शरद कटियार
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। उससे पहले 2 अगस्त को होने वाली कार्यमंत्रणा समिति और सर्वदलीय बैठक केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की उस परंपरा का हिस्सा है, जहां सत्ता और विपक्ष मिलकर सदन को सार्थक ढंग से चलाने की रूपरेखा तैयार करते हैं। विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संसदीय कार्य मंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की मौजूदगी इस बैठक को विशेष महत्व प्रदान करती है।
लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति संसद और विधानसभाओं में होने वाली स्वस्थ बहस में निहित होती है। जनता अपने प्रतिनिधियों को इसलिए चुनती है कि वे उनके मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाएं और सरकार से जवाब मांगें। ऐसे में मानसून सत्र केवल सरकारी विधेयकों को पारित कराने का मंच नहीं होना चाहिए, बल्कि यह प्रदेश की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम भी बनना चाहिए।
इस बार प्रदेश के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं। अनेक जिलों में बाढ़ ने जनजीवन प्रभावित किया है। किसान फसल, सिंचाई, खाद और समर्थन मूल्य जैसे मुद्दों पर समाधान चाहते हैं। बिजली कटौती, शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, बेरोजगारी, अपराध नियंत्रण और शहरी व ग्रामीण विकास जैसे विषय सीधे आम नागरिक के जीवन से जुड़े हुए हैं। इन सभी मुद्दों पर सरकार से स्पष्ट जवाब और ठोस कार्ययोजना की अपेक्षा स्वाभाविक है।
सरकार निश्चित रूप से अपने विकास कार्यों, निवेश, बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियों को सदन के समक्ष रखेगी। यह उसका अधिकार और दायित्व दोनों है। वहीं विपक्ष की भूमिका केवल विरोध करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विपक्ष को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर जनता के मुद्दे उठाने चाहिए तथा रचनात्मक सुझाव भी देने चाहिए। स्वस्थ लोकतंत्र में मजबूत सरकार जितनी आवश्यक है, उतना ही जिम्मेदार और तथ्यपरक विपक्ष भी।
अक्सर देखा जाता है कि सदन की कार्यवाही नारेबाजी, हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ जाती है। इसका सबसे बड़ा नुकसान जनता को होता है, क्योंकि जिन समस्याओं के समाधान के लिए विधानसभा का गठन हुआ है, वे चर्चा से पहले ही शोर में दब जाती हैं। करोड़ों रुपये की सार्वजनिक धनराशि से संचालित होने वाले प्रत्येक सत्र का अधिकतम उपयोग होना चाहिए। यदि कार्यवाही बाधित होती है, तो उसका सीधा असर लोकतांत्रिक जवाबदेही पर पड़ता है।
विधानसभा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच नहीं है, बल्कि यह नीतियों के परीक्षण, कानून निर्माण और सरकार की जवाबदेही तय करने की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है। यहां होने वाली प्रत्येक बहस भविष्य की नीतियों और प्रदेश के विकास की दिशा तय करती है। इसलिए सत्ता पक्ष को विपक्ष के प्रश्नों का गंभीरता से उत्तर देना चाहिए और विपक्ष को भी जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आगामी मानसून सत्र से प्रदेश की जनता की अपेक्षा स्पष्ट है,सदन में शोर नहीं, समाधान दिखाई दें, आरोप नहीं, उत्तरदायित्व दिखे, राजनीति नहीं, जनहित सर्वोपरि रहे। यदि यह सत्र इन अपेक्षाओं पर खरा उतरता है, तो लोकतंत्र और जनता,दोनों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा। यही किसी भी सफल विधानसभा सत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।


