मुंबई: शिवसेना (Shiv Sena) UBTने 6 सांसदों के शिवसेना में विलय के स्पीकर के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका के माध्यम से कहा कि संसद में इन सांसदों के बिना पार्टी का काम नहीं चल रहा है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के फैसले को चुनौती देने के लिए पार्टी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। फिलहाल रोक से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। इस पर अदालत ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं।
शिवसेना UBT के 6 सांसदों के शिवसेना में विलय के बाद अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना में सिर्फ तीन सांसद ही रह गए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पीकर ऑफिस और विलय करने वाले 6 सांसदों को नोटिस जारी किया है। शिवसेना (UBT) गुट और एकनाथ शिंदे गुट के बीच राजनीतिक और कानूनी संघर्ष एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने विलय को मान्यता देने के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय और संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया है।
शिवसेना (UBT) गुट के वकील देवदत्त कामत ने कोर्ट में कहा कि सभी सांसद एकतरफा विलय का फैसला नहीं ले सकते थे, इसलिए हम अंतरिम आदेश की मांग कर रहे हैं। हालांकि, वकील देवदत्त ने एक वीक के अंदर सुनवाई की मांग की, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं। मामले की 2 सप्ताह के बाद सुनवाई होगी।
वहीं दूसरी तरफ, एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के वकील नीरज कौल ने कहा कि हम एक-एक सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सुनवाई के दौरान यह भी तर्क दिया गया कि लोकसभा अध्यक्ष के पास किसी राजनीतिक दल के विलय को मान्यता देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।


