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Friday, April 10, 2026
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रोजी पब्लिक स्कूल जनपद फर्रुखाबाद में विशेष कार्यक्रम का आयोजन

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। रोजी पब्लिक स्कूल में छात्र-छात्राओं के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कर्नल अरुण मोई, डायरेक्टर, रोजी ग्रुप ऑफ स्कूल्स ने छात्रों को अनुशासन और शिक्षा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जीवन में अनुशासन का विशेष महत्व है और इसे अपनाकर ही छात्र अपने लक्ष्यों तक पहुंच सकते हैं।
मुख्य अतिथि दीपक त्रिपाठी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के दौरान यदि छात्र अपने कैरियर पर ध्यान देंगे, तभी उन्हें सफलता प्राप्त होगी। उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि सभी छात्र-छात्राओं को शिक्षा के दौरान ही अपने कैरियर के प्रति ध्यान देना होगा, तभी वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे।
कार्यक्रम में विद्यालय के हेडबॉय नताशा सिंह, कैप्टन अस्मत दुबे, स्पोर्ट्स कैप्टन अंशुल दयाल और कर्नल अरुण शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी बच्चों को शपथ दिलाई गई और कार्यक्रम का संचालन दीपक त्रिपाठी ने किया।
कार्यक्रम के दौरान हेड गर्ल भावना कुमारी व अन्य छात्रों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान दिया। कक्षा की मॉनिटर एवं छात्रों की विशेष योग्यता की प्रशंसा करते हुए उन्हें इस तरह के अंकेषण से छात्रों में नैतिक और नेतृत्व की भावना का विकास होता है।

इस अवसर पर श्री राजीव मोहन पांडे, डायरेक्टर, रोजी ग्रुप ऑफ स्कूल्स और श्री अंकित तिवारी, एडमिनिस्ट्रेटिव डायरेक्टर, रोजी ग्रुप ऑफ स्कूल्स भी मौजूद रहे। प्रधानाचार्य श्री भव्यदीप ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य में छात्रों को प्रेरणादायक बातें कहीं।

अखंड सौभाग्य के लिए रखें हरियाली तीज व्रत, जानें पूजन विधि

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Hariyali Teej
Hariyali Teej

महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाले त्योहारों में से हरियाली तीज (Hariyali Teej) प्रमुख है। महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के साथ इन व्रत को रखती है, जबकि कुंवारी युवतियां जल्द विवाह के लिए यह व्रत रखती है। मान्‍यता है कि इस व्रत से विवाह के जल्‍द योग बनते हैं। सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज मनाई जाती है। यहां आपको बताते हैं, इस बार हरियाली तीज (Hariyali Teej) कब और इसकी क्या पूजा विधि है।

कब है हरियाली तीज (Hariyali Teej) 

हिंदू कालगणना के अनुसार, सावन माह के शुक्‍ल की तिथि की शुरुआत 6 अगस्त यानी शुक्रवार को होगी। यह तिथि रात 07 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 7 अगस्त (शनिवार) को रात 10 बजकर 05 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में उदया तिथि का महत्व बताया गया है, ऐसे में हरियाली तीज (Hariyali Teej) 7 अगस्त को मनाई जाएगी।

क्या है पूजा विधि

– सुबह जल्दी उठें और व्रत का संकल्प लें।
– स्नानादि से निवृत होकर हरे कपड़े पहनें।
– मंदिर की सफाई कर पीला कपड़ा बिछाएं।
– भगवान शिव और मां पार्वती की स्थापना करें।
– अब विधि अनुसार भगवान का पूजन करें।
– अंत में आरती कर पूजा का समापन करें।
– इस दौरान हरियाली तीज (Hariyali Teej) की कथा पढ़ने और सुनने का भी विशेष महत्‍व बताया गया है।

इन बातों पर दें ध्‍यान

– व्रत के दौरान दिन के समय न सोएं।
– तामसिक चीजों का सेवन न करें।
– व्रत से एक दिन पूर्व मेहंदी लगाएं।
– इस दिन किसी का अपमान न करें।

क्यों मनाई जाती है हरियाली तीज (Hariyali Teej) 

हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूम में पाने के लिए कठोर तप किया था। भगवान शिव ने माता पावर्ती की तपस्‍या को सावन माह के शुक्‍ल पक्ष की तृतीया तिथि को स्वीकार किया था। इसके बाद से ही महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना और कुंवारी युवतियां जल्‍द विवाद के लिए यह व्रत रखती हैं।

पुलिस की मिलीभगत से चल रहे अवैध टैम्पो स्टैंड में खच्चर चालक की पिटाई

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फर्रुखाबाद। कोतवाली फतेहगढ़ क्षेत्र के बेवर रोड स्थित ओवर ब्रिज के नीचे अवैध टैम्पो स्टैंड चालकों की गुंडई एक बार फिर सामने आई है। हाल ही में एक खच्चर चालक को टैम्पो चालकों ने जमकर पीटा। खच्चर चालक, जो भट्टे पर ईंटें ढोने का काम करता है, अपने खच्चर के साथ गुजर रहा था जब टैम्पो चालकों ने उसे रोक लिया। खच्चर द्वारा टैम्पो को छूने के मामूली विवाद पर टैम्पो चालकों ने खच्चर चालक की बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे वह लहूलुहान हो गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसमें टैम्पो चालकों को खच्चर चालक के साथ मारपीट करते हुए साफ देखा जा सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत से यह अवैध टैम्पो स्टैंड संचालित हो रहा है। पुलिस के पैसों के लेनदेन के चलते इस अवैध गतिविधि पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे शासन के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।

कॉलेज से घर वापस लौट रही छात्र को पिकअप ने मारी टक्कर

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यूथ इंडिया संवाददाता
अमृतपुर, फर्रुखाबाद। थाना राजेपुर क्षेत्र के गांव बहादुरपुर निवासी प्रिया पुत्री अमरनाथ उम्र 16 बर्ष जो कि कस्बा राजेपुर स्थित गंगा पार महात्मा गांधी इंटर कॉलेज से पढ़ाई कर घर वापस लौट रही थी तभी निविया चौराहे के निकट तेज रफ्तार पिकअप ने जोरदार टक्कर मार दी जिससे छात्र गंभीर रूप से घायल हो गई। मौके पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई। आनन फानन में ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल छात्रा को 108 एंबुलेंस के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजेपुर में भर्ती कराया प्राथमिक उपचार कर गंभीर हालत में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया स्थानीय लोगों के द्वारा पिकअप को पडक़र पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया।
थाना अध्यक्ष ने बताया तहरीर मिलने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी

डॉ. अरशद मंसूरी ने कांवड़ियों का इस्तकबाल कर हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम की

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यूथ इंडिया संवाददाता
कायमगंज, फर्रुखाबाद। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी एवं समाजसेवी डॉ. अरशद मंसूरी ने कायमगंज के नई बस्ती रोड पर गोला गोकर्णनाथ जाने वाले शिव भक्तों का हर-हर महादेव का पटका पहनाकर स्वागत किया और उन्हें शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर डॉ. मंसूरी ने हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करते हुए कहा कि सबका मालिक एक है और सभी धर्मों का सार एक ही है।
डॉ. मंसूरी का मानना है कि हम सबको एक ही ईश्वर ने बनाया है और इसलिए हमें प्रेम और भाईचारे के साथ मिलजुल कर रहना चाहिए। इस मौके पर ऋषभ शाक्य, सर्वेश शाक्य, विकास शाक्य, राम पाण्डेय, विशाल शाक्य, शिवम शाक्य, संतोष शर्मा, अमन शाक्य, बलराम शुक्ला, नरेश चन्द्र शर्मा, शानू शाक्य आदि शिव भक्तों को डॉ. अरशद मंसूरी द्वारा सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के बीच आपसी सौहार्द और भाईचारे का अद्वितीय उदाहरण देखने को मिला, जिससे सामाजिक समरसता को और अधिक मजबूती मिली।

इस मंदिर में आज भी जल रहा है विवाह का अग्निकुंड, शिव पार्वती ने लिए थे 7 फेरे

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Triyuginarayan temple
Triyuginarayan temple

दुनिया भर में भगवान शिव के अनगिनत मंदिर है और हर मंदिर की अपनी एक कहानी और रहस्य है। भगवान शिव का एक ऐसा ही मंदिर ( Triyuginarayan temple) है उनके विवाह की कहानी जुड़ी हुई है। कहा जाता है की भगवान शिव ने इसी स्थान पर माता पार्वती के साथ सात फेरे लिए थे।

इस मंदिर ( Triyuginarayan temple) में पूरे साल देश-विदेश से लोग शादी करने के लिए भी आते हैं ताकि उनके वैवाहिक जीवन को भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद मिल सके।

कहां है यह मंदिर?

भगवान शिव के इस मंदिर को त्रियुगीनारायण ( Triyuginarayan temple) के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ ब्लॉक में स्थित है। समुद्रतल से 6495 फीट की ऊंचाई पर केदारघाटी में स्थित जिले की सीमांत ग्राम पंचायत का त्रियुगीनारायण नाम इसी मंदिर के कारण पड़ा। माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना त्रेता युग में हुई थी।

शिव-पार्वती का हुआ था विवाह

माता पार्वती राजा हिमावत पुत्री थी। भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तप किया था। जिसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। उनके विवाह के दौरान जलाई गई अग्नि आज भी जल रहीं पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान और शिव और माता पार्वती की विवाह हुआ तब भगवान विष्णु माता पार्वती का भाई बनकर उनके विवाह में शामिल हुए थे और सभी रीतियों का पालन किया था।

ब्रह्मा जी बने थे पुजारी

भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह कराने के लिए ब्रह्मा जी पुरोहित बने थे। इसलिए विवाह स्थान को ब्रह्म शिला भी कहा जाता है, जो मंदिर के ठीक सामने स्थित है। उस समय बहुत से संत-मुनियों ने इस समारोह में भाग लिया था। इस महान और दिव्य स्थान का जिक्र हिंदू पुराणों में किया गया है।

यहां स्थित है तीन जलकुंड

विवाह से पहले सभी देवी देवताओं के स्नान करने के लिए यहां तीन जल कुंड का निर्माण किया गया था। जिन्हें रूद्र कुंड, विष्णु कुंड और ब्रह्मा कुंड कहते हैं। तीनों कुंड में जल सरस्वती कुंड से आता है। धार्मिक कथा का अनुसार, सरस्वती कुंड की उत्पत्ति भगवान विष्णु की नासिका से हुई थी। इसलिए यह मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से संतान सुख मिलता है।

विष्णु जी ने लिया था वामन अवतार

पुराणों के अनुसार, त्रियुगीनारायण मंदिर त्रेता युग से यहां पर स्थापित है। जबकि केदारनाथ वा बद्रीनाथ द्वापरयुग में स्थापित हुए। पौराणिक कथा के अनुसार, इस स्थान पर ही भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था। कथा के अनुसार, इंद्रासन पाने के लिए राजा बलि को सौ यज्ञ करने थे, इनमें से वहा 99 यज्ञ पूरे कर चुके थे तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर यज्ञ रोक दिया और बलि का यज्ञ भंग हो गया। इसलिए यहां भगवान विष्णु को वामन देवता के रूप में पूजा जाता है।