मंत्री हंसराज विश्वकर्मा के काफिले से लगा लंबा जाम
आम जनता घंटों सड़क पर फंसी, लोग बोले— “ये कैसी वीआईपी व्यवस्था?”
कृषि मंत्री की ऑफलाइन बैठक में गाड़ियों का जमावड़ा बना चर्चा का विषय
सरकार की सादगी और ईंधन बचत मुहिम पर उठे सवाल
लखनऊ। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार ईंधन बचाने, वीआईपी संस्कृति कम करने और सरकारी संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में कुछ मंत्रियों के भारी-भरकम काफिले और वाहनों की लंबी कतारें सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े कर रही हैं।
ताजा मामला नए मंत्री हंसराज विश्वकर्मा के काफिले से जुड़ा है, जहां उनके गुजरने के दौरान सड़क पर लंबा जाम लग गया। आम लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर नौकरीपेशा और मरीजों तक को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोगों में नाराजगी इस बात को लेकर भी दिखी कि जिस सरकार के शीर्ष नेता सादगी और ईंधन बचत की बात कर रहे हैं, उसी सरकार के मंत्री सड़क पर वीआईपी मूवमेंट का दबाव बढ़ा रहे हैं।
इसी बीच कृषि मंत्री की तीन मंडलों की ऑफलाइन बैठक भी चर्चा में आ गई। बैठक स्थल पर बड़ी संख्या में सरकारी और निजी वाहनों का जमावड़ा देखने को मिला। पार्किंग व्यवस्था चरमरा गई और आसपास के क्षेत्रों में यातायात प्रभावित रहा। सवाल यह उठ रहा है कि जब डिजिटल और ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा देने की बात हो रही है, तब इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के साथ ऑफलाइन बैठक की आवश्यकता क्यों पड़ी?
प्रदेश में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों के बीच जनता पहले ही परेशान है। ऐसे में मंत्रियों के लंबे काफिले और सरकारी वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर विपक्ष भी हमलावर हो सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सरकार वास्तव में “गुड गवर्नेंस” और “मिनिमम खर्च” का संदेश देना चाहती है, तो सबसे पहले सत्ता से जुड़े लोगों को ही उदाहरण पेश करना होगा।


