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Monday, July 13, 2026
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ज्ञानवापी से श्रीकृष्ण जन्मभूमि तक संवाद से निकलेगा समाधान

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– सुप्रीम कोर्ट की पहल पर टिकी देश की नजर

 

नई दिल्ली। वर्षों से अदालतों में लंबित और देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक विवादों में शामिल ज्ञानवापी, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल मामलों को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने एक नई पहल की है। शीर्ष अदालत ने इन मामलों में टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की कोशिश करते हुए दोनों पक्षों को ‘समाधान समारोह-2026’ के तहत सुलह प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया है। इसके लिए 21, 22 और 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट परिसर में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।

 

सुप्रीम कोर्ट की ओर से हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं। यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो सबसे पहले ज्ञानवापी विवाद पर मध्यस्थता और आपसी बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल से जुड़े मामलों पर भी इसी प्रक्रिया के तहत चर्चा होगी।

 

न्यायपालिका का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में यदि आपसी सहमति से कोई रास्ता निकलता है तो वह लंबे समय तक टिकाऊ और समाज में सौहार्द बनाए रखने वाला हो सकता है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया स्वैच्छिक होगी। किसी भी पक्ष पर समझौते का दबाव नहीं होगा और यदि सहमति नहीं बनती है तो मामलों की नियमित न्यायिक सुनवाई पूर्ववत जारी रहेगी।

 

देश में ज्ञानवापी, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल से जुड़े विवाद केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह पहल न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ सामाजिक समरसता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

यूथ इंडिया की नजर में यह पहल केवल मुकदमों के निस्तारण का प्रयास नहीं, बल्कि संवाद और विश्वास की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। अदालत का उद्देश्य किसी पक्ष की जीत या हार तय करना नहीं, बल्कि संविधान और कानून के दायरे में ऐसा रास्ता तलाशना है जिससे समाज में शांति, सद्भाव और पारस्परिक सम्मान बना रहे।

 

अब देश की निगाहें अगस्त में होने वाले ‘समाधान समारोह’ पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्ष बातचीत के लिए तैयार होते हैं और कोई साझा सहमति बनती है तो यह देश के सबसे पुराने और संवेदनशील विवादों में एक नई शुरुआत साबित हो सकती है। वहीं यदि सहमति नहीं बनती है तो इन मामलों का अंतिम निर्णय न्यायालय की नियमित सुनवाई के माध्यम से ही होगा।

राम धन गबन मामले के आठों आरोपियों की आज होगी पेशी

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई की संभावना

 

अयोध्या। राम मंदिर से जुड़े चर्चित राम धन (दान-चढ़ावा) गबन मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों की आज विशेष न्यायाधीश (एंटी करप्शन) की अदालत में पेशी होगी। मामले की सुनवाई को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, सभी आरोपी 26 जून से जिला जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं। सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों को देखते हुए उनकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।

राम धन गबन प्रकरण की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने के बाद मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। जांच एजेंसियां चढ़ावे की गणना, धन के प्रबंधन और संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही हैं। अदालत में आज होने वाली सुनवाई के दौरान न्यायिक हिरासत, जांच की प्रगति और अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।

फिलहाल सभी आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों की विवेचना जारी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, जबकि अदालत में सुनवाई के बाद अगली कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

50 करोड़ की जमीन हड़पने के आरोप में एफआईआर, कोर्ट के आदेश पर भाजपा नेता समेत 10 नामजद

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वाराणसी। मोहनसराय क्षेत्र स्थित करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन पर कथित कब्जा और फर्जी दस्तावेज तैयार कर हड़पने के मामले में अदालत के आदेश पर बड़ा मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में भाजपा काशी क्षेत्र के उपाध्यक्ष समेत 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

 

मामला बुजुर्ग शिक्षिका प्रमिला मिश्रा की जमीन से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन का पंजीकरण कराया गया और उस पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण में कई लोगों की मिलीभगत होने का आरोप लगाया है।

 

कोर्ट के आदेश पर दर्ज एफआईआर में भाजपा काशी क्षेत्र के उपाध्यक्ष सुरेश सिंह का नाम भी शामिल है। इसके अलावा नितेश राय, विशाल मिश्रा, रवि उपाध्याय, करुणापति उपाध्याय, अजय कुमार तिवारी, प्रवीण कुमार सिंह, तत्कालीन उपनिबंधक अनिल कुमार तथा निबंधन कार्यालय के लिपिक सत्यांश सिंह समेत अन्य लोगों को नामजद किया गया है।

 

शिकायत में आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और कथित अनियमित पंजीकरण प्रक्रिया के जरिए करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध तरीके से अधिकार स्थापित करने की कोशिश की गई। मामले में तत्कालीन निबंधन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अदालत के आदेश के अनुपालन में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और सभी आरोपों की विस्तृत जांच की जा रही है। दस्तावेजों का सत्यापन, संबंधित अभिलेखों की जांच और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

 

यह मामला सामने आने के बाद वाराणसी में भूमि पंजीकरण प्रक्रिया, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और सरकारी अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

नोएडा में 9 हजार से अधिक वाहनों पर कार्रवाई की तैयारी, 85.50 करोड़ रुपये बकाया; भुगतान न करने पर होंगे जब्त

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नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में परिवहन विभाग ने रोड टैक्स और अन्य देयताओं का भुगतान नहीं करने वाले वाणिज्यिक वाहन मालिकों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। जिले में 9,000 से अधिक वाणिज्यिक वाहनों को नोटिस जारी किए गए हैं। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर बकाया जमा नहीं किया गया तो इन वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

 

परिवहन विभाग के अनुसार, इन वाहनों पर रोड टैक्स, जुर्माना और अन्य शुल्क मिलाकर करीब 85.50 करोड़ रुपये का बकाया है। लंबे समय से भुगतान न करने वाले वाहन स्वामियों को अंतिम नोटिस भेजे जा रहे हैं, ताकि वे जल्द से जल्द बकाया राशि जमा कर दें।

 

अधिकारियों ने बताया कि नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं करने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे वाहनों को सड़क पर चलते हुए पकड़कर जब्त किया जा सकता है और बकाया राशि जमा होने के बाद ही उन्हें छोड़ा जाएगा।

 

परिवहन विभाग का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य राजस्व वसूली बढ़ाने के साथ-साथ नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। इसके लिए प्रवर्तन दल लगातार जांच अभियान चलाएंगे और बकाएदार वाहनों की निगरानी की जाएगी।

 

विभाग ने सभी वाहन स्वामियों से अपील की है कि वे समय रहते अपना रोड टैक्स और जुर्माना जमा कर दें, ताकि जब्ती जैसी कार्रवाई से बचा जा सके। अधिकारियों के अनुसार, बकाया वसूली अभियान आने वाले दिनों में और तेज किया जाएगा।

नोएडा में इंजीनियर आर्यन की मौत: चार दिन बाद भी एफआईआर नहीं, करंट लगने से मौत का मामला

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नोएडा। सेक्टर-58 क्षेत्र में इंजीनियर आर्यन की करंट लगने से हुई मौत का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। घटना के चार दिन बीत जाने के बावजूद अब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, आर्यन सड़क किनारे बने नाले की स्लैब टूटने या धंसने के कारण नाले में गिर गया। बताया जा रहा है कि नाले में विद्युत करंट प्रवाहित हो रहा था, जिसकी चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने बिजली आपूर्ति बंद कराए जाने के बाद आर्यन को नाले से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी।

मामले में पुलिस का कहना है कि अभी तक उन्हें किसी भी पक्ष से औपचारिक शिकायत या तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

घटना के बाद स्थानीय लोगों और मृतक के परिजनों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि खुले और असुरक्षित नाले तथा बिजली व्यवस्था में लापरवाही के कारण एक युवक की जान चली गई। लोगों ने जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। यदि शिकायत दर्ज होती है तो नाले के रखरखाव, बिजली व्यवस्था और संबंधित विभागों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा मानकों और विभागीय लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बदरीनाथ धाम में भी दान-चढ़ावा हेराफेरी: 32 दिन की सीसीटीवी फुटेज डिलीट

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देहरादून/बदरीनाथ। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावा हेराफेरी के कथित मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि मंदिर परिसर की 32 दिनों की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है, जबकि पहले संबंधित अधिकारियों की ओर से दावा किया गया था कि 45 दिनों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है।

मामले के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने यह जानने की प्रक्रिया शुरू कर दी है कि आखिर 32 दिनों की सीसीटीवी फुटेज कैसे और किन परिस्थितियों में डिलीट हुई। यह भी जांच का विषय है कि फुटेज तकनीकी कारणों से नष्ट हुई या फिर उसे जानबूझकर हटाया गया।

सूत्रों के अनुसार, विशेषज्ञ इंजीनियर डिलीट हुई रिकॉर्डिंग को रिकवर करने का प्रयास कर रहे हैं। यदि फुटेज सफलतापूर्वक रिकवर हो जाती है तो जांच को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते हैं और दान-चढ़ावे के लेनदेन से जुड़े कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।

इस घटनाक्रम के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के उस दावे पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें कहा गया था कि मंदिर परिसर की 45 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित है। अब 32 दिनों की फुटेज गायब मिलने से सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड संरक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

जांच एजेंसियां तकनीकी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। फुटेज गायब होने के कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर साक्ष्य मिटाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।