गोरखपुर।
भारत को ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है, जब आज की उभरती हुई तकनीकों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। यह विचार आज महायोगी गोरखनाथ यूनिवर्सिटी, गोरखपुर में आयोजित ‘विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश-2047’ कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए।
कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित उद्योग समूह टाटा संस के चेयरमैन एन . चन्द्रसेकरण विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और छात्रों ने भी भाग लिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्र भारत के भविष्य की दिशा तय करेंगे। इन तकनीकों को कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग से जोड़कर ही वास्तविक परिवर्तन संभव है।
इस अवसर पर आयोजित हैकाथॉन के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। साथ ही ‘ए आई फॉर फार्मर्स ’ प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले अन्नदाता किसानों को भी सम्मान देकर उनकी तकनीकी भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया।
कृषि क्षेत्र में एआई के उपयोग से उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के नए रास्ते खुलने की उम्मीद जताई गई।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संस्थानों के बीच शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू ) का आदान-प्रदान भी किया गया। इससे छात्रों को नए अवसर मिलेंगे और शोध को नई दिशा मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों और किसान बंधुओं को बधाई देते हुए कहा गया कि देश के विकास में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। नई तकनीकों को अपनाकर वे न केवल अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अहम योगदान दे सकते हैं।
विकसित भारत-2047 की दिशा में तकनीक बनेगी सबसे बड़ी ताकत: एन. चंद्रशेखरन


