चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में गुरुवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला, जब अन्नाद्रमुक के तीन पूर्व मंत्री डॉ. सी. विजयभास्कर, एम.आर. विजयभास्कर और एम.एस.एम. आनंदन अपने हजारों समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अन्नाद्रमुक के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
मामल्लापुरम में आयोजित सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में पार्टी के महासचिव एन. आनंद और मुख्य समन्वयक के.ए. सेंगोट्टैयन ने सभी नेताओं का स्वागत किया। इस दौरान दोनों पूर्व विधायकों ने अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर नई पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व व सरकार की कार्यशैली की सराहना की।
कार्यक्रम में के.ए. सेंगोट्टैयन ने अन्नाद्रमुक नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी अब राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि एक “कॉरपोरेट कंपनी” बन चुकी है, जहां कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं के विश्वास के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया।
वहीं, इस सियासी घटनाक्रम पर द्रमुक ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी की उप महासचिव कनिमोझी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह उत्तर भारत में “वॉशिंग मशीन” की राजनीति की चर्चा होती थी, अब वैसी ही राजनीति तमिलनाडु में भी दिखाई दे रही है। उनका इशारा कथित गुटखा घोटाले के आरोपों का सामना कर रहे पूर्व मंत्री सी. विजयभास्कर की ओर माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रही नेताओं की बगावत और दल-बदल से तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं। अन्नाद्रमुक में बढ़ते असंतोष और तमिलगा वेत्री कझगम के तेजी से विस्तार को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


