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Tuesday, July 7, 2026

ट्रांसफार्मर पर काम करते समय लाइनमैन का हेल्पर करंट से झुलसा, गंभीर हालत में लोहिया अस्पताल रेफर

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शटडाउन लेने का दावा, फिर भी चालू हो गई बिजली; हेल्पर ने लगाया लापरवाही का आरोप, जेई ने दी सफाई
फर्रुखाबाद। जनपद फर्रुखाबाद के शमशाबाद थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर देने वाला एक गंभीर हादसा सामने आया। मुरेठी गांव में विद्युत ट्रांसफार्मर पर मरम्मत कार्य के दौरान लाइनमैन का हेल्पर अचानक करंट की चपेट में आ गया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शमशाबाद ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल फर्रुखाबाद रेफर कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घायल की पहचान शमशाबाद क्षेत्र के गांव पसियापुर निवासी 30 वर्षीय धीर सिंह के रूप में हुई है। वह विद्युत निगम में लाइनमैन के साथ हेल्पर के रूप में कार्य करता है। सोमवार दोपहर करीब दो बजे वह मुरेठी गांव में एक ट्यूबवेल की विद्युत लाइन ठीक करने के लिए ट्रांसफार्मर पर चढ़कर मरम्मत कार्य कर रहा था।
घायल धीर सिंह का आरोप है कि कार्य शुरू करने से पहले नियमानुसार संबंधित विद्युत उपकेंद्र से शटडाउन लिया गया था तथा सुरक्षा के लिए ट्रांसफार्मर पर नाम प्लेट भी लगा दी गई थी। इसके बावजूद अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति चालू कर दी गई। जैसे ही लाइन में करंट दौड़ा, वह उसकी चपेट में आ गया और गंभीर रूप से झुलस गया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। सूचना पर शमशाबाद थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल धीर सिंह को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उसका उपचार जारी है।
वहीं, इस पूरे मामले में बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) जुनेद आलम ने अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि विभाग को ट्रांसफार्मर पर किसी प्रकार का कार्य किए जाने की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी। उनके अनुसार, विद्युत उपकेंद्र पर शटडाउन या कार्य की कोई जानकारी दर्ज नहीं थी। इसी कारण नियमित प्रक्रिया के तहत बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई, जिसके दौरान यह हादसा हुआ।
घटना के बाद बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और कार्य प्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि वास्तव में शटडाउन लिया गया था, तो बिजली आपूर्ति कैसे बहाल हुई, और यदि शटडाउन नहीं लिया गया था तो बिना निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए कर्मचारी ट्रांसफार्मर पर कैसे चढ़ गया? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

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