जम्मू-कश्मीर
नशा तस्करी और आतंकवाद के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मनोज सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि नशा तस्कर और आतंकी एक-दूसरे के सहयोगी हैं और इस नेटवर्क को तोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस कड़ी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
रियासी में आयोजित “नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर” अभियान के दौरान उपराज्यपाल ने कहा कि नशे के खिलाफ चल रही मुहिम का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। समाज में जागरूकता बढ़ रही है और लोग खुलकर इस बुराई के खिलाफ सामने आ रहे हैं। प्रशासन और आम जनता की साझेदारी से इस अभियान को और मजबूत बनाया जा रहा है।
आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि हाल ही में कई मामलों में कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। करोड़ों रुपये की अवैध संपत्तियों को कुर्क किया गया है, जबकि कई तस्करों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ वित्तीय जांच भी शुरू की गई है। साथ ही, कई वाहनों और ड्राइविंग लाइसेंस को निरस्त किया गया है।
उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि नशा तस्करों की पहचान कर उन्हें लगातार निगरानी में रखा जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों और संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है, ताकि युवाओं को इस जाल से बचाया जा सके।
इस अभियान में महिलाओं की भागीदारी को भी अहम बताया गया। उन्होंने जानकारी दी कि जम्मू संभाग में हजारों महिला समितियां गठित की गई हैं, जो नशा विरोधी जागरूकता फैलाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने का काम कर रही हैं।
प्रशासन का मानना है कि नशा केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज को अंदर से खोखला करने वाली गंभीर समस्या है। ऐसे में सरकार, पुलिस और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही इस चुनौती का स्थायी समाधान संभव है।


