डोपामिन नामक रसायन के प्रभाव के कारण व्यक्ति को बार-बार उसी अनुभव की इच्छा होती है। धीरे-धीरे सहनशीलता (टॉलरेंस) बढ़ती जाती है और पहले जितना आनंद पाने के लिए अधिक मात्रा या अधिक समय तक उस आदत की आवश्यकता महसूस होती है। यही स्थिति धीरे-धीरे लत का रूप ले लेती है।

 

डिटॉक्सिफिकेशन (शरीर से नशे का प्रभाव हटाना)

 

नशा मुक्ति उपचार का पहला चरण डिटॉक्सिफिकेशन होता है। इसमें चिकित्सकों की देखरेख में शरीर से नशीले पदार्थों को धीरे-धीरे बाहर निकाला जाता है। कई बार नशा अचानक छोड़ने से गंभीर शारीरिक और मानसिक समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए यह प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में ही की जाती है।

 

संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (Cognitive Behavioral Therapy – CBT)

 

सीबीटी नशा मुक्ति की सबसे प्रभावी उपचार पद्धतियों में से एक है। इसमें व्यक्ति को उन विचारों, भावनाओं और परिस्थितियों की पहचान करना सिखाया जाता है जो उसे नशे की ओर ले जाती हैं। इसके बाद स्वस्थ सोच और सकारात्मक व्यवहार विकसित करने पर काम किया जाता है।

 

इस चिकित्सा से व्यक्ति:

 

– नशे के कारणों को समझता है।

– तनाव से निपटने के बेहतर तरीके सीखता है।

– नशे की तीव्र इच्छा को नियंत्रित करना सीखता है।

– दोबारा नशे की ओर लौटने की संभावना कम करता है।

 

प्रेरक परामर्श (Motivational Interviewing)

 

कई लोग नशा छोड़ना चाहते हैं, लेकिन उनमें आत्मविश्वास की कमी होती है। प्रेरक परामर्श के माध्यम से विशेषज्ञ व्यक्ति को स्वयं परिवर्तन के लिए प्रेरित करते हैं। यह उपचार व्यक्ति के भीतर सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और जीवन में बदलाव लाने की इच्छा को मजबूत बनाता है।

 

दवाइयों द्वारा उपचार

 

कुछ प्रकार के नशों में दवाइयों की सहायता भी ली जाती है। ये दवाइयाँ:

 

– नशे की इच्छा (क्रेविंग) को कम करती हैं।

– नशा छोड़ने पर होने वाली तकलीफों को नियंत्रित करती हैं।

– दोबारा नशा करने की संभावना को कम करती हैं।

 

दवाइयों का उपयोग केवल योग्य चिकित्सक की सलाह और निगरानी में ही किया जाना चाहिए।

 

समूह चिकित्सा (Group Therapy)

 

समूह चिकित्सा में नशा छोड़ने का प्रयास कर रहे लोग एक-दूसरे के अनुभव साझा करते हैं। इससे उन्हें यह एहसास होता है कि वे अकेले नहीं हैं। समूह का सहयोग आत्मविश्वास बढ़ाता है, प्रेरणा देता है और लंबे समय तक नशामुक्त रहने में सहायता करता है।

 

पारिवारिक चिकित्सा

 

नशे की समस्या केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करती है। पारिवारिक चिकित्सा के माध्यम से परिवार के सदस्यों के बीच विश्वास, संवाद और सहयोग को मजबूत किया जाता है। परिवार का सकारात्मक सहयोग उपचार की सफलता की संभावना को काफी बढ़ा देता है।

 

डिजिटल और ऑनलाइन उपचार

 

डिजिटल तकनीक ने नशा मुक्ति उपचार को अधिक सुलभ बना दिया है। आज टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन परामर्श, मोबाइल ऐप, डिजिटल सीबीटी कार्यक्रम और ऑनलाइन सहायता समूहों के माध्यम से लोग घर बैठे विशेषज्ञों से जुड़ सकते हैं। ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों के लोगों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रहा है।

 

योग, ध्यान और समग्र उपचार

 

आज अनेक नशा मुक्ति केंद्र पारंपरिक उपचार के साथ-साथ योग, ध्यान, नियमित व्यायाम, संगीत चिकित्सा, कला चिकित्सा और प्रकृति आधारित गतिविधियों को भी अपनाते हैं। ये उपाय तनाव कम करने, मानसिक संतुलन बनाए रखने और आत्म-नियंत्रण बढ़ाने में मदद करते हैं।

 

व्यवहार संबंधी लतों का उपचार

 

हर लत किसी नशीले पदार्थ से जुड़ी नहीं होती। आज मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग, जुआ और अनियंत्रित खरीदारी जैसी आदतें भी व्यवहार संबंधी लत के रूप में सामने आ रही हैं। इनके उपचार में व्यवहार चिकित्सा, समय प्रबंधन, डिजिटल अनुशासन, भावनात्मक संतुलन और परिवार की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

 

दोबारा नशे से बचाव

 

नशा छोड़ने के बाद भी कभी-कभी व्यक्ति फिर से उसकी ओर आकर्षित हो सकता है। इसे असफलता नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि उपचार को और मजबूत करने का अवसर समझना चाहिए। नियमित परामर्श, स्वस्थ दिनचर्या, सकारात्मक मित्रों का साथ, तनाव प्रबंधन और परिवार का सहयोग लंबे समय तक नशामुक्त जीवन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

करुणा और सहयोग की आवश्यकता

 

नशे से जूझ रहे लोगों को तिरस्कार या दंड की नहीं, बल्कि सहानुभूति, सम्मान और उचित उपचार की आवश्यकता होती है। समाज, परिवार, विद्यालय, कार्यस्थल और स्वास्थ्य सेवाओं का सहयोग व्यक्ति के पुनर्वास को आसान बनाता है। नशे को अपराध नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समझना समय की आवश्यकता है।

 

भविष्य की दिशा

 

तंत्रिका विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल स्वास्थ्य तकनीक और व्यक्तिगत चिकित्सा (पर्सनलाइज़्ड मेडिसिन) के क्षेत्र में हो रहे शोध नशा मुक्ति उपचार को और अधिक प्रभावी बना रहे हैं। भविष्य में ऐसे उपचार विकसित हो रहे हैं जो प्रत्येक व्यक्ति की जरूरतों के अनुसार अधिक सटीक और सफल होंगे।

 

नशे की लत जीवन का अंत नहीं है। सही समय पर उपचार, मजबूत इच्छाशक्ति, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और समाज का सकारात्मक दृष्टिकोण किसी भी व्यक्ति को नई शुरुआत करने का अवसर दे सकता है। नशा मुक्ति की हर छोटी सफलता एक स्वस्थ, सम्मानजनक और आशापूर्ण जीवन की ओर बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

25 हजार का इनामी गोवध आरोपी पुलिस मुठभेड़ में घायल, तमंचा, बांका और छुरी बरामद

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फर्रुखाबाद। कोतवाली कायमगंज पुलिस ने गोवध अधिनियम के एक मामले में फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी अभियुक्त को पुलिस मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने बरामदगी के दौरान पुलिस अभिरक्षा से भागने का प्रयास किया और अवैध तमंचे से पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग कर दी। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में आरोपी के बाएं पैर में गोली लग गई। घायल आरोपी को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कायमगंज में भर्ती कराया गया।

पुलिस के अनुसार रविवार, 13 जुलाई 2026 को कोतवाली कायमगंज पुलिस टीम गोवध अधिनियम के अभियोग में 25 हजार रुपये के इनामी अभियुक्त चंदा उर्फ चाँद मियां को उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त आलाकत्ल की बरामदगी के लिए थाना क्षेत्र के मीरपुर से कलाखेल जाने वाले खड़ंजा मार्ग के समीप जंगल में लेकर गई थी। इसी दौरान आरोपी अचानक पुलिस अभिरक्षा से छूटकर भाग निकला और झाड़ियों में पहले से छिपाकर रखे अवैध .315 बोर तमंचे को निकालकर पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायर कर दिया।

पुलिस टीम ने तत्काल आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी के बाएं पैर में गोली लग गई। गोली लगने के बाद पुलिस ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया और तत्काल उपचार के लिए सीएचसी कायमगंज भेजा, जहां उसका इलाज कराया गया।

घटना की सूचना मिलते ही जनपदीय फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य संकलित किए। पुलिस ने अभियुक्त की निशानदेही एवं कब्जे से एक अवैध .315 बोर तमंचा, एक जिंदा कारतूस, दो खोखा कारतूस, घटना में प्रयुक्त एक बांका तथा एक छुरी बरामद की है।

पुलिस ने बताया कि मुठभेड़, पुलिस पर फायरिंग तथा अवैध शस्त्र एवं आलाकत्ल की बरामदगी के संबंध में कोतवाली कायमगंज में अलग से अभियोग पंजीकृत कर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। आरोपी से पूछताछ के आधार पर मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है।