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Monday, July 13, 2026
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शराब ठेके के बाहर विवाद ने लिया हिंसक रूप

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– गाली-गलौज का विरोध करने पर किसानों और शराबी युवकों में मारपीट

फर्रुखाबाद। कमालगंज थाना क्षेत्र के कतरौली पट्टी गांव में शराब के ठेके के बाहर हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। नशे में धुत कुछ युवकों द्वारा कथित तौर पर गाली-गलौज किए जाने का विरोध करने पर किसानों और युवकों के बीच जमकर मारपीट हुई। घटना से इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शराब के ठेके के बाहर कुछ युवक नशे की हालत में खड़े होकर आपस में तेज आवाज में अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रहे किसानों ने गाली-गलौज और अशोभनीय व्यवहार का विरोध किया। विरोध होते ही दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो कुछ ही देर में मारपीट में बदल गई।

बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चले और मौके पर काफी देर तक हंगामा होता रहा। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई, जिस पर पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।

पुलिस ने दोनों पक्षों से घटना की जानकारी ली है और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। यदि किसी पक्ष की ओर से तहरीर दी जाती है तो उसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस निगरानी भी बढ़ा दी गई है।

यूथ इंडिया की पड़ताल में सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों में शराब ठेकों के बाहर नशे में उत्पात और अभद्र व्यवहार की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम के समय कई स्थानों पर शराब पीकर हंगामा करने वालों के कारण आम लोगों, महिलाओं और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसे स्थानों पर नियमित पुलिस गश्त और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

बंदरों के हमले से शोरूम संचालक की मौत, छत से गिरने पर गई जान

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फर्रुखाबाद।कादरीगेट थाना क्षेत्र स्थित देवरामपुर क्रॉसिंग के पास एक दर्दनाक हादसे में 52 वर्षीय शोरूम संचालक जगदीश यादव की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह घर की छत पर पानी की टंकी का लीकेज देखने गए थे, तभी बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। बंदरों से बचने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे गिर पड़े।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जगदीश यादव जैसे ही छत पर पहुंचे, वहां पहले से मौजूद बंदरों के झुंड ने अचानक उन्हें घेर लिया। बंदर उनके करीब आने लगे, जिससे वह घबरा गए। खुद को बचाने के प्रयास में वह तेजी से पीछे हटे, लेकिन इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह कई फीट नीचे आ गिरे।
परिजनों और स्थानीय लोगों ने गंभीर रूप से घायल जगदीश यादव को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही कादरीगेट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
इस घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि देवरामपुर क्रॉसिंग और आसपास के इलाकों में बंदरों का आतंक लंबे समय से बना हुआ है। कई बार लोगों पर हमले और काटने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
निवासियों ने नगर निगम और वन विभाग से बंदरों के बढ़ते आतंक पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते बंदरों को पकड़ने और उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से हटाने की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में भी ऐसे दर्दनाक हादसे हो सकते हैं।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

25 हजार के इनामी बदमाश से पुलिस की मुठभेड़, गोवध का आरोपी घायल होकर गिरफ्तार

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25 हजार के इनामी बदमाश से पुलिस की मुठभेड़, गोवध का आरोपी घायल होकर गिरफ्तार

फर्रुखाबाद।कायमगंज कोतवाली क्षेत्र में सोमवार तड़के पुलिस और 25 हजार रुपये के इनामी बदमाश के बीच मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ के दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा, जहां चिकित्सकीय निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान चंदा उर्फ चांद मियां के रूप में हुई है। वह गोवध अधिनियम से जुड़े मामले में वांछित था और लंबे समय से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। आरोपी की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही थीं।

पुलिस का कहना है कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि इनामी बदमाश कायमगंज क्षेत्र में मौजूद है। सूचना के आधार पर पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की। खुद को घिरा देख आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर भागने का प्रयास किया। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी घायल हो गया और उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

मौके से पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक अवैध तमंचा, कारतूस, एक बांका और एक छुरी बरामद की है। बरामद हथियारों को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। पुलिस ने घटनास्थल से अन्य साक्ष्य भी एकत्र किए हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ गोवध अधिनियम सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। उसके आपराधिक इतिहास की विस्तृत जांच की जा रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि वह किन-किन मामलों में फरार चल रहा था तथा उसके अन्य साथियों की क्या भूमिका रही है।
घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और मुठभेड़ से संबंधित सभी पहलुओं की जांच के निर्देश दिए। पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की वैधानिक प्रक्रिया के तहत जांच कराई जा रही है। घायल आरोपी के स्वस्थ होने के बाद उससे पूछताछ कर उसके नेटवर्क और अन्य फरार आरोपियों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जाएगी।

दर्दनाक सड़क हादसा: मां को स्टेशन छोड़ने जा रहे बेटे का कटा हाथ

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– अज्ञात ट्रक चालक पर मुकदमा दर्ज

फर्रुखाबाद, कमालगंज।थाना क्षेत्र के खुदागंज में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां पलभर में छीन लीं। अपनी मां को फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन छोड़ने जा रहे युवक की बाइक को तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक का इलाज के दौरान हाथ काटना पड़ा, जबकि उसकी मां भी गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रशांत अपनी मां भाग्यश्री को बाइक से फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन छोड़ने जा रहे थे। भाग्यश्री को कासगंज जाने वाली ट्रेन पकड़नी थी। दोनों जैसे ही कमालगंज थाना क्षेत्र के खुदागंज प्राथमिक विद्यालय के सामने पहुंचे, तभी पीछे से आए एक तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर इतनी भीषण थी कि मां-बेटे कई फीट दूर सड़क पर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल दोनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया।
इलाज के दौरान प्रशांत की हालत लगातार बिगड़ती गई। डॉक्टरों ने काफी प्रयास किए, लेकिन उनका हाथ बचाया नहीं जा सका। अंततः संक्रमण और गंभीर चोटों के कारण उनका एक हाथ काटना पड़ा। वहीं उनकी मां भाग्यश्री का भी अस्पताल में इलाज जारी है।
हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन समेत मौके से फरार हो गया। परिजनों ने अपने स्तर पर उसकी तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद कौशल कुमार ने कमालगंज थाने में अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि फरार ट्रक चालक की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया जा सके।

नाबालिग की शादी रुकवाई: प्रेमी की सूचना पर पहुंची पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन

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– 18 वर्ष से छह दिन कम उम्र की निकली किशोरी

फर्रुखाबाद/नवाबगंज। जनपद के नवाबगंज थाना क्षेत्र के सिरौली स्थित एक गेस्ट हाउस में रविवार शाम नाबालिग किशोरी की शादी कराए जाने की सूचना पर पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) की संयुक्त टीम ने समय रहते पहुंचकर विवाह रुकवा दिया। पुलिस की कार्रवाई से विवाह समारोह में अफरा-तफरी मच गई और कई बाराती मौके से ही चले गए।
जानकारी के अनुसार, मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति अपनी पुत्री का विवाह फर्रुखाबाद शहर के एक युवक से करा रहा था। रविवार शाम करीब सात बजे बारात सिरौली स्थित गेस्ट हाउस पहुंची। इसी बीच चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस को सूचना मिली कि दुल्हन नाबालिग है और उसका विवाह कराया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस विवाह की सूचना किशोरी के प्रेमी ने चाइल्ड हेल्पलाइन को दी थी। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन प्रभारी रीना त्रिपाठी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और नवाबगंज थाना पुलिस को भी बुलाया। रात करीब 8:15 बजे पुलिस के पहुंचते ही विवाह समारोह में हड़कंप मच गया।
मौके पर पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने किशोरी से उसके परिजनों से अलग बातचीत की। किशोरी ने स्पष्ट रूप से बताया कि वह अभी विवाह नहीं करना चाहती और उसके परिजन उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी करा रहे हैं। दस्तावेजों की जांच में उसकी उम्र 18 वर्ष से छह दिन कम पाई गई।
इसके बाद पुलिस ने तत्काल विवाह रुकवा दिया और किशोरी व उसके माता-पिता को पूछताछ के लिए नवाबगंज थाने ले गई। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन प्रभारी रीना त्रिपाठी किशोरी को अपने संरक्षण में लेकर आगे की वैधानिक एवं संरक्षण संबंधी कार्रवाई के लिए साथ ले गईं।
प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार ने बताया कि किशोरी की आयु वैधानिक विवाह योग्य आयु से छह दिन कम थी। साथ ही उसने स्वयं भी विवाह से इनकार किया था। इन तथ्यों के आधार पर बाल विवाह को रोकते हुए किशोरी को चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपुर्द कर दिया गया। मामले की जांच जारी है।

राम मंदिर रामधन घोटाला: आस्था के केंद्र में पारदर्शिता हुईं धुंधली

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– एसआईटी जांच से खुल रहीं नई परतें

अयोध्या। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर बने भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान (रामधन) में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में अब तक कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, नियुक्ति प्रक्रिया और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की पड़ताल में जुटी हैं।
जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा उस समय हुआ जब एसआईटी को पता चला कि चढ़ावे की गणना जैसे अत्यंत संवेदनशील कार्य का प्रभारी बनाए गए सुभाष श्रीवास्तव का अतीत विवादों से जुड़ा रहा है। जांच में सामने आया कि वह पहले सिंडिकेट बैंक में कार्यरत था और गबन के आरोपों के कारण उसे सेवा से बर्खास्त किया गया था। बाद में न्यायालय के आदेश से उसकी बहाली हुई, लेकिन उसके पूर्व रिकॉर्ड का समुचित सत्यापन किए बिना उसे राम मंदिर में नियुक्त कर दिया गया। इतना ही नहीं, उसे चढ़ावे की गणना जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंप दी गई।
एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि नियुक्ति प्रक्रिया में किन अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका रही तथा क्या नियुक्ति के समय निर्धारित नियमों का पालन किया गया था। इसी क्रम में धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे से भी पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसी नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज, अनुमोदन प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों का गहन परीक्षण कर रही है।
मामले में गिरफ्तार किए गए आठों आरोपियों को 26 जून से जिला जेल में न्यायिक हिरासत में रखा गया है। विशेष न्यायाधीश (एंटी करप्शन) की अदालत में उनकी नियमित पेशी हो रही है और सुरक्षा कारणों से कई बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी सुनवाई कराई गई। जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ के आधार पर धन के लेनदेन, रिकॉर्ड और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी मंदिर में दान की प्राप्ति, गणना, रिकॉर्ड संधारण, बैंक में जमा करने की प्रक्रिया और वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था का भी ऑडिट कर रही है। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कथित अनियमितता व्यक्तिगत स्तर तक सीमित थी या फिर इसमें किसी संगठित नेटवर्क अथवा प्रशासनिक लापरवाही की भूमिका भी रही।
राम मंदिर में प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान अर्पित करते हैं। ऐसे में यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह पारदर्शी, डिजिटल और बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली के तहत होना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम रहे।
राम मंदिर देश की आस्था का केंद्र है। इसलिए इस प्रकरण को किसी धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के नजरिए से देखा जाना चाहिए। यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, जिन पर आरोप हैं, उनके दोष या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगा।