नोएडा
हालिया श्रमिक बवाल को लेकर जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। एसटीएफ की शुरुआती जांच में सामने आया है कि वेतन वृद्धि को लेकर भड़का विवाद केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे डिजिटल नेटवर्किंग के जरिए बाहरी राज्यों से भी समन्वय किया जा रहा था। आरोप है कि तेलंगाना और कर्नाटक से कुछ लोगों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स के माध्यम से गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश की।
जांच एजेंसियों के अनुसार, हिंसा और प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों वीडियो बनाए गए, जिनमें से 500 से अधिक वीडियो की बारीकी से जांच की जा रही है। इन वीडियो में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने और उनकी गतिविधियों का विश्लेषण करने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनका फैक्ट्रियों या उद्योगों से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
एसटीएफ को यह भी जानकारी मिली है कि लगभग 80 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे, जिनका इस्तेमाल श्रमिकों को संगठित करने और कथित रूप से उकसाने के लिए किया गया। इनमें से कई ग्रुपों की जांच चल रही है और कुछ का सत्यापन भी पूरा हो चुका है। इसके अलावा, टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए भी निर्देश और संदेश फैलाए जाने के संकेत मिले हैं।
इस पूरे मामले में पुलिस ने कई संगठनों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि कुछ संगठन फैक्ट्री क्षेत्रों में सक्रिय होकर श्रमिकों को प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रहे थे। इसी सिलसिले में 600 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है, जबकि आगे की कार्रवाई और पहचान प्रक्रिया जारी है।
फिलहाल प्रशासन ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस और प्रशासन का दावा है कि अधिकांश फैक्ट्रियों में कामकाज फिर से सामान्य हो रहा है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए फैलाई गई कथित गतिविधियों की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।


