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Wednesday, May 6, 2026
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विश्व की समस्याओं का समाधान हिन्दू चिंतन में ही संभव, षष्ठीपूर्ति पर होंगे व्यापक कार्यक्रम : मिलिंद परांडे

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यूथ इंडिया संवाददाता
कानपुर/फर्रुखाबाद। विश्व हिन्दू परिषद् कानपुर प्रान्त की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक का गोविन्द नगर स्थित सरस्वती विद्या मन्दिर, मुनि हिन्दू इण्टर कॉलेज में शुभारंभ हुआ। बैठक का उद्घाटन विश्व हिन्दू परिषद् के केन्द्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे , क्षेत्र संगठन मंत्री गजेन्द्र , प्रान्त अध्यक्ष राजीव महाना, विहिप प्रान्त कार्याध्यक्ष डा0 उमेश पालीवाल, प्रान्त उपाध्यक्ष वीरेन्द्र पाण्डेय तथा बालिस्टर सिंह, प्रान्त मंत्री राजू पोरवाल ने श्रीरामजानकी दरबार का पूजन अर्चन कर किया।
मिलिंद परांडे ने बैठक में कानपुर प्रान्त के 21 जिलों के दायित्वधारी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना वर्ष 1964 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर हुई थी। वर्ष 2024 में संगठन की स्थापना के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस षष्ठीपूर्ति वर्ष समापन कार्यक्रम हेतु बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रान्तभर में हजारों स्थानों पर व्यापक जनजागरण कार्यक्रम होंगे। 24 अगस्त से 1 सितंबर के बीच आयोजित होने वाले इन स्थापना दिवस महोत्सव कार्यक्रमों के अन्तर्गत विहिप की 60 वर्षों की उपलब्धियां, वर्तमान में राष्ट्र, धर्म व हिन्दू समाज के समक्ष चुनौतियाँ तथा उनके निराकरण के सम्बन्ध में चर्चाएं, संगोष्ठियाँ व सार्वजनिक कार्यक्रम होंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से हम विहिप के कार्यों व हिन्दू जीवन मूल्यों को जन जन तक पहुंचाएंगे।
गजेन्द्र ने बैठक में हिन्दू मान्यताओं व परम्पराओं की सात्विकता व पवित्रता सुनिश्चित करने के साथ, मन्दिरों को जागरण, धर्म प्रचार, सेवा व समरसता के केन्द्र बनाने का संकल्प दिलाया।
पोरवाल ने संगठनात्मक वृत्त प्रस्तुत करते हुए कहा कि कानपुर प्रान्त के 21 जिलों के 199 प्रखंडों में अभी 2759 समितियां गठित हैं, जिनके अंतर्गत विहिप, बजरंग दल, मातृशक्ति, दुर्गावाहिनी, धर्मप्रसार आदि के व्यापक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।
बैठक में क्षेत्र विशेष संपर्क प्रमुख अनिल दीक्षित , क्षेत्र दुर्गावाहिनी संयोजिका कल्पना दीदी, वासुदेव पटेल केन्द्रीय गौरक्षा प्रमुख, प्रान्त सह मंत्री अभिनव दीक्षित एवम अवधेश भदौरिया , मातृशक्ति प्रांत संयोजिका सीमा दीदी, सह संयोजिका दुर्गेश दीदी तथा संगीता दीदी, दुर्गावाहिनी प्रांत संयोजिका अवनी दीदी, प्रान्त कार्यालय प्रमुख विनोद तोमर , कोषाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा , सह कोषाध्यक्ष गौरांग , बजरंग दल प्रांत संयोजक आचार्य अजीतराज , सह संयोजक अमरनाथ , शुभम कौशिक तथा अवधेश शर्मा समेत सम्पूर्ण प्रान्त टोली तथा जिलों से आए हुए कार्यकर्ता भगिनी बन्धु उपस्थित रहे। समापन सत्र में प्रांत के कई जिलों के कार्यकर्ताओं को नवीन जिम्मेदारियां दी गईं।
इसी क्रम में जनपद फर्रुखाबाद में जिला मंत्री दायित्व पर रहे श्सुशील चौहान को प्रांत का सह प्रचार प्रसार प्रमुख, अनिल प्रताप सिंह को जिला कार्याध्यक्ष, शिवाकांत कटियार को जिला उपाध्यक्ष एवं श्रीमान अखिलेश मिश्रा को जिला मंत्री की नवीन जिम्मेदारियां दी गईं।

सावन के तीसरे सोमवार पर अपरा काशी में विशेष पूजा अर्चना

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। सावन मास के तीसरे सोमवार को अपरा काशी (फर्रुखाबाद) में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कांवडिय़ों और भक्तों ने भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की और जलाभिषेक किया। पूरे शहर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला।सावन का महीना हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है, और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दौरान भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं और शिवालयों में जाकर जलाभिषेक करते हैं। सावन के सोमवार को शिवभक्त विशेष रूप से पूजा-अर्चना करते हैं और मंदिरों में भीड़ उमड़ती है।फर्रुखाबाद स्थित अपरा काशी शिवालय अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कारण प्रसिद्ध है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव की आराधना करते हैं। इस पवित्र स्थल पर सावन मास में खास आयोजन किए जाते हैं, जिसमें कांवड़ यात्रा, जलाभिषेक और भंडारे का आयोजन शामिल है।इस सोमवार को अपरा काशी में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनियों और फूलों से सजाया गया था। पंडितों द्वारा मंत्रोच्चारण और हवन के साथ विशेष पूजा संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने पवित्र जल और बेलपत्र से भगवान शिव का अभिषेक किया। सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ उमडऩी शुरू हो गई थी। कांवड़ लेकर आने वाले श्रद्धालु हर-हर महादेव के जयकारों के साथ जलाभिषेक करते दिखे। भक्तों ने लंबी कतारों में खड़े होकर भगवान शिव के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की थी, जिसमें पेयजल, सुरक्षा और साफ-सफाई का खास ख्याल रखा गया।सावन मास के तीसरे सोमवार को अपरा काशी में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। स्थानीय कलाकारों ने भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया और भक्ति संगीत प्रस्तुत किया। इन कार्यक्रमों ने भक्तों की आस्था को और भी प्रगाढ़ किया।दिन भर चलने वाली पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। सावन मास के इस पावन अवसर पर अपरा काशी में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना ने श्रद्धालुओं को एक अलौकिक अनुभव प्रदान किया। भक्तों ने पूरे मनोयोग से भगवान शिव की आराधना की और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

विधायक डॉक्टर सुरभि को मुख्यमंत्री से मिला आश्वासन, फर्रुखाबाद में ही रहेंगे गांव

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यूथ इंडिया संवाददाता
शमशाबाद, फर्रुखाबाद। कायमगंज तहसील के पांच गांव जो शाहजहांपुर के जिला पंचायत अध्यक्ष की पहल पर शाहजहांपुर जिले में मिलाए जाने का प्रस्तावित था, अब फर्रुखाबाद जनपद में ही रहेंगे। क्षेत्रीय विधायक डॉक्टर सुरभि ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उनका समर्थन प्राप्त किया।
विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इन गांवों को किसी अन्य जनपद में नहीं लाया जाएगा। प्रस्तावित पांच गांवों में ग्राम पंचायत गूटी नईदुन, भगवानपुर, नसोला, बांसखेड़ा, एवं शेरपुर शामिल हैं। शाहजहांपुर जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रस्ताव था कि ये गांव शाहजहांपुर जिले में शामिल किए जाएं, लेकिन फर्रुखाबाद के विधायक डॉक्टर सुरभि और स्थानीय निवासियों के विरोध के चलते यह प्रस्ताव रद्द कर दिया गया।
ग्राम पंचायत के निवासी इस निर्णय से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि वे अपने गांव को फर्रुखाबाद जनपद में ही रखना चाहते हैं क्योंकि यह उनकी पहचान और संस्कृति का हिस्सा है।
विधायक डॉक्टर सुरभि ने कहा, मुख्यमंत्री ने हमें इस बात का भरोसा दिलाया है कि इन गांवों को फर्रुखाबाद जनपद में ही रखा जाएगा। हम हमेशा से ही स्थानीय जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और आगे भी रहेंगे। विधायक ने कहा कि अब हमारा ध्यान इन गांवों के विकास पर होगा। हमें उम्मीद है कि जिला प्रशासन और सरकार के सहयोग से यहां की समस्याओं का समाधान जल्द होगा।

नजूल संपत्ति विधेयक पर विवाद: करीब ढाई करोड़ लोग बेघर होने की आशंका, सपा का पुरजोर विरोध

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यूथ इंडिया संवाददाता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नजूल जमीन के मुद्दे पर योगी सरकार को बड़ा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश नजूल संपत्ति विधेयक विधानसभा में पास होने के बाद विधान परिषद में अटक गया। इस विधेयक का विरोध सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने भी किया, जिसके कारण सरकार को मुश्किल का सामना करना पड़ा।
सपा का पुरजोर विरोध:समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया। सपा ने स्पष्ट किया कि अगर यह विधेयक लागू हुआ तो करीब ढाई करोड़ लोग बेघर हो जाएंगे।
विधानसभा में बहुमत, फिर भी विधान परिषद में अटका:यह पहली बार हुआ जब दोनों सदनों में पूर्ण बहुमत के बावजूद विधेयक पास होने के बाद विधान परिषद में अटक गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने भी इस विधेयक का विरोध किया, जो आगामी उप-चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव में वोट बैंक के नुकसान की आशंका के कारण था।
नजूल जमीन का मुद्दा:*नजूल जमीन की समस्या पर सत्ता और विपक्ष का एक स्वर में विरोध करना एक महत्वपूर्ण विषय है। सरकार ने आखिरकार इस बिल को प्रवर समिति को भेजने का निर्णय लिया।
नजूल जमीन का विवरण: एक अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 27 हजार हेक्टेयर से अधिक नजूल भूमि है। प्रमुख शहरों में प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और आगरा शामिल हैं, जहां नजूल भूमि पर बड़े पैमाने पर लोग निवास करते हैं।
बिल का विरोध क्यों: विधेयक के विरोध का बड़ा कारण यह है कि अगर इसे लागू किया गया तो करीब ढाई करोड़ से ज्यादा लोगों से उनके मकान, दुकान और प्रतिष्ठान छिन जाएंगे। इसके चलते विरोध की लहर उठी है। इस विधेयक का उद्देश्य और इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए, यह देखना होगा कि सरकार आगे किस प्रकार की रणनीति अपनाती है। सपा और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा है।
आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए, यह विवाद भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। सपा और अन्य विपक्षी दलों ने इस मामले को जोर-शोर से उठाया है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। नजूल जमीन का मुद्दा सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जीविका और भविष्य का सवाल है। इस पर सरकार और विपक्ष दोनों को सोच-समझकर निर्णय लेना होगा। आगामी चुनावों में इस मुद्दे का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

महामहिम संतोष गंगवार का बरेली में भव्य स्वागत, सादगी से बने राजनेता से महामहिम तक की कहानी

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यूथ इंडिया संवाददाता
बरेली। सादगी और सरलता के प्रतीक, आठ बार के सांसद और केंद्र सरकार में चार बार मंत्री रहे संतोष गंगवार का जीवन वीवीआईपी कल्चर से हमेशा दूर रहा है। बरेली के लोग उन्हें सडक़ों पर सामान्य नागरिक की तरह बाइक पर घूमते देख चुके हैं। परंतु, अब उनके झारखंड के गर्वनर बनने के बाद बरेली ने उन्हें एक नए अंदाज में देखा। शनिवार रात से रविवार शाम तक बरेली की सडक़ों पर महामहिम का जलवा नजर आया। उनके साथ बीस से ज्यादा गाडिय़ों का काफिला था और प्रोटोकॉल के चलते हर चौराहे पर अफसर और रंगरूट हाथ बांधे खड़े थे।
कलेक्ट्रेट से लेकर विकास भवन तक अफसरों का हुजूम
गवर्नर बनने के बाद संतोष गंगवार पहली बार बरेली आए। उनके स्वागत में भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य, मेयर उमेश गौतम, विधायक संजीव अग्रवाल, जिलाध्यक्ष पवन शर्मा, आदेश प्रताप सिंह, अधीर सक्सेना, भाजयुमो अध्यक्ष अमन सक्सेना समेत कई नेता मौजूद थे। उनके घर पहुंचते ही आतिशबाजी का आयोजन किया गया और भारत सेवा ट्रस्ट पर जश्न का माहौल बन गया।
प्रोटोकॉल का पालन
पहले प्रोटोकॉल की परवाह किए बगैर डीएम और एसएसपी के आवास पर जाने वाले संतोष गंगवार अब गवर्नर बनने के बाद प्रोटोकॉल के साथ चले। सर्किट हाउस से लेकर कलेक्ट्रेट तक अफसरों का हुजूम उनके स्वागत के लिए तैयार था।
बेटी के साथ राजनीतिक लांचिंग की शुरुआत
गवर्नर संतोष गंगवार ने अफसरों के साथ बैठक के बाद विकास भवन सभागार में झारखंड के गठन से लेकर अब तक के इतिहास और संस्कृति पर चर्चा की। इस दौरान उनकी बेटी श्रुति गंगवार हर कदम पर उनके साथ रहीं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अब वह अपनी बेटी की राजनीतिक लांचिंग की तैयारी कर रहे हैं। इस जश्न के माहौल में बरेली के पांच से ज्यादा कद्दावर भाजपा नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। सोशल मीडिया पर भी उनके द्वारा कोई बधाई संदेश नहीं दिया गया। इस भव्य स्वागत समारोह से यह स्पष्ट हो गया कि संतोष गंगवार बरेली की राजनीति में अब भी महत्वपूर्ण धुरी बने हुए हैं। उनके इस नए रूप और कलेवर को देखकर बरेली के लोगों ने उन्हें बधाई दी और उनके नेतृत्व में भविष्य की संभावनाओं को लेकर उत्साहित दिखे।

उत्तर प्रदेश में राशन कार्ड के नए नियम लागू

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यूथ इंडिया संवाददाता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में राशन कार्ड के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं, जिससे लाभार्थियों को राशन वितरण में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित की जा सके। नए नियमावली में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनसे लाभार्थियों की पहचान और पात्रता को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
1. आधार लिंकिंग अनिवार्य- राशन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और लाभार्थियों की सही पहचान हो सकेगी।
2. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया- नए नियमों के तहत, राशन कार्ड के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया गया है। इससे आवेदकों को कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और समय की बचत होगी।
3. वार्षिक आय सीमा- राज्य सरकार ने पात्रता के लिए वार्षिक आय सीमा निर्धारित की है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह सीमा 1.5 लाख रुपये और शहरी क्षेत्रों के लिए 2 लाख रुपये है। इसके तहत उन्हीं परिवारों को राशन कार्ड मिलेगा जिनकी आय इन सीमाओं के भीतर हो।
4. नवीनतम दस्तावेज़ों की आवश्यकता- नए आवेदन के साथ आवेदकों को आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और परिवार के सदस्यों की सूची प्रस्तुत करनी होगी।
5. सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार- नए नियमों के तहत पीडीएस प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कई उपाय किए गए हैं। इसमें इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल मशीनों का उपयोग, जीपीएस आधारित निगरानी, और शिकायत निवारण तंत्र शामिल हैं।
लाभार्थियों की संख्या- राज्य में कुल 3 करोड़ से अधिक परिवार राशन कार्ड के माध्यम से लाभान्वित होते हैं।
राशन की वितरण दर- प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो अनाज (चावल/गेहूं) प्रदान किया जाता है।जिला स्तर पर निगरानी- जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया गया है जो राशन वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता पर नजर रखेंगी।
उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री, ने कहा, नए नियमों का उद्देश्य राशन वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाना है, ताकि गरीब और वंचित परिवारों को समय पर और उचित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध हो सके।
लाभार्थी किसी भी समस्या या शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-180-0150 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, शिकायतें ऑनलाइन पोर्टल पर भी दर्ज कराई जा सकती हैं। इन नए नियमों और सुधारों के साथ, उत्तर प्रदेश सरकार का उद्देश्य राज्य में राशन वितरण प्रणाली को सशक्त और प्रभावी बनाना है, जिससे सभी पात्र लाभार्थियों को समय पर और बिना किसी कठिनाई के राशन मिल सके।