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Wednesday, June 10, 2026
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शंभू बॉर्डर पर एक और किसान ने जहर खाकर की आत्महत्या, अस्पताल में तोड़ा दम

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Suicide
Suicide

नई दिल्ली। शंभू बॉर्डर पर गुरुवार को एक और किसान ने जहर खाकर आत्महत्या (Suicide) कर ली है। सल्फास की गोलियां खाने से किसान की मौत हो गई। बता दें कि इससे पहले भी एक किसान की इसी तरह जहर खाने से मौत हो गई थी।

शंभू बॉर्डर पर जहर खाने से मरने वालों किसानों की संख्या दो हो गई है। मरने वाले किसान का नाम रेशम सिंह है।

रेशम ने शंभू बॉर्डर में सल्फास खा लिया। इसके बाद उन्हें गंभीर हालत में राजपुरा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। मगर वहां उन्होंने दम तोड़ दिया। रेशम सिंह जगतार सिंह के बेटे हैं। वह तरतारन जिले के पाहू विंड के रहने वाले थे।

आज का भारत ग्लोबल साउथ की आवाज को पूरी ताकत से उठाता है: मोदी

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भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने शुक्रवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 18वें प्रवासी भारतीय दिवस के मौके पर प्रवासी भारतीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। पीएम मोदी ने इस मौके पर प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और कहा कि हमारे सामने 2047 का लक्ष्य है। विकसित भारत के निर्माण की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए पीएम मोदी ने सम्राट अशोक से लेकर महात्मा बुद्ध तक की चर्चा की और यह भी कहा कि पिछले 10 साल में दुनिया के कई नेताओं से हमारी मुलाकात हुई और सबने अपने देश में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की सराहना की।

पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में भारत का डंका बज रहा है। भारत की बात को आज दुनिया ध्यान से सुनती है। आज का भारत अपना पक्ष तो मजबूती से रखता ही है, ग्लोबल साउथ की आवाज को भी पूरी ताकत से उठाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सफलता आज दुनिया देख रही है। आज जब भारत का चंद्रयान शिव शक्ति पॉइंट पर पहुंचता है, जब दुनिया डि​जिटल इंडिया की ताकत देखकर हैरान होती है तो हम सभी को गर्व होता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत का हर सेक्टर आसमान की ऊंचाई छूने को आगे बढ़ रहा है।

प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि 21वीं सदी का भारत जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिस पैमाने पर देश में विकास के काम हो रहे हैं, वह अभूतपूर्व है। पीएम मोदी ने लड़ाकू विमान के देश में ही निर्माण का भी जिक्र किया और कहा कि पीएम मोदी ने आगे कहा कि कुछ ही दिनों में प्रयागराज में महाकुंभ शुरू हो जाएगा। मकर संक्रांति, माघ बिहू जैसे त्योहार भी आने वाले हैं। हर तरफ आनंद का वातावरण रहेगा। उन्होंने इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि दुनिया में जब तलवार के जोर पर साम्राज्य बढ़ाने का दौर था, तब हमारे सम्राट अशोक ने यहां शांति का रास्ता चुना था।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी विरासत का ये वही बल है जिसकी प्रेरणा से आज भारत दुनिया को ये कह पाता है कि भविष्य युद्ध में नहीं है, बुद्ध में है। उन्होंने कहा कि हमेशा ही भारतीय डायस्पोरा को भारत का राष्ट्रदूत माना है। बहुत खुशी होती है जब पूरी दुनिया में आप सभी साथियों से मिलता हूं, बातचीत करता हूं। आपका प्यार, आपका आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहता है। पीएम मोदी ने प्रवासी भारतीयों की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां के समाज के साथ जुड़ जाते हैं। वहां के नियम और परंपरा का सम्मान करते हैं।

उन्होंने आगे ये भी कहा कि हम पूरी ईमानदारी से उस देश की, उस समाज की सेवा करते हैं। इन सबके साथ ही हमारे दिल में भारत भी धड़कता रहता है। पीएम ने कहा कि हम सिर्फ मदर ऑफ डेमोक्रेसी नहीं हैं। डेमोक्रेसी हमारे जीवन का हिस्सा हैं। हमें डायवर्सिटी सिखानी नहीं पड़ती, हमारा जीवन ही डायवर्सिटी से चलता है। उन्होंने इस मौके पर अपनी अगुवाई वाली सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं।

डरने की जरूरत नहीं, बस चीन की रहस्यमयी बीमारी HMPV से रहें सावधान

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डा. सूर्यकान्त

हाल ही में ह्यूमन मेटान्यूमो वायरस (HMPV) संक्रमण के मामलों ने देश में हलचल मचा दी है। कोविड-19 महामारी की यादें अभी ताजा हैं और चीन से आई इस नई बीमारी ने एक बार फिर डर का माहौल बना दिया है। हालांकि, डरने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है।

एच.एम.पी.वी. कोई नई बीमारी नहीं है। 2001 में नीदरलैंड में खोजा गया यह श्वसन वायरस सामान्य सर्दी, बुखार, खांसी, नाक बंद होना और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण पैदा करता है। गंभीर मामलों में यह ब्रोंकाइटिस और निमोनिया का कारण बन सकता है।

इस वायरस का प्रभाव खासतौर पर 14 साल से कम आयु वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में देखा गया है।
HMPV के लिए अभी तक कोई विशेष टीका या एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। संक्रमित व्यक्ति को आराम, सामान्य बुखार कम करने वाली दवाएं, और जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सपोर्ट से ठीक किया जा सकता है।

बचने के लिए मास्क पहनें और खांसते-छींकते समय मुंह ढकें। भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें। बार-बार साबुन और पानी से हाथ धोएं।संक्रमित व्यक्तियों से दूरी बनाए रखें। हाथ मिलाने की बजाय नमस्ते से अभिवादन करें। खुद को हाइड्रेटेड रखें और पौष्टिक भोजन लें।डॉक्टर की सलाह लें, अफवाहों से बचें ,सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों से सतर्क रहें। चिकित्सा सलाह के लिए केवल प्रमाणित डॉक्टरों और सरकारी हेल्पलाइन का सहारा लें।

एच.एम.पी.वी. पर डर की जगह सतर्कता और जागरूकता से इसे रोका जा सकता है। भारत ने पहले भी कोविड-19 जैसी बड़ी चुनौती को सफलतापूर्वक संभाला है। सरकार और नागरिकों के सामूहिक प्रयास से इस स्थिति को भी नियंत्रित किया जा सकता है। बस सतर्क रहें और आवश्यक सावधानियां अपनाएं।

संगठन निर्माण की नई राह पर कांग्रेस – जिलाध्यक्ष चयन में पारदर्शिता की पहल

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस (Congress) का पुनरुत्थान एक लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। लेकिन हाल ही में, पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत संगठन निर्माण में एक नई प्रक्रिया अपनाने की घोषणा की है। इस नई प्रक्रिया में पार्टी जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर इंटरव्यू आधारित चयन का प्रावधान लेकर आई है। यह पहल न केवल पार्टी संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, बल्कि यह पार्टी की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को भी नया आयाम देती है।

उत्तर प्रदेश, जिसे कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, पिछले कुछ दशकों से पार्टी के लिए संघर्ष का मैदान बना हुआ है। क्षेत्रीय दलों के प्रभुत्व और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बढ़ती लोकप्रियता ने कांग्रेस को प्रदेश की मुख्यधारा की राजनीति से लगभग बाहर कर दिया है। 2024 के लोकसभा चुनावों के परिणामों ने पार्टी को नए आत्मविश्वास से भर दिया है, और इसी के मद्देनजर यह नई रणनीति अपनाई गई है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने संगठनात्मक ढांचे को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इस प्रक्रिया को लागू करने का फैसला किया है। यह कदम न केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं को प्रेरित करेगा, बल्कि संगठन में उस भरोसे को भी बहाल करेगा, जो पिछले वर्षों में कमजोर पड़ा है।
प्रियंका गांधी वाड्रा के समय से उत्तर प्रदेश को छह जोनों में विभाजित किया गया था। इस जोनल सिस्टम को जारी रखते हुए अब प्रत्येक जोन में 10 से 13 जिलों को शामिल किया गया है। यह संरचना संगठन को क्षेत्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास है। पार्टी ने हर जिले में एक जिलाध्यक्ष और एक महानगर अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए नए मानक तय किए हैं।

अजय राय का यह कहना कि “इस बार सिफारिश के बजाय जमीन से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी,” पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में पारदर्शिता और जमीनी हकीकत को प्रतिबिंबित करता है। यह पहल उन कार्यकर्ताओं को पहचान देने का वादा करती है, जिन्होंने पार्टी के लिए निष्ठा और मेहनत से काम किया है।

जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के चयन के लिए इंटरव्यू आधारित प्रक्रिया अपनाई गई है। इसमें उम्मीदवारों से पार्टी के 10 तय सवाल पूछे जाएंगे। सवाल मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर आधारित होंगे: जैसे पार्टी की विचारधारा और नीतियों की समझ।पार्टी के कार्यक्रमों और आंदोलनों में भागीदारी के प्रमाण। संगठन को मजबूत करने के लिए उनकी योजनाएं और रणनीतियां।स्थानीय समस्याओं को समझने और समाधान देने की उनकी क्षमता।इंटरव्यू प्रक्रिया के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उम्मीदवार न केवल पार्टी के प्रति वफादार हों, बल्कि संगठन को आगे ले जाने के लिए दृष्टिकोण और कार्यक्षमता भी रखते हों।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस प्रक्रिया के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि सिफारिश आधारित चयन प्रणाली पार्टी के कार्यकर्ताओं में हताशा का कारण बनी थी। यह नई प्रक्रिया इस चलन को समाप्त करने और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने का प्रयास है। यह पहल पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जोनों में क्षेत्रीय संतुलन और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना पार्टी की इस नई रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह प्रक्रिया न केवल संगठन को अधिक समावेशी बनाएगी, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के कार्यकर्ताओं को भी एक मंच प्रदान करेगी।उदाहरण के लिए पूर्वांचल के जिलाध्यक्षों के इंटरव्यू सबसे पहले आयोजित किए गए।

इसके बाद प्रयागराज, अवध, बुंदेलखंड, ब्रज, और पश्चिम जोन के कार्यकर्ताओं के इंटरव्यू होंगे। इस नई पहल के पीछे पार्टी की यह उम्मीद है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक मजबूत संगठन तैयार किया जा सके। लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं है। कांग्रेस को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा: जैसे भाजपा और क्षेत्रीय दलों की गहरी जड़ें हैं। कांग्रेस को इनके प्रभाव को चुनौती देने के लिए नए नेतृत्व को प्रेरित करना होगा।पार्टी के पास युवाओं के लिए आकर्षक कार्यक्रम और नेतृत्व विकास के अवसर होने चाहिए।जनता के बीच कांग्रेस की एक नई छवि पेश करना अनिवार्य है। इंटरव्यू आधारित प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि केवल मेहनती और योग्य कार्यकर्ता ही नेतृत्व की जिम्मेदारी लें।सिफारिश की राजनीति को खत्म करने से पार्टी के अंदर विश्वास का माहौल बनेगा।हर जिले और महानगर में प्रभावी नेतृत्व का गठन होगा।

पार्टी का यह कदम तभी सफल होगा जब इसे राष्ट्रीय नेतृत्व का पूर्ण समर्थन मिलेगा। उत्तर प्रदेश में संगठन के पुनर्निर्माण के लिए प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेताओं को व्यक्तिगत रूप से जुड़ना होगा।
दिल्ली आलाकमान द्वारा तैयार की गई अंतिम रिपोर्ट यह तय करेगी कि किसे जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया जाएगा। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।
पार्टी के इस बदलाव की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह सिफारिश की परंपरा से कितना हट पाती है। यदि कांग्रेस वास्तव में केवल जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को नेतृत्व प्रदान करती है, तो यह न केवल पार्टी के अंदर बल्कि जनता के बीच भी सकारात्मक संदेश देगा।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की यह नई पहल निश्चित रूप से संगठन को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इंटरव्यू आधारित चयन प्रक्रिया और क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित करने की कोशिश पार्टी के प्रति एक नई आशा का संचार करती है।
हालांकि, इस प्रक्रिया की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि पार्टी इसे कितनी ईमानदारी और पारदर्शिता से लागू करती है। अगर कांग्रेस इस बदलाव को सही ढंग से अमल में लाती है, तो यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में पार्टी के पुनरुत्थान का आधार बन सकता है।

2027 के विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करना और जनता के बीच अपनी पकड़ बनाना कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई रणनीति पार्टी को कितनी मजबूती देती है और वह अपने पुराने गढ़ उत्तर प्रदेश में कितनी सफलता हासिल कर पाती है।

तिरुपति मंदिर में भगदड़, 6 श्रद्धालुओं ने गंवाई जान और कई घायल

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आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर (Tirupati Temple) में बुधवार रात भगदड़ की घटना सामने आयी। इस भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गयी, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) प्रमुख ने इस बारे में जानकारी दी हैं। वहीं, मंदिर में भगदड़ क्यों मची? इसके पीछे की वजह वैकुंठ द्वार दर्शनम के लिए सैकड़ों लोग टिकट की मार-मारी बतायी जा रही है।

दरअसल, तिरुपति में वैकुंठ एकादशी उत्सव शुरू होने से दो दिन पहले वैकुंठ द्वार दर्शन टोकन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ने से भगदड़ मच गई। गुरुवार की सुबह पांच बजे से एसएसडी टोकन जारी किए जाने की व्यवस्था की गई है। टिकट या टोकन मुहैया कराने के लिए 90 से अधिक टिकट काउंटर बनाए गए थे। लेकिन, एक दिन पहले बुधवार शाम से ही टोकन के लिए काउंटरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। जिसके बाद देखते ही देखते वहां भगदड़ मच गई और छह लोगों की मौत हो गयी।

एक प्रत्यक्षदर्शी महिला ने बताया कि भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। जैसे ही पुलिस अधिकारियों ने गेट खोला, तीर्थयात्री टोकन खरीदने के लिए दौड़ पड़े। पहले टोकन पाने की ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। उनके परिवार के बीस सदस्यों में से छह लोग भगदड़ में घायल हो गए हैं। घटना पर पीएम नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने दुख जताया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भगदड़ के पीड़ितों को हर संभव सहायता प्रदान करने का आग्रह किया है।

अखिलेश यादव के करीबी का निधन, पार्टी में दौड़ी शोक की लहर

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लखनऊ। यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई और सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के चाचा राजपाल सिंह यादव (Rajpal Yadav) का गुरुवार सुबह निधन हो गया। राजपाल सिंह यादव लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में तड़के 4 बजे अंतिम सांस ली। राजपाल के निधन की खबर से मुलायम परिवार और सपा के कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गयी है।

मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई राजपाल सिंह यादव का राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में योगदान रहा है। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव सैफई में किया जाएगा। जिसके लिए राजपाल यादव के पार्थिव शरीर को परिवार के लोग सैफई के लिए रवाना हो चुके हैं। दोपहर 1 बजे तक पार्थिव शरीर के सैफई पहुंचने की संभावना है।

बताया जा रहा है कि अंतिम दर्शन के लिए राजपाल यादव के पार्थिव शरीर को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आवास पर बने गेस्ट हाउस में रखा जाएगा। शाम 5 बजे सैफई में साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से पोस्ट करके राजपाल सिंह यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया है। पार्टी ने लिखा, “अत्यंत दुखद! श्रद्धेय नेताजी के अनुज श्री राजपाल यादव जी का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में लंबे इलाज के बाद आज प्रात: निधन हो गया है। अंतिम संस्कार आज दोपहर के बाद सैफ़ई में किया जाएगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें, भावपूर्ण श्रद्धांजलि!”