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Friday, April 17, 2026
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वेतन वृद्धि आंदोलन में सोशल मीडिया नेटवर्किंग और बाहरी राज्यों के कनेक्शन की जांच तेज

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नोएडा
हालिया श्रमिक बवाल को लेकर जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। एसटीएफ की शुरुआती जांच में सामने आया है कि वेतन वृद्धि को लेकर भड़का विवाद केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे डिजिटल नेटवर्किंग के जरिए बाहरी राज्यों से भी समन्वय किया जा रहा था। आरोप है कि तेलंगाना और कर्नाटक से कुछ लोगों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स के माध्यम से गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश की।

जांच एजेंसियों के अनुसार, हिंसा और प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों वीडियो बनाए गए, जिनमें से 500 से अधिक वीडियो की बारीकी से जांच की जा रही है। इन वीडियो में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने और उनकी गतिविधियों का विश्लेषण करने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनका फैक्ट्रियों या उद्योगों से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।

एसटीएफ को यह भी जानकारी मिली है कि लगभग 80 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे, जिनका इस्तेमाल श्रमिकों को संगठित करने और कथित रूप से उकसाने के लिए किया गया। इनमें से कई ग्रुपों की जांच चल रही है और कुछ का सत्यापन भी पूरा हो चुका है। इसके अलावा, टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए भी निर्देश और संदेश फैलाए जाने के संकेत मिले हैं।

इस पूरे मामले में पुलिस ने कई संगठनों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि कुछ संगठन फैक्ट्री क्षेत्रों में सक्रिय होकर श्रमिकों को प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रहे थे। इसी सिलसिले में 600 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है, जबकि आगे की कार्रवाई और पहचान प्रक्रिया जारी है।

फिलहाल प्रशासन ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस और प्रशासन का दावा है कि अधिकांश फैक्ट्रियों में कामकाज फिर से सामान्य हो रहा है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए फैलाई गई कथित गतिविधियों की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।

बिल्हौर-शिवराजपुर हाईवे पर सड़क हादसा में तीन की मौत

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कानपुर
बिल्हौर क्षेत्र के शिवराजपुर स्थित दुबियाना अंडरपास के ऊपर गुरुवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। हाईवे पर चार बाइक सवारों को एक अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे मौके पर ही तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा उस समय हुआ जब सभी लोग भांजे के तिलक समारोह से वापस अपने घर लौट रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक सवार सड़क पर दूर तक जा गिरे और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। हादसे के बाद अज्ञात वाहन चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जांच कर रही है।

मृतकों की पहचान बिठूर थाने के बाकरगंज गांव निवासी विनोद निषाद (45), रामनारायण (52) और पियूष निषाद (11) के रूप में हुई है। वहीं घायल दीक्षा को गंभीर हालत में रामा अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। तीन मौतों की खबर से गांव में मातम छा गया और परिवारों में कोहराम मच गया।

पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में अज्ञात वाहन की तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि वाहन की पहचान की जा सके।

इस घटना ने एक बार फिर हाईवे पर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस इलाके में स्पीड कंट्रोल और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।

माफिया अनुपम दुबे पर बड़ी कार्रवाई,काली कमाई की 12 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क

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– सोशल मीडिया के जरिये समर्थन करने वालों की सूची भी तैयार
लखनऊ /फर्रुखाबाद/मैनपुरी। माफिया अनुपम दुबे के काले साम्राज्य पर एक बार फिर हुकूमत का डंडा चलने के बाद प्रशासन ने एक बड़ी कार्यवाही करते हुए कुख्यात माफिया अनूपम दुबे की करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। वही सोशल मीडिया पर माफिया अनुपम दुबे का समर्थन करने वालों की भी सूची तैयार की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की टेड़ी नजर के बाद फर्रुखाबाद कोतवाली में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में सुनवाई के चलते मज़बूरी वश जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने माफिया अनुपम दुबे की संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी किए थे। इसी क्रम में बुधवार को प्रशासनिक टीम ने कस्बा नवाबगंज क्षेत्र में स्थित लगभग 6 बीघा जमीन को कुर्क करने की कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन के अनुसार, कुर्क की गई इस संपत्ति की बाजार कीमत 12 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
बताया जा रहा है कि माफिया अनुपम दुबे वर्तमान में मथुरा जेल में बंद है। उसके खिलाफ वर्ष 2021 में गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले की सुनवाई डीएम न्यायालय में चल रही थी। लंबी सुनवाई के बाद 28 नवंबर 2025 को न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए उसकी अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को कुर्क करने के आदेश दे दिए।
शासन का कहना है कि अपराध से अर्जित संपत्तियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।शासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में यह संदेश गया है कि अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ प्रशासन पूरी तरह सख्त है और आने वाले समय में ऐसे तत्वों पर और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।बता दें माफिया अनुपम दुबे पर जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी की नरमी किसी से छुपी नहीं रह गईं है, फिर भी मंडल स्तर के अधिकारियों की टेढ़ी नजर के चलते करवाई जारी है।

परिणामों की प्रतीक्षा न करें, भविष्य के लिए तैयारी करें

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डॉ. विजय गर्ग
परीक्षा परिणाम जीवन में हर छात्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ होता है। यह वह समय होता है जब आशाएं, भय और जिज्ञासा एक साथ मन में निवास करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या हमें केवल परिणामों की प्रतीक्षा करनी चाहिए? उत्तर है: नहीं। वास्तव में यह समय आपके भविष्य के लिए तैयारी करने का सबसे अच्छा अवसर है।

परिणाम सिर्फ एक अंक या ग्रेड नहीं होते, वे हमारी यात्रा का एक छोटा सा हिस्सा होते हैं। कभी-कभी परिणाम उम्मीदों के अनुरूप नहीं होते, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा भविष्य अंधकारमय है। जो छात्र परिणामों की प्रतीक्षा करने के बजाय अपने अगले कदमों के बारे में सोचते हैं, वे वास्तव में आगे बढ़ते हैं।

यह समय आपकी रुचियों और योग्यताओं को समझने का है। आप सोचें कि आपको किस विषय में रुचि है, आप किस क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। नए पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी एकत्र करें, कौशल को निखारें और खुद को नई चुनौतियों के लिए तैयार करें।

इसके साथ ही, समय के महत्व को समझना भी आवश्यक है। जिस समय हम उदासीनता में बिताते हैं, वह वापस नहीं आता। इसलिए परिणामों की प्रतीक्षा करने के बजाय इस समय को उत्पादक बनाना चाहिए। जैसे कि नई भाषाएं सीखना, कंप्यूटर कौशल बढ़ाना या किताबें पढ़ना।

इस समय माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्हें बच्चों पर दबाव डालने के बजाय उन्हें प्रेरित करना चाहिए तथा सही दिशा में मार्गदर्शन देना चाहिए। अक्सर ऐसा होता है कि परीक्षाओं या किसी बड़े काम के बाद इंसान नतीजे का इंतजार करते हुए स्तब्ध रह जाता है। छात्रों के लिए यह समय विशेष रूप से नाजुक होता है। जब परीक्षाएं खत्म होती हैं, तो एक अजीब सी बेचैनी और केवल “परिणाम क्या होगा? का प्रश्न मन पर हावी हो जाता है। लेकिन बुद्धि यह है कि परिणामों की प्रतीक्षा में समय बर्बाद करने के बजाय, अगले चरण यानी भविष्य की तैयारी शुरू कर दी जाए। प्रतीक्षा क्यों हानिकारक है? नतीजा हमारे हाथ में नहीं है। जो हमें लिखना या करना था, हम कर चुके हैं। अब उसके बारे में सोचना केवल मानसिक तनाव और चिंता को जन्म देता है। यदि हम परिणाम आने तक हाथ से हाथ मिलाकर बैठे रहेंगे, तो हम वह बहुमूल्य समय खो देंगे जिसे नई योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। भविष्य की तैयारी कैसे करें?

आत्म-निरीक्षण: यह अपनी कमियों और ताकत को पहचानने का सबसे अच्छा समय है। पिछले प्रदर्शन से सीखें कि कहां सुधार की गुंजाइश है।
नए कौशल सीखना: आज का युग सिर्फ डिग्रियों का नहीं, बल्कि कौशलों का है। चाहे वह कंप्यूटर कोडिंग हो, कोई नई भाषा सीखना हो, या बातचीत करने की कला हो 】इस समय का उपयोग खुद को अपडेट करने के लिए करें।
अगला लक्ष्य चयन: यदि आप एक चरण पार कर चुके हैं, तो अगला लक्ष्य क्या है? चाहे वह किसी उच्च शिक्षा संस्थान में प्रवेश कर रहा हो या किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा हो, उसकी रूपरेखा अभी तैयार करें।
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: अक्सर तैयारी के दिनों में हम अपने स्वास्थ्य की जांच करते हैं। इस वचन को योग, व्यायाम और अच्छी किताबें पढ़ने में लगाएं ताकि आप अगली चुनौती के लिए तैयार हो सकें। सफलता का मूल मंत्र इतिहास गवाह है कि वही लोग शिखर पर पहुंचते हैं जो समय की नब्ज को पहचानते हैं। नतीजा चाहे पक्ष में हो या विपक्ष में, मेहनत कभी नहीं बचती। अगर परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आता, तो आपकी पहले से की गई भविष्य की तैयारी आपको टूटने नहीं देगी। यदि परिणाम शानदार रहता है, तो आप दूसरों से दो कदम आगे होंगे। अंतिम याद रखें, बहता पानी ही साफ रहता है। जीवन चलने का नाम है, रुकने का नहीं। परिणामों की बेड़ियों में उलझे रहने के बजाय, अपने सपनों की उड़ान के लिए नए पंख तैयार करें। आज की तैयारी ही कल की सफलता का आधार है। जीवन का अंत नहीं होता, बल्कि एक नई शुरुआत होती है। अगर हम आज से ही अपने भविष्य के लिए तैयारी करें, तो हम कल की चुनौतियों को आसानी से पार कर सकेंगे।

इसलिए परिणामों की प्रतीक्षा न करें, अपने सपनों को साकार करने के लिए आज ही कदम उठाएं।

डॉ. विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शैक्षिक स्तंभकार मलोट पंजाब

बारात की खुशियां मातम में बदलीं: सामान लेने गए युवक की सड़क हादसे में मौत, साथी गंभीर घायल

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अमृतपुर फर्रुखाबाद

थाना क्षेत्र में बारात से जुड़ा एक दुखद हादसा सामने आया, जहां बारात का सामान लेकर लौट रहे दो बाइक सवार युवकों को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना क्षेत्र के कस्बा अमृतपुर स्थित हनुमान मंदिर के पास यह दुर्घटना हुई। गूजरपुर गहलवार निवासी धनपाल की बेटी की बारात गांव में आई हुई थी। बारात के दौरान कुछ सामान कम पड़ गया, जिसे लाने के लिए गांव के ही चमन पुत्र वीरेंद्र (उम्र लगभग 20 वर्ष) और पृथ्वी पुत्र राम सिंह बाइक से अमृतपुर कस्बा गए थे। सामान लेकर वापस लौटते समय हनुमान मंदिर के पास किसी अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि चमन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका साथी पृथ्वी गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को 108 एंबुलेंस की सहायता से पहले राजेपुर भेजा गया, जहां हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
मृतक चमन उधरनपुर लीलापुर का निवासी बताया जा रहा है और वह पांच भाइयों में सबसे छोटा था। बारात की खुशियां देखते ही देखते मातम में बदल गईं। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और मां सुनीता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।
सूत्रों के अनुसार, यदि हेलमेट का प्रयोग किया गया होता तो संभवतः युवक की जान बच सकती थी।
थाना अध्यक्ष रक्षा सिंह ने बताया कि तहरीर मिलने के बाद विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। साथ ही मृतक युवक के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी है।

विकसित भारत-2047 की दिशा में तकनीक बनेगी सबसे बड़ी ताकत: एन. चंद्रशेखरन

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गोरखपुर।
भारत को ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है, जब आज की उभरती हुई तकनीकों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। यह विचार आज महायोगी गोरखनाथ यूनिवर्सिटी, गोरखपुर में आयोजित ‘विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश-2047’ कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए।
कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित उद्योग समूह टाटा संस के चेयरमैन एन . चन्द्रसेकरण विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और छात्रों ने भी भाग लिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्र भारत के भविष्य की दिशा तय करेंगे। इन तकनीकों को कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग से जोड़कर ही वास्तविक परिवर्तन संभव है।
इस अवसर पर आयोजित हैकाथॉन के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। साथ ही ‘ए आई फॉर फार्मर्स ’ प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले अन्नदाता किसानों को भी सम्मान देकर उनकी तकनीकी भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया।
कृषि क्षेत्र में एआई के उपयोग से उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के नए रास्ते खुलने की उम्मीद जताई गई।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संस्थानों के बीच शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू ) का आदान-प्रदान भी किया गया। इससे छात्रों को नए अवसर मिलेंगे और शोध को नई दिशा मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों और किसान बंधुओं को बधाई देते हुए कहा गया कि देश के विकास में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। नई तकनीकों को अपनाकर वे न केवल अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अहम योगदान दे सकते हैं।