मेरठ: मेरठ (Meerut) में शास्त्री नगर स्थित आवास एवं विकास परिषद कार्यालय में एंटी करप्शन टीम (Anti-corruption team) ने कार्रवाई करते हुए आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव शर्मा को 6,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की लाभार्थी महिला की मकान रजिस्ट्री और पजेशन से जुड़ी फाइल आगे बढ़ाने के बदले उससे यह रकम मांगी गई थी।
मामले की शिकायत करने वाली रंजना के मुताबिक, उनके पति देवेंद्र की कोरोना काल में मौत हो चुकी है और वह चार बच्चों के साथ अकेली रहती हैं, किनानगर में आवेदन के बाद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान आवंटित हुआ था। रंजना ने बताया कि मकान के लिए 76 हजार रुपये डाउन पेमेंट जमा करना था, जिसके लिए उन्होंने 2 प्रतिशत ब्याज पर पैसे उधार लिए थे। रजिस्ट्री और चाबी मिलने की प्रक्रिया शुरू होने के दौरान अरुण नाम के कर्मचारी और बाद में अभिनव शर्मा ने उनसे 6,000 रुपये की मांग की।
पीड़िता का कहना है कि उन्होंने कर्मचारियों से अपने पति की मौत और चार छोटे बच्चों का हवाला देते हुए रकम नहीं मांगने की गुहार लगाई, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद उन्होंने अपनी सोने की कानों की बाली गिरवी रखकर रिश्वत की रकम जुटाई और एंटी करप्शन विभाग से शिकायत की। शिकायत के सत्यापन के बाद एंटी करप्शन टीम ने आरोपी को पकड़ने की योजना बनाई। टीम ने रंजना को केमिकल लगे नोट दिए और उन्हें शास्त्री नगर स्थित कार्यालय भेजा।
रंजना ने जैसे ही आरोपी अभिनव शर्मा को 6,000 रुपये दिए और उसने रकम अपने हाथ में ली, आसपास सादे कपड़ों में मौजूद एंटी करप्शन टीम ने उसे पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद टीम आरोपी कर्मचारी को नौचंदी थाने ले गई। नौचंदी थाना प्रभारी अनूप सिंह के अनुसार, आवास विकास कार्यालय में रिश्वत लेते पकड़े गए अभिनव शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी को हिरासत में लेकर विधिक कार्रवाई की जा रही है और उसे न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
आवास एवं विकास परिषद में रिश्वतखोरी का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। इससे पहले संपत्ति विभाग के कर्मचारी परमीत को भी रिश्वत लेते पकड़ा जा चुका है। वहीं, आवंटियों की ओर से संपत्ति अधिकारी सुनील कुमार शर्मा पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एंटी करप्शन टीम अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि अभिनव शर्मा कथित तौर पर अकेले रकम वसूल रहा था या उसके साथ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।


