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Wednesday, June 10, 2026
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प्लांट की चिमनी गिरने से बड़ा हादसा, 30 लोग दबे; 5 से ज्यादा की मौत की आशंका

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मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में बड़ा हादसा हुआ है। गुरुवार शाम सरगांव थाना क्षेत्र के रामबोड़ इलाके में कुसुम प्लांट में चिमनी गिरने (Chimney Collapsed) से 30 लोग दब गए। इनमें से 5 से ज्यादा की मौत की आशंका जताई जा रही है। घटना के तुरंत बाद मौके से दो लोगों को चिमनी से मलबे से निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद है। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास जारी है।

यह हादसा मुंगेली जिले में बिलासपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे रामबोड गांव में स्थित कुसुम प्लांट में हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, प्लांट में रखे भारी सैलो (सामान भंडारण टैंक) अचानक गिर जाने से वहां काम कर रहे कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए। 30 मजदूर इसी के मलबे के नीचे दब गए। यह देख प्लांट में काम कर रहे अन्य कर्मचारी चीख-पुकार मचाने लगे। आनन-फानन में हादसे की सूचना पुलिस और प्रशासन को दी गई।

मलबे से 2 लोगों को बाहर निकाला गया

घटना की सूचना मिलते ही सरगांव थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर जिले के आला अधिकारी भी पहुंच गए। पुलिस और फायर ब्रिगेड की रेस्क्यू टीम राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है। अभी तक मलबे से दो लोगों को बाहर निकाला गया है। इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं 5 से ज्यादा की मौत की आशंका जताई जा रही है।

कुसुम प्लांट में हुआ हादसा

बताया जा रहा है कि कुसुम प्लांट को इलाके में स्पंज आयरन फैक्ट्री के नाम से भी जाना जाता है। यह फैक्ट्री अभी निर्माणाधीन है। गुरुवार को काम काज के दौरान ही चिमनी गिर पड़ी और 30 लोग उसी में दब गए। फिलहाल पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद है। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कवायद जारी है। मलबे को हटाने बड़ी क्रेन और JCB मशीन मंगवाई गई है। साथ ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मौजूद हैं। बड़ी संख्या में पुलिस और मेडिकल टीम मौजूद है।

सुकमा-बीजापुर बॉर्डर पर सुरक्षाबलों ने तीन नक्सलियों को किया ढेर, मुठभेड़ जारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों (Naxalites) के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई जारी है। इस कड़ी में सुकमा जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ चल रही है। जिसमें तीन नक्सलियों के मारे जाने की खबर है। एसपी सुकमा किरण चव्हाण ने जानकारी दी है कि तीन नक्सलियों के शव और हथियार बरामद किए गए हैं। तलाशी अभियान अभी भी जारी है।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार की सुबह बीजापुर और सुकमा के बॉर्डर पर जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। इसमें रिजर्व बैंक गार्ड, स्पेशल टास्क फोर्स और जनरल स्टाफ की कोबरा यूनिट के जवान शामिल हैं।

सुकमा में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच चल रही मुठभेड़ पर छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा, “सुकमा में सुरक्षा बलों को अपने अभियान में सफलता मिली है। आज वहां से 3 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। वहां सर्च ऑपरेशन जारी है।”

इससे पहले 4 जनवरी को भी सुरक्षाबलों ने अबूझमाड़ इलाके में मुझभेड़ के दौरान पांच नक्सलियों को मार गिराया था। सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान में पांचों केशव बरामद किए गए थे। इस एनकाउंटर में एक जवान भी शहीद हुआ था। इसके बाद 6 जनवरी को कुटरू के पास नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट कर एंटी नक्सल ऑपरेशन से लौटे सुरक्षाबलों की एक गाड़ी को निशाना बनाया, जिसमें एक ड्राइवर समेत 8 जवान बलिदान हो गए थे।

महाकुंभ और मकर संक्रांति का गहरा वैज्ञानिक महत्व

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विजय गर्ग

महाकुंभ और मकर संक्रांति (Makar Sankranti) दोनों का गहरा वैज्ञानिक और खगोलीय महत्व है, जो आकाशीय पिंडों की गतिविधियों और पृथ्वी पर उनके प्रभाव में निहित है। इन घटनाओं के पीछे का वैज्ञानिक तर्क इस प्रकार है:

मकर संक्रांति: वैज्ञानिक व्याख्या

1. खगोलीय घटना

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का प्रतीक है, जो सूर्य की उत्तर की ओर यात्रा (उत्तरायण) का संकेत देता है।

यह परिवर्तन शीतकालीन संक्रांति के बाद होता है जब उत्तरी गोलार्ध में दिन लंबे होने लगते हैं, जो गर्मी और नवीनीकरण की शुरुआत का प्रतीक है।

2. सौर विकिरण में परिवर्तन

सूर्य के कर्क रेखा की ओर बढ़ने से उत्तरी गोलार्ध में सौर ऊर्जा बढ़ती है, जो जलवायु और कृषि चक्र को प्रभावित करती है।

यह संक्रमण जैविक लय को प्रभावित करता है, कायाकल्प और जीवन शक्ति को प्रोत्साहित करता है।

3. विटामिन डी अवशोषण

इस अवधि के दौरान, लोग पारंपरिक रूप से धूप सेंकते हैं या धूप में अधिक समय बिताते हैं, जिससे शरीर को अधिक विटामिन डी का उत्पादन करने में मदद मिलती है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा के लिए आवश्यक है।

4. संस्कारों का वैज्ञानिक आधार

तिल और गुड़ का सेवन केवल सांस्कृतिक नहीं है; ये खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो ठंड के महीनों के दौरान शरीर को गर्म और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करते हैं।

महाकुंभ: वैज्ञानिक व्याख्या

खगोलीय संरेखण

महाकुंभ तब आयोजित होता है जब सूर्य मकर राशि में, चंद्रमा मेष राशि में और बृहस्पति कुंभ राशि में होता है। माना जाता है कि ये खगोलीय संरेखण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को बढ़ाते हैं और मानव स्वास्थ्य और चेतना को प्रभावित करते हैं।

नदियों की शुद्धि एवं स्नान

माना जाता है कि इस संरेखण के दौरान गंगा जैसी नदियों में प्राकृतिक विषहरण गुणों में वृद्धि हुई है। इस दौरान जल निकायों के पास बढ़ी हुई ओजोन और यूवी विकिरण माइक्रोबियल कमी और शुद्धिकरण में योगदान दे सकती है।

सामूहिक एकत्रीकरण और प्रतिरक्षा

महाकुंभ में भागीदारी में सांप्रदायिक गतिविधियां और विविध वातावरण का अनुभव शामिल है, जो माइक्रोबायोम एक्सचेंज के माध्यम से प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित कर सकता है।

मौसमी बदलाव और स्वास्थ्य

महाकुंभ का समय मौसमी बदलाव के साथ मेल खाता है जब बीमारियों की संभावना अधिक होती है। नदियों में स्नान, उपवास और अन्य अनुष्ठान विषहरण को बढ़ावा देते हैं और शरीर को परिवर्तन के साथ तालमेल बिठाने में मदद करते हैं

निष्कर्ष

दोनों घटनाएँ, मकर संक्रांति और महाकुंभ, महत्वपूर्ण खगोलीय गतिविधियों के साथ संरेखित होती हैं जो मौसमी परिवर्तनों, मानव शरीर विज्ञान और पर्यावरण को प्रभावित करती हैं। वे प्राचीन ज्ञान को दर्शाते हैं जो खगोलीय ज्ञान को स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने वाली प्रथाओं के साथ एकीकृत करता है।

महाकुम्भ में दिखेगी ‘स्वच्छ सुजल गांव’ की तस्वीर

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लखनऊ/महाकुम्भ नगर: महाकुम्भ-2025  में देश-विदेश से आने वाले 40-45 करोड़ श्रद्धालु यूपी के ‘स्वच्छ सुजल गांव’ (Clean Sujal Village) की तस्वीर भी देखेंगे। पीएम मोदी के मार्गदर्शन व सीएम योगी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन के जरिए बुंदेलखंड के गांव-गांव में हर घर जल पहुंचाने की नई तस्वीर से भी रूबरू होंगे। 2017 से पहले बदहाल और इसके बाद बदले बुंदेलखंड के बदलाव की गाथा भी दिखेगी। 40 हजार स्क्वायर फिट एरिया में बसे गांव में पीएम आवास, सीएम आवास, ग्राम पंचायत, सोलर एनर्जी के जरिये समृद्ध उत्तर प्रदेश की नई कहानी भी दिखेगी। यह गाथा बदले यूपी की पहचान से हर श्रद्धालुओं को अवगत कराएगी। वहीं डिजिटल कॉर्नर में पहुंचकर उत्तर प्रदेश का हर नागरिक अपने गांव में जल, टैब, जलापूर्ति की वास्तविक स्थिति भी जान सकेंगे।

महाकुम्भ में 10 जनवरी से 26 फरवरी तक बसेगा गांव

योगी सरकार के नेतृत्व में ग्रामीण जलापूर्ति व नमामि गंगे विभाग महाकुम्भ-2025 में ‘स्वच्छ सुजल गांव’ बसा लिया है। इस गांव का दर्शन 10 जनवरी से 26 फरवरी तक होगा। ‘पेयजल का समाधान, मेरे गांव की नई पहचान’ थीम पर यह गांव 40 हजार स्क्वायर फिट एरिया में बसेगा। कभी प्यासे रहे बुंदेलखंड में पीएम मोदी के मार्गदर्शन व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पेयजल की समस्या का समाधान हो गया है। 47 दिन तक इस गांव में अलग-अलग कार्यक्रम भी होंगे।

प्रदर्शनी में बुंदेलखंड के ग्रामीण महिलाओं को मंच मुहैया कराया जाएगा, जिसमें वे बदलाव की कहानी भी बयां करेंगी। बांदा, झांसी, चित्रकूट के कई गांवों में पानी न होने के कारण शादी नहीं हो पाती थी। ललितपुर व महोबा के उन गांवों की महिलाएं, पानी ढोने के कारण जिनके सिर से बाल गायब हो गए थे। शुद्ध पानी से जीवन में आए बदलाव की कहानी को वे बयां करेंगी। यहां हर जानकारी पांच भाषा (हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, तेलगू व मराठी) में मिलेगी।

‘जल मंदिर’ भी देगा संदेश- जल जीवनदायी है, इसका संरक्षण करें

ग्रामीण जलापूर्ति व नमामि गंगे विभाग की तरफ से महाकुम्भ में ‘जल मंदिर’ भी बनाया जाएगा। ‘जल मंदिर’ में भगवान शिव की जटा से गंगा धरती पर आएंगी। इसके जरिए संदेश दिया जाएगा कि जल प्रसाद है, जल जीवनदायी है। इसे बर्बाद न करें, बल्कि संरक्षण करें। ‘जल मंदिर’ में सुबह-शाम जल आरती भी होगी। इस आरती में जल जीवन मिशन की गाथा, जल संरक्षण का संदेश भी होगा।

‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा का भी निर्वहन करेगा नमामि गंगे व ग्रामीण जलापूर्ति विभाग

‘अतिथि देवो भवः’ भारत की परंपरा है। स्वच्छ सुजल गांव में आने वाले अतिथियों का नमामि गंगे व ग्रामीण जलापूर्ति विभाग सम्मान भी करेगा। आगंतुकों को जूट-कपड़े के बैग में ‘जल प्रसाद’ भी दिया जाएगा। इसमें संगम का जल, जल जीवन मिशन की डायरी, सफलता/बदलाव की कहानी से जुड़ी अध्ययन सामग्री आदि भी रहेगी।

डिजिटल गेमिंग जोन में जानेंगे स्वच्छ जल के फायदे व दूषित जल के नुकसान

इस गांव में डिजिटल स्क्रीन, डिजिटिल गेमिंग जोन लॉन्च किया जाएगा। गेम जोन का हिस्सा बनकर लोग जानेंगे कि स्वच्छ पेयजल के फायदे व दूषित पेयजल के नुकसान क्या हैं।

लोग खेल-खेल में डिजिटली जान सकेंगे कि जल संरक्षण क्यों जरूरी हैं। डिजिटल कॉर्नर में आए यूपी के ग्रामीण एक क्लिक में अपने गांव में पानी, टैब, जलापूर्ति आदि से जुड़ी जानकारी की वास्तुस्थिति से भी अवगत हो सकेंगे।

योगी आदित्यनाथ की असली परीक्षा मिल्कीपुर (अयोध्या ) के उप चुनाव में होनी है

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CM Yogi
CM Yogi

अशोक भाटिया , मुंबई

2024 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या लोकसभा सीट भाजपा के हाथ से निकल जाने का जितना मलाल पार्टी को रहा , उससे ज्यादा ये लोगों के बीच चर्चा का मुद्दा बना हुआ रहा । सोशल मीडिया पर लगातार इस बारे में कोई न कोई कमेंट या बहस देखने को मिलती रही है। लोग तरह तरह की बातें करते रहे हैं। राम मंदिर बना दिया गया। सालों से तंबू में रखे गए भगवान राम को भव्य मंदिर में प्रतिष्ठित किया गया। फैजाबाद जिले का नाम अयोध्या कर दिया गया। मंडल भी अयोध्या बना दिया गया। फैजाबाद रेलवे स्टेशन अयोध्या छावनी बना दिया गया। अयोध्या स्टेशन पर यात्रियों के ठहरने के बेहतरीन इंतजाम किए गए। अयोध्या शहर का कायाकल्प भी किया गया। चौक चौराहे सजाए गए। छोटी मोटी दुकानों को तोड़, सलीके से व्यावसायिक कांप्लेक्स तमीर कर दिए गए। मंदिर बनने के बाद रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु भी अयोध्या आने लगे। शहर के आस पास बहुत सारे ओयो रूम और दूसरे होटल भी खुल गए। फिर भी आने वालों को जगह मिलने में दिक्कतें आ रही थी। उनकी संख्या जो इतनी ज्यादा थी कि सबके लिए व्यवस्था हो पाना कठिन था। इस सब से लोगों में खुशी थी। साफ दिख रहा है कि देश भर में अयोध्या जी और भगवान राम के प्रति श्रद्धा है।

लेकिन मूल बात है कि अयोध्या के लोगों को मंदिर की व्यवस्था से परेशानियों से जूझना पड़ रहा था । मंदिर में दर्शन की बात की जाय तो चुनाव तक मंदिर में लगातार वीआईपी दर्शनार्थियों का आना लगा रहा। इस दौरान प्रशासन सुरक्षा के नाम पर ऐसा इंतजाम करता रहा कि लोगों का मंदिर के आस पास जाना दूभर हो जाता था। कहा जा सकता है कि दिक्कतों के कारण बहुसे अयोध्या – फैजाबाद के लोग मंदिर दर्शन करने जा ही नहीं सके। मंदिर के आस पास जो भी स्कूल और अस्पताल वगैरह है वहां जाने आने में रोज लोगों को मुसीबतों से दो चार होना पड़ा । बताया जा रहा है कि बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान एक दिन ऐसा भी आया जब किसी बहुत महत्वपूर्ण राजनेता के आने के कारण बच्चों को परीक्षा देने जाने में भारी मुसीबत हो गई थी। लग रहा था कि उनकी परीक्षा ही छूट जाएगी। इलाके के लोगों ने डीएम से संपर्क किया और तब किसी तरह बच्चे परीक्षा में शामिल हो पाए। याद रखने की जरुरत है कि अलग अलग राज्यों के विधायक झुंड बना कर दर्शन के लिए चुनाव तक पहुंचते रहे थे । उत्तरप्रदेश के विधान सभा अध्यक्ष भी सारे विधायकों को लेकर श्रीराम के दर्शन के लिए पहुंचे थे। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण के दौरान मंदिर के आस पास की दुकानों को तोड़ कर हटाया गया। ये लोकल लोगों में नाराजगी का एक बड़ा सबब बना। क्योंकि जिन्हें विस्थापित किया गया, उन्हें कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स में महंगी कीमतों पर दुकाने खरीदने को मजबूर होना पड़ा। मंदिर चाहिए तो भोजन भी। भोजन यानी रोजगार।पर अब बताया जाता है कि इन सब समस्याओं को दूर कर दिया गया है यानी अब व्यवस्था भी सुधर गई है व रोजगार के अवसर भी ।

अब इस लोकसभा सीट के अन्तरगत आने वाली विधानसभा सीट मिल्कीपुर पर उपचुनाव होने जा रहा है । मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव 5 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के साथ होने जा रहा है । मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही होगा। मिल्कीपुर सीट लगातार सपा ही जीतती रही है। पिछली बार समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने यह सीट जीती थी। लोकसभा चुनाव में सपा ने अवधेश प्रसाद को ही अयोध्या से उतार दिया। अवधेश प्रसाद ने जीत हासिल की और मिल्कीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया। अवधेश प्रसाद के अयोध्या की लोकसभा सीट जीतने और भाजपा के हारने से पूरे देश में यह सीट चर्चा का विषय बन गई। सपा ने भी इसे खूब भुनाया भी। अवधेश प्रसाद को अखिलेश ने लोकसभा में अपने साथ सबसे आगे बैठाया। यही नहीं मिल्कीपुर सीट से अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को प्रत्याशी भी घोषित कर दिया था।

लोकसभा चुनाव के बाद यूपी में मिल्कीपुर समेत कुल 10 सीटें रिक्त हुई थीं। महाराष्ट्र और झारखंड चुनाव के ऐलान के साथ ही यूपी की दस में से नौ सीटों पर उपचुनाव का ऐलान हुआ लेकिन मिल्कीपुर का चुनाव टाल दिया गया। 10 में से 9 सीटों पर नवंबर 2024 में उपचुनाव हुए थे जिसमें भाजपा और इसकी सहयोगी आरएलडी ने 7 सीटें जीती थीं, जबकि सपा के खाते में दो सीटें आई थीं। सपा नेता अवधेश प्रसाद के 2024 में लोकसभा में जाने से मिल्कीपुर विधानसभा सीट खाली हुई। साल 2022 में अवधेश प्रसाद ने मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। भाजपा अयोध्या में हुए नुकसान की भरपाई करने की चुनौती का सामना कर रही है और उसने योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की अगुवाई में शीर्ष नेताओं को प्रचार में उतारने की तैयारी की है।

अयोध्या में भाजपा के प्रवक्ता रजनीश सिंह ने बताया कि मिल्कीपुर का उपचुनाव, हार का बदला लेने का मैदान होगा। सिंह के अनुसार मुख्यमंत्री स्वयं इस चुनाव का प्रबंधन कर रहे हैं, इसलिए हारने का कोई सवाल नहीं है। दूसरी ओर, सपा कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है। अयोध्या में सपा के जिला अध्यक्ष पारसनाथ यादव ने कहा ,‘‘ यह सही है कि हम सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं। भाजपा ने इस उपचुनाव को जीतने के लिए पूरा सरकारी तंत्र लगा दिया है लेकिन मिल्कीपुर के लोग हमारे साथ हैं। हम अंतिम सीमा तक मेहनत से लड़ेंगे और निश्चित तौर पर यह सीट जीतेंगे।’’भाजपा सूत्रों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने मिल्कीपुर में भाजपा के प्रचार की देखरेख के लिए मंत्री सूर्य प्रताप साही की अगुवाई में छह मंत्रियों को लगाया है।इनमें जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, सहकारिता राज्यमंत्री जेपीएस राठौड़, आयुष मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह और सतीश शर्मा शामिल हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक भी प्रचार अभियान में सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगे।

इसमें कोई शक नहीं कि पिछले दस वर्षों में अयोध्या का अभूतपूर्व विकास हुआ है। देश के सभी हिस्सों से जोड़ने वाली ट्रेनें, भव्य रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डा पर अयोध्या के स्थानीय निवासियों को उनकी जमीनों का मुआवजा देने में भी राज्य सरकार ने भेदभाव किया। सरकार ने विकास कार्यों के लिए जमीन अधिगृहीत की किंतु बदले में किसी को अधिक पैसे मिले किसी को कम। फैजाबाद के भाजपा सांसद लल्लू सिंह और भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने जनता की गुहार नहीं सुनी। नतीजा यह हुआ कि लोगों को सपा के विधायक अवधेश प्रसाद पसंद आए, जो लोकसभा जीतने के पहले वे मिल्कीपुर (सुरक्षित) से विधायक थे। सपा ने यहां एक बड़ा प्रयोग किया। सामान्य श्रेणी की इस सीट से दलित समुदाय (पासी) के अवधेश प्रसाद को लड़ाया और वे जीत गए। इस तरह अयोध्या में लल्लू हारे और अवधेश जीते। अवधेश शब्द राजा राम का पर्यायवाची है।

कांग्रेस-सपा के जिस गठबंधन को 2017 में नहीं चल पाया था, वह गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में जमकर वोट बटोरे थे । उत्तर प्रदेश के जानकारों के मुताबिक इस चुनाव में मुस्लिम वोट ने एकजुट होकर इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया। संविधान और आरक्षण बचाने के मुद्दे को हवा देकर इंडिया गठबंधन ने भाजपा के कोर हिंदू वोट बैंक को भी बांट दिया। अब इंडिया गठबंधन में दरार पड़ चुकी है । दिल्ली विधानसभा चुनाव में तो यह दरार और चौड़ी हो गई है । अब चूँकि सपा ने हाल में किसी भी चुनाव में कांग्रेस का सपोर्ट नहीं किया है व दिल्ली चुनाव में वह कांग्रेस का सपोर्ट न कर आम आदमी पार्टी का सपोर्ट कर रहीं है तो उत्तर प्रदेश उपचुनाव में कांग्रेस का साथ भी नहीं मिलेगा ।

सीतापुर में पेड़ से टकराई तेज रफ्तार बोलेरो, भाजपा नेता की मौत

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सीतापुर। जिले की कोतवाली महमूदाबाद क्षेत्र में बुधवार देर रात तेज रफ्तार बोलेरो पेड़ से टकरा गई (Road Accident) । इसमें एक भाजपा नेता की मौत हो गई। वहीं, दो को हालत गंभीर होने पर ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। महमूदाबाद- बिसवां रोड पर फायर स्टेशन के पास पेड़ से तेज रफ्तार बोलेरो टकराई है।

सूचना पर आई पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को गाड़ी से बाहर निकाला। हादसे में रामपुर कला के तुलसी पुरवा निवासी मनीष द्विवेदी (35) की हादसे में मौत हो गई।

यह भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष थे। वहीं, हादसे में लक्षीपुर गांव के शेष कुमार मिश्र (30) व श्यामलाल (50) गंभीर रूप से घायल हैं। जिनका ट्रामा सेंटर लखनऊ में उपचार जारी है।