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Thursday, April 16, 2026
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यमुना नाव हादसा: सातवें दिन मिला अंतिम लापता शव, मृतकों की संख्या बढ़कर 16 हुई

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वृंदावन
यमुना नदी में हुए दर्दनाक नाव हादसे में लापता चल रहे पंकज मल्होत्रा का शव सातवें दिन बरामद कर लिया गया है। उनका शव हादसे स्थल से करीब ढाई किलोमीटर दूर देवरहा घाट और पानीगांव पुल के नीचे मिला, जहां पानी में फूलने के कारण शव ऊपर आ गया था। गोताखोरों और सेना के जवानों की मदद से शव को बाहर निकाला गया।

इस शव की बरामदगी के साथ ही इस हादसे में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 16 हो गई है। इससे पहले भी कई शव अलग-अलग स्थानों से बरामद किए जा चुके थे, जिससे लगातार चल रहा सर्च ऑपरेशन समाप्ति की ओर पहुंच गया है। प्रशासन ने अब अंतिम चरण की तलाशी और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही है।

इससे पहले सोमवार को भी दो और शव बरामद हुए थे, जिनमें एक महिला और एक युवक शामिल थे। महिला की पहचान लुधियाना निवासी मोनिका टंडन के रूप में हुई थी, जबकि युवक की पहचान यश भल्ला (22) के रूप में की गई थी। दोनों ही श्रद्धालु धार्मिक यात्रा पर वृंदावन आए थे और नाव दुर्घटना का शिकार हो गए थे।

यह हादसा 10 अप्रैल को दोपहर करीब 3 बजे उस समय हुआ था जब श्रद्धालुओं से भरी नाव यमुना नदी में अचानक पलट गई। घटना के बाद से ही NDRF, SDRF, PAC और स्थानीय गोताखोरों की संयुक्त टीम लगातार तलाशी अभियान चला रही थी। लगभग 250 लोगों की टीम ने कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन तेज बहाव और गहराई के कारण काम चुनौतीपूर्ण रहा।

फिलहाल प्रशासन ने सभी शवों की बरामदगी के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है और परिजनों को सूचना दे दी गई है। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

आरटीई प्रवेश अभियान तेज: 90 हजार सीटों पर नामांकन के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय

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लखनऊ
प्रदेश में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। नए शैक्षणिक सत्र में 1.95 लाख सीटों के मुकाबले अब तक करीब 1.05 लाख बच्चों का प्रवेश हो चुका है, जबकि लगभग 90 हजार सीटें अभी भी खाली हैं। इन शेष सीटों को भरने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रवेश की अंतिम तिथि एक सप्ताह और बढ़ा दी है।

विभाग के अनुसार, बचे हुए बच्चों के प्रवेश के लिए सभी जिलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। समग्र शिक्षा के उपनिदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि चयनित बच्चों का प्रवेश हर हाल में कराया जाए। इसके लिए रोजाना गूगल शीट के माध्यम से रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है, ताकि राज्य स्तर पर निगरानी की जा सके।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन निजी स्कूलों द्वारा आरटीई के तहत प्रवेश देने में आनाकानी की जा रही है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे स्कूलों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं और प्रवेश प्रक्रिया में बाधा डालने वालों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

इस बार आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को तीन चरणों में पूरा किया गया था और प्रयास किया गया कि अप्रैल से पहले ही पूरी प्रक्रिया संपन्न हो जाए। हालांकि, सीटों के खाली रहने के कारण अब अंतिम अवसर दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक पात्र बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिल सके।

इसी बीच राज्य में अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक तैयारियां भी चल रही हैं, जिनमें होमगार्ड भर्ती परीक्षा शामिल है। इसके लिए 25 से 27 अप्रैल के बीच परीक्षा आयोजित की जाएगी और सुरक्षा व पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। परीक्षा में लाखों अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है, जिसके चलते प्रशासन सतर्क है।

विकासनगर अग्निकांड: भीषण आग में 1200 झोपड़ियां खाक, दो बच्चों की मौत की पुष्टि, कई लापता

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लखनऊ
विकासनगर सेक्टर-12 स्थित रिंग रोड किनारे बनी अवैध बस्ती में बुधवार शाम हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को हिला दिया। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते करीब 1200 झोपड़ियां इसकी चपेट में आ गईं। इस दर्दनाक घटना में लापता छह बच्चों में से दो—आयुषी और स्वाती—की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, आग की शुरुआत एक झोपड़ी से हुई और कुछ ही मिनटों में यह पूरे इलाके में फैल गई। झोपड़ियों में रखे करीब 100 गैस सिलिंडर फटने से स्थिति और भयावह हो गई। लगातार धमाकों और आग की लपटों के कारण पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाकर भागने लगे।

घटना की सूचना पर 22 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और देर रात तक आग पर काबू पाने की कोशिश करती रहीं। हालांकि, आरोप है कि दमकल और पुलिस को सूचना देने के बावजूद उनकी प्रतिक्रिया में देरी हुई, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। इसी दौरान भीड़ नियंत्रण में भी मुश्किलें आईं और कई जगह धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बनी।

अग्निकांड के दौरान भारी नुकसान की भी आशंका जताई जा रही है, जिसमें करीब 50 मवेशियों के जलने की बात सामने आई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हादसे में छह बच्चे लापता बताए गए थे, जिनमें से दो की मौत की पुष्टि ने पीड़ित परिवारों का दर्द और बढ़ा दिया है। प्रशासन बाकी बच्चों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चला रहा है।

फिलहाल प्रशासन ने पूरे इलाके में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और पीड़ित परिवारों को राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

आंबेडकर प्रतिमा विवाद के पीछे जमीन कब्जे की साजिश का खुलासा

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लखीमपुर खीरी
जिले के बांकेगंज क्षेत्र के मोतीपुर गांव में हुए हिंसक बवाल को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। प्रशासनिक और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विवाद की जड़ केवल डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा लगाने और उसके टूटने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सरकारी जमीन पर कब्जे की कथित साजिश भी बताई जा रही है। पंचायत चुनाव के माहौल के बीच इस घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया।

जानकारी के अनुसार, विवादित स्थल थाना मैलानी क्षेत्र के बांकेगंज पुलिस चौकी अंतर्गत आता है, जहां गाटा संख्या 1167 की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में “खाद के गड्ढों” के रूप में दर्ज है। यह जमीन लगभग 0.061 हेक्टेयर है, जिसका एक हिस्सा पहले ही अवैध कब्जों और पक्के निर्माणों की चपेट में आ चुका है। आरोप है कि बचे हुए हिस्से पर भी कब्जे की कोशिश के तहत वहां प्रतिमा स्थापित की गई, जिसके बाद तनाव बढ़ गया।

स्थानीय स्तर पर प्रतिमा टूटने की घटना के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई और आक्रोशित लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी दौरान भीड़ में शामिल कुछ बाहरी तत्वों के पत्थरबाजी करने और हिंसा भड़काने के आरोप लगे। हालात इतने बिगड़े कि सरकारी और निजी वाहनों में तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस टीम पर हमले की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन ने पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया।

जांच के बाद प्रशासन ने दावा किया है कि यह जमीन पहले से ही कब्जे के दबाव में थी और केवल एक छोटा हिस्सा ही खाली बचा था, जिस पर नए सिरे से कब्जे की कोशिश की गई। अधिकारियों के अनुसार, बिना अनुमति प्रतिमा स्थापित करना और उसके बाद विवाद का बढ़ना एक सुनियोजित तनावपूर्ण स्थिति का हिस्सा हो सकता है। प्रशासन ने अब पूरे क्षेत्र की पैमाइश और कब्जेदारों की पहचान शुरू कर दी है।

फिलहाल पुलिस ने इस मामले में 19 लोगों को गिरफ्तार कर दो मुकदमे दर्ज किए हैं और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। प्रशासन का कहना है कि पूरी सरकारी जमीन को खाली कराया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम लगातार निगरानी कर रही है।

वेतन वृद्धि आंदोलन में सोशल मीडिया नेटवर्किंग और बाहरी राज्यों के कनेक्शन की जांच तेज

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नोएडा
हालिया श्रमिक बवाल को लेकर जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। एसटीएफ की शुरुआती जांच में सामने आया है कि वेतन वृद्धि को लेकर भड़का विवाद केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे डिजिटल नेटवर्किंग के जरिए बाहरी राज्यों से भी समन्वय किया जा रहा था। आरोप है कि तेलंगाना और कर्नाटक से कुछ लोगों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स के माध्यम से गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश की।

जांच एजेंसियों के अनुसार, हिंसा और प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों वीडियो बनाए गए, जिनमें से 500 से अधिक वीडियो की बारीकी से जांच की जा रही है। इन वीडियो में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने और उनकी गतिविधियों का विश्लेषण करने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनका फैक्ट्रियों या उद्योगों से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।

एसटीएफ को यह भी जानकारी मिली है कि लगभग 80 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे, जिनका इस्तेमाल श्रमिकों को संगठित करने और कथित रूप से उकसाने के लिए किया गया। इनमें से कई ग्रुपों की जांच चल रही है और कुछ का सत्यापन भी पूरा हो चुका है। इसके अलावा, टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए भी निर्देश और संदेश फैलाए जाने के संकेत मिले हैं।

इस पूरे मामले में पुलिस ने कई संगठनों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि कुछ संगठन फैक्ट्री क्षेत्रों में सक्रिय होकर श्रमिकों को प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रहे थे। इसी सिलसिले में 600 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है, जबकि आगे की कार्रवाई और पहचान प्रक्रिया जारी है।

फिलहाल प्रशासन ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस और प्रशासन का दावा है कि अधिकांश फैक्ट्रियों में कामकाज फिर से सामान्य हो रहा है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए फैलाई गई कथित गतिविधियों की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।

बिल्हौर-शिवराजपुर हाईवे पर सड़क हादसा में तीन की मौत

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कानपुर
बिल्हौर क्षेत्र के शिवराजपुर स्थित दुबियाना अंडरपास के ऊपर गुरुवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। हाईवे पर चार बाइक सवारों को एक अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे मौके पर ही तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा उस समय हुआ जब सभी लोग भांजे के तिलक समारोह से वापस अपने घर लौट रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक सवार सड़क पर दूर तक जा गिरे और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। हादसे के बाद अज्ञात वाहन चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जांच कर रही है।

मृतकों की पहचान बिठूर थाने के बाकरगंज गांव निवासी विनोद निषाद (45), रामनारायण (52) और पियूष निषाद (11) के रूप में हुई है। वहीं घायल दीक्षा को गंभीर हालत में रामा अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। तीन मौतों की खबर से गांव में मातम छा गया और परिवारों में कोहराम मच गया।

पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में अज्ञात वाहन की तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि वाहन की पहचान की जा सके।

इस घटना ने एक बार फिर हाईवे पर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस इलाके में स्पीड कंट्रोल और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।