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Monday, July 13, 2026
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लखनऊ विश्वविद्यालय में 41वें दिन भी छात्रों का धरना जारी, फीस वृद्धि और निष्कासन के विरोध में आंदोलन तेज

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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना रविवार को 41वें दिन भी जारी रहा। छात्र फीस वृद्धि वापस लेने और निष्कासित छात्रों की बहाली की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। धरनास्थल पर छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की।

आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि यह केवल फीस वृद्धि का मुद्दा नहीं, बल्कि शिक्षा तक समान पहुंच और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संघर्ष है। उनका आरोप है कि फीस में बढ़ोतरी से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जबकि निष्कासित छात्रों की बहाली भी न्यायसंगत तरीके से की जानी चाहिए।

छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से वार्ता कर समाधान निकालने की भी मांग की।

वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक आंदोलन समाप्त कराने को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। परिसर में स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई है।
छात्र संगठनों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार सभी के लिए सुलभ होना चाहिए और विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से करना चाहिए।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बनेगा यूपी की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की नई धुरी, तीन एक्सप्रेसवे होंगे आपस में जुड़े

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सड़क अवसंरचना को नई गति देने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे राज्य के तीन प्रमुख एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बनने जा रहा है। लगभग 63 किलोमीटर लंबा यह छह लेन (भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित होने योग्य) एक्सप्रेसवे लखनऊ के शहीद पथ को कानपुर से जोड़ेगा। इसके चालू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय 2 से 3 घंटे से घटकर लगभग 35 से 40 मिनट रह जाने की उम्मीद है।
यह एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे तथा लखनऊ-कानपुर (अवध) एक्सप्रेसवे के बीच महत्वपूर्ण संपर्क स्थापित करेगा। इससे उत्तर प्रदेश का हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा तथा प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिस्सों के बीच तेज आवागमन संभव होगा।
इस परियोजना से लखनऊ, कानपुर नगर, उन्नाव, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हरदोई, रायबरेली, प्रयागराज, मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, गाजियाबाद सहित अनेक जिलों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्नाव प्रदेश का ऐसा महत्वपूर्ण जिला बन रहा है, जहां तीन प्रमुख एक्सप्रेसवे का नेटवर्क विकसित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद लखनऊ और कानपुर के बीच औद्योगिक निवेश, वेयरहाउसिंग, रियल एस्टेट, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ेंगे। साथ ही प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क और मजबूत होकर माल परिवहन तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई रफ्तार देगा।

₹4,700 करोड़ का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कल राष्ट्र को समर्पित, उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का लोकार्पण सोमवार, 13 जुलाई को किया जाएगा। लगभग ₹4,700 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा निर्मित यह एक्सप्रेसवे प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर के बीच आवागमन को नई गति देगा। उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की संभावना है।

करीब 63 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इस पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद लखनऊ से कानपुर का सफर, जो सामान्य दिनों में ट्रैफिक के कारण 2 से 3 घंटे तक का हो जाता था, अब घटकर 35 से 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

वर्ष 2020 में शुरू हुई इस परियोजना में लगभग 45 किलोमीटर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और करीब 18 किलोमीटर एलिवेटेड सेक्शन का निर्माण किया गया है। मार्ग पर आधुनिक इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है, जिसमें हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, स्पीड रडार, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, वेरिएबल मैसेज साइन और दुर्घटना पहचान प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। इससे यातायात अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित रहेगा।
यह एक्सप्रेसवे केवल दो शहरों के बीच दूरी कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को भी मजबूत करेगा। इसके माध्यम से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और अन्य प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतर संपर्क स्थापित होगा। इससे लखनऊ, कानपुर, उन्नाव सहित मध्य एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों को तेज़ और सुगम सड़क संपर्क मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे के संचालन से क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, रियल एस्टेट, पर्यटन और रोजगार को नई गति मिलेगी। भारी वाहनों का दबाव पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग से कम होगा, जिससे ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी और यात्रा अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक होगी।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर टोल दरें जारी, कार के लिए एकतरफा सफर ₹275 से शुरू

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लखनऊ। सोमवार से आम जनता के लिए खुलने जा रहे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए टोल दरें तय कर दी गई हैं। लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस छह लेन एक्सप्रेसवे पर कार, जीप और वैन के लिए एक तरफ का टोल ₹275 निर्धारित किया गया है। वहीं, 24 घंटे के भीतर वापसी करने पर ₹415 का टोल देना होगा। नियमित यात्रियों के लिए मासिक पास की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
वाहन श्रेणीवार टोल दरें (रुपये में)
वाहन| एकतरफा| 24 घंटे में वापसी| मासिक पास
कार, जीप, वैन| 275| 415| 9,220
हल्के व्यावसायिक वाहन/मिनी बस| 445| 670| 14,890
बस एवं ट्रक| 935| 1,405| 31,200
तीन एक्सल व्यावसायिक वाहन| 1,020| 1,530| 34,040
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अनुसार एक्सप्रेसवे पर अधिकतम 120 किमी प्रति घंटा की गति से वाहन चलाए जा सकेंगे। इसके संचालन से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा समय लगभग 35 से 45 मिनट रह जाएगा, जबकि अभी सामान्य परिस्थितियों में यह सफर 2 से 3 घंटे तक लेता है।
करीब ₹4,700 करोड़ की लागत से तैयार यह एक्सप्रेसवे प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर के बीच तेज, सुरक्षित और निर्बाध आवागमन उपलब्ध कराएगा। इससे उन्नाव सहित आसपास के जिलों को भी बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार, उद्योग और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

भाजयुमो के शक्ति प्रदर्शन से लखनऊ की यातायात व्यवस्था प्रभावित, रोड शो के दौरान कई मार्गों पर लगा जाम

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लखनऊ। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रोहित मिश्रा के पदभार ग्रहण समारोह और रोड शो के दौरान रविवार को राजधानी लखनऊ के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। 1090 चौराहे, हजरतगंज, विधानसभा मार्ग, चारबाग और गोमतीनगर समेत कई इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिससे आम नागरिकों को काफी देर तक जाम का सामना करना पड़ा।

रोड शो में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और वाहनों का काफिला शामिल हुआ। सोशल मीडिया पर कई वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, जिनमें भारी भीड़ और यातायात जाम दिखाई दे रहा है। कुछ लोगों ने दावा किया कि जाम के कारण एंबुलेंस सहित अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहन भी प्रभावित हुए। हालांकि, इन दावों पर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. रोहित मिश्रा का क्रेन की सहायता से विशाल माला पहनाकर स्वागत किया गया। उन्हें तलवार, गदा, फरसा, भगवान राम की प्रतिमा और रामचरितमानस भेंट की गई। रोड शो के दौरान वह खुले वाहन में समर्थकों का अभिवादन करते नजर आए।

पदभार ग्रहण के बाद डॉ. रोहित मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी इसी मार्ग पर कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन उन्होंने युवाओं को अवसर और आशीर्वाद देने के उद्देश्य से अपना कार्यक्रम निरस्त कर दिया।

इस आयोजन को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक कार्यक्रमों में सादगी और कम वाहनों के उपयोग की अपील का हवाला देते हुए आयोजन की आलोचना की। वहीं भाजपा समर्थकों ने इसे संगठन की ताकत और युवा कार्यकर्ताओं के उत्साह का प्रतीक बताया।

यूपी ने रचा हरित इतिहास, एक दिन में 35 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य पूरा; ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान बना जनआंदोलन

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए रविवार को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत एक ही दिन में 35 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य पूरा करने का दावा किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर से राज्यव्यापी पौधरोपण महायज्ञ-2026 का शुभारंभ किया। यह अभियान वन विभाग, विभिन्न सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी के साथ प्रदेशभर में चलाया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पौधरोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महायज्ञ है। उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर नीम, पीपल और बरगद की पवित्र त्रिवेणी के पौधे रोपकर अभियान का शुभारंभ किया और प्रदेशवासियों से पौधे लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प लेने का आह्वान किया।
प्रदेश सरकार के अनुसार इस महाअभियान में वन विभाग ने 15 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य पूरा किया, जबकि अन्य विभागों, ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों ने भी बड़े स्तर पर सहभागिता की। पौधरोपण के लिए पूरे प्रदेश में 5.25 लाख से अधिक स्थान चिन्हित किए गए थे और इसके लिए 52.44 करोड़ पौधे विभिन्न नर्सरियों में तैयार किए गए थे।
राज्य सरकार का कहना है कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में करोड़ों पौधे लगाए गए हैं, जिससे वन एवं हरित क्षेत्र के विस्तार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार का लक्ष्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, वायु प्रदूषण और भूजल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए जनभागीदारी आधारित हरित अभियान को मजबूत करना है।
हालांकि, किसी भी वृक्षारोपण अभियान की वास्तविक सफलता लगाए गए पौधों की संख्या से अधिक उनके जीवित रहने और वृक्ष बनने की दर पर निर्भर करेगी। पर्यावरण विशेषज्ञ भी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि पौधरोपण के साथ नियमित सिंचाई, सुरक्षा, जियो-टैगिंग और निगरानी सुनिश्चित की जाए, तभी ऐसे अभियान दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ दे सकेंगे।