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Monday, July 13, 2026
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लाइफलाइन उपभोक्ताओं का बिजली भार बढ़ाने पर सवाल, 24 लाख उपभोक्ताओं के मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े एक बड़े मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। राज्य उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया है कि जिन लाइफलाइन उपभोक्ताओं की वार्षिक बिजली खपत कम है, उनका भी विद्युत भार (लोड) बढ़ाए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई है। परिषद ने इसे गंभीर मामला बताते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
परिषद का कहना है कि लाइफलाइन श्रेणी उन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित है जिनकी बिजली खपत सीमित होती है और जिन्हें रियायती दरों का लाभ मिलता है। ऐसे में यदि किसी उपभोक्ता की वार्षिक खपत निर्धारित सीमा से कम है, तो बिना स्पष्ट तकनीकी आवश्यकता या उपभोक्ता की सहमति के उसका विद्युत भार बढ़ाया जाना कई सवाल खड़े करता है।
राज्य उपभोक्ता परिषद के अनुसार, प्रदेश में करीब 24 लाख उपभोक्ताओं का विद्युत भार बढ़ाए जाने का मामला सामने आया है। परिषद का दावा है कि इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और औचित्य की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय बोझ तो नहीं डाला गया।
परिषद ने सरकार और ऊर्जा विभाग से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और प्रभावित उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की जाए।

यूपी में पीसीएस अधिकारियों का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 150 से अधिक अधिकारियों के तबादले; कई जिलों को मिले नए उपजिलाधिकारी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं गतिशील बनाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। शासन द्वारा जारी आदेश के तहत 150 से अधिक पीसीएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। अधिकांश अधिकारियों को विभिन्न जनपदों में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के पद पर नई जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि कई अधिकारियों को विशेष कार्याधिकारी , सहायक नगर आयुक्त , विकास प्राधिकरण, आवास एवं विकास परिषद तथा अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती दी गई है।

शासन के अनुसार, यह तबादला आदेश प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने, कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने, राजस्व प्रशासन को प्रभावी बनाने तथा जनसेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से जारी किया गया है। नई तैनाती पाने वाले अधिकारियों से तत्काल अपने-अपने पदों का कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
तबादला सूची में प्रमुख रूप से प्रशांत कुमार नायक को उपजिलाधिकारी बहराइच, कुमार संजय और मनोज प्रकाश को जालौन, ध्रुव शुक्ला को गाजीपुर, अभय कुमार सिंह को ओएसडी राजस्व परिषद लखनऊ, अरविंद कुमार सिंह एवं मिथिलेश कुमार त्रिपाठी को मैनपुरी, पुष्पेंद्र पटेल को अंबेडकरनगर, योगेश कुमार गौड़ को सहारनपुर, राजेश कुमार अग्रवाल को बहराइच, अनुज नेहरा को उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद लखनऊ में एएचसी तथा ज्योति शर्मा को कानपुर नगर में उपजिलाधिकारी बनाया गया है।
इसी क्रम में अरुण कुमार को गौतमबुद्धनगर, अरुण दीक्षित को भदोही, अश्वनी कुमार सिंह को बाराबंकी, क्षितिज द्विवेदी को देवरिया, मनोज कुमार को मथुरा, राकेश कुमार त्यागी को रामपुर, शुभम यादव को बुलंदशहर, दीपिका मेहर को शामली, अवधेश कुमार निगम को फिरोजाबाद, गोपाल शर्मा को बरेली तथा विश्वेश्वर सिंह को सिद्धार्थनगर का उपजिलाधिकारी नियुक्त किया गया है।
शासन ने अब्बास हसन नकवी को गाजीपुर, सुरभि शर्मा को बागपत, श्याम प्रताप सिंह को मैनपुरी, जितेन्द्र सिंह वीरवाल को बिजनौर, ऋतुप्रिया को कानपुर विकास प्राधिकरण में ओएसडी, मनोज कुमार पाठक को इटावा, शुभम श्रीवास्तव को मुजफ्फरनगर, पुष्करनाथ चौधरी को उन्नाव, प्रतिभा मिश्रा को कानपुर देहात, प्रमेश श्रीवास्तव को कौशाम्बी तथा लवगीत कौर को गौतमबुद्धनगर में विशेष कार्याधिकारी नियुक्त किया है।
इसके अलावा अरविन्द त्रिपाठी को वाराणसी, माज़ अख्तर को झांसी, फाल्गुनी सिंह को उन्नाव, प्रीति तिवारी को बांदा, आकांक्षा सिंह को चंदौली, रश्मि सिंह को जौनपुर, मधुमिता सिंह को अंबेडकरनगर, क्षिप्रापाल को संतकबीरनगर, प्रदीप कुमार रमन को जौनपुर, निकिता को गाजियाबाद नगर निगम में एएमसी तथा संजय कुमार पाण्डेय को बहराइच भेजा गया है।
सूची में गुलाबचन्द्र-द्वितीय को हरदोई, सुभाष सिंह और जीत सिंह को रामपुर, नवोदिता शर्मा को नगर निगम प्रयागराज में एएमसी, रत्निका श्रीवास्तव को रामपुर, शम्भू शरण को गाजीपुर, मो. शम्सतबरेज खान को हाथरस, विनीत मिश्र को सीतापुर, साक्षी शर्मा को मथुरा, अतुल आनंद को आजमगढ़, प्रज्ञा पाण्डेय को बाराबंकी, अनुराग सिंह को बदायूं तथा शाल्वी अग्रवाल को प्रयागराज का उपजिलाधिकारी बनाया गया है।
इसी प्रकार अमित कुमार गुप्ता को बागपत, सुशांत श्रीवास्तव को औरैया, सचिन राजपूत को शामली, रितू सिरोही को हाथरस, चारुल यादव को उपशा लखनऊ में विशेष कार्याधिकारी, बीर सिंह को रायबरेली, भावना विमल एवं राशी कृष्णा को लखीमपुर खीरी, भावना सिंह को बाराबंकी, वन्दना पाण्डेय को अयोध्या तथा गरिमा सिंह को स्थानीय निकाय निदेशालय लखनऊ में सहायक निदेशक नियुक्त किया गया है।
फर्रुखाबाद को भी नई प्रशासनिक टीम मिली है। शासन ने अजय कुमार पाण्डेय, सचिन कुमार वर्मा तथा श्वेता साहू को फर्रुखाबाद में उपजिलाधिकारी के रूप में तैनात किया है। वहीं लखनऊ में आकाश सिंह, आकाश कुमार और अभिषेक कुमार सिंह को नई जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा आदेश में गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा, वाराणसी, अयोध्या, बरेली, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, मथुरा, बहराइच, रामपुर, बिजनौर, बाराबंकी, जौनपुर, मऊ, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, अमरोहा, सोनभद्र, चित्रकूट, गोण्डा, रायबरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, एटा, हापुड़, अलीगढ़, बदायूं, बुलंदशहर, श्रावस्ती, अमेठी, झांसी, ललितपुर, फिरोजाबाद, इटावा, हाथरस, फतेहपुर, कौशाम्बी और अन्य जनपदों में भी बड़ी संख्या में अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

सड़कें केवल रास्ते नहीं, विकास की जीवनरेखा हैं

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उत्तर प्रदेश आज एक बार फिर अपने आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। तीन नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास केवल सरकारी कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि यह उस सोच का विस्तार है जिसमें सड़क को विकास, निवेश और समृद्धि का सबसे बड़ा माध्यम माना गया है। किसी भी प्रदेश की आर्थिक शक्ति का आकलन केवल उसके उद्योगों या कृषि उत्पादन से नहीं, बल्कि उसकी कनेक्टिविटी से भी किया जाता है। जिस राज्य की सड़कें बेहतर होती हैं, वहां विकास की रफ्तार स्वतः तेज हो जाती है।

 

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में सड़क नेटवर्क का विस्तार केवल यात्रा को आसान बनाने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध किसानों की आय, उद्योगों की लागत, व्यापार की गति, पर्यटन के विस्तार और युवाओं के रोजगार से जुड़ा होता है। जब एक किसान अपनी फसल कम समय में मंडी तक पहुंचा देता है, जब उद्योगपति बिना बाधा अपना माल देश के किसी भी हिस्से तक भेज सकता है और जब किसी छात्र या मरीज को बेहतर सड़क के कारण समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने का अवसर मिलता है, तभी सड़क निर्माण का वास्तविक महत्व समझ में आता है।

 

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और अन्य परियोजनाओं ने प्रदेश की पहचान बदलने का काम किया है। अब राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार इस परिवर्तन को और अधिक गति देने जा रहा है। यह केवल शहरों को जोड़ने की योजना नहीं, बल्कि गांवों, कस्बों और औद्योगिक क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का अभियान है।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कहना कि सड़कें विकास की आधारशिला होती हैं, केवल एक राजनीतिक बयान नहीं बल्कि एक आर्थिक सत्य है। विश्व के जिन देशों ने तेज आर्थिक प्रगति की है, वहां सबसे पहले परिवहन व्यवस्था को मजबूत किया गया। अच्छी सड़कें निवेशकों का विश्वास बढ़ाती हैं, परिवहन लागत कम करती हैं और उद्योगों को नई ऊर्जा देती हैं। यही कारण है कि बेहतर सड़क नेटवर्क किसी भी राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है।

 

हालांकि, केवल सड़क बनाना ही पर्याप्त नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती इन परियोजनाओं की गुणवत्ता, समयबद्ध निर्माण और नियमित रखरखाव की है। कई बार करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कें कुछ वर्षों में ही जर्जर हो जाती हैं। यदि ऐसा होता है तो विकास की पूरी अवधारणा प्रभावित होती है। इसलिए निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय करना, गुणवत्ता की स्वतंत्र निगरानी करना और समय-समय पर रखरखाव सुनिश्चित करना उतना ही आवश्यक है जितना नई परियोजनाओं का शिलान्यास।

आज आवश्यकता केवल चौड़ी सड़कों की नहीं, बल्कि सुरक्षित सड़कों की भी है। बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सड़क निर्माण के साथ-साथ ट्रैफिक प्रबंधन, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं और सड़क सुरक्षा के मानकों पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। विकास तभी सार्थक होगा जब सड़कें लोगों की जान बचाएं, न कि दुर्घटनाओं का कारण बनें।

यूथ इंडिया का मानना है कि उत्तर प्रदेश की नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं राज्य को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि इन परियोजनाओं का लाभ गांवों, किसानों, युवाओं, उद्यमियों और आम नागरिकों तक समान रूप से पहुंचता है तथा निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है, तो यह सड़कें केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का माध्यम नहीं रहेंगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर, औद्योगिक और निवेश के लिए अग्रणी राज्य बनाने की मजबूत नींव साबित होंगी।

विकास का वास्तविक अर्थ केवल इमारतें खड़ी करना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन को आसान बनाना है। सड़कें जब अवसरों से जुड़ती हैं, तभी वे विकास की सच्ची पहचान बनती हैं।

बैंकॉक के पब में भीषण अग्निकांड: 27 लोगों की मौत, 60 से अधिक झुलसे

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– कई के लापता होने की आशंका

 

बैंकॉक। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एक पब में लगी भीषण आग ने भयावह त्रासदी का रूप ले लिया। हादसे में अब तक 27 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 60 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा कुछ लोगों के अब भी लापता होने की खबर है, जिनकी तलाश के लिए राहत और बचाव अभियान जारी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग कुछ ही मिनटों में पूरे पब में फैल गई। आग लगते ही वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। धुएं और तेज लपटों के कारण कई लोग बाहर निकलने में सफल नहीं हो सके। बचाव के प्रयास में कई लोग पब के पीछे बने रेस्टरूम में पहुंच गए, लेकिन वहां भी धुआं भर जाने से वे बाहर नहीं निकल सके। राहत दल को रेस्टरूम से भी कई शव बरामद हुए हैं।

प्रशासन के अनुसार, मृतकों में 9 पुरुष और 18 महिलाएं शामिल हैं। घायलों को आसपास के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। कई पीड़ित गंभीर रूप से झुलसे हैं और उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और आपदा राहत दल मौके पर पहुंच गए। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। पूरे परिसर की तलाशी ली जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदर कोई व्यक्ति फंसा न रह गया हो।

हादसे की गंभीरता को देखते हुए थाईलैंड के प्रधानमंत्री भी घटनास्थल पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को घायलों के समुचित उपचार, मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने तथा आग लगने के कारणों की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।

युवक की गोली मारकर हत्या, दो गोलियां लगने से मौत

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– आरोपी फरार, पुलिस जांच में जुटी

 

गाजियाबाद। लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र की रतिराम कॉलोनी में सोमवार को दिनदहाड़े युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने से इलाके में सनसनी फैल गई। हमलावर ने युवक पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें दो गोलियां लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उपचार के लिए उसे दिल्ली के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

 

मृतक की पहचान विपिन के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी सोनू ने किसी बात को लेकर हुए विवाद के बाद विपिन पर लगातार गोलियां चला दीं। गोली लगते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आरोपी वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया।

 

घटना की सूचना मिलते ही लोनी बॉर्डर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है तथा प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जा रही है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई टीमों का गठन किया गया है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या के पीछे की वास्तविक वजह का पता लगाया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में पुरानी रंजिश या आपसी विवाद की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है, हालांकि अभी किसी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कंपनी में भीषण आग, दमकल की 8 गाड़ियों ने पाया काबू; शॉर्ट सर्किट की आशंका

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नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के सेक्टर-88 स्थित एक कंपनी में सोमवार को अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग ने देखते ही देखते कंपनी के ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी के अनुसार, आग बुझाने के लिए दमकल की आठ गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। दमकल कर्मियों ने कई घंटों तक अभियान चलाकर आग को अन्य हिस्सों में फैलने से रोक दिया। समय रहते आग पर नियंत्रण पा लेने से बड़ा हादसा टल गया।

प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि, अग्निशमन विभाग और संबंधित एजेंसियां तकनीकी जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जाएगी।

राहत की बात यह रही कि घटना के समय कंपनी में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। इससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि, आग से कंपनी के अंदर रखे मशीनरी, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान को नुकसान पहुंचने की आशंका है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है।