लखनऊ
प्रदेश में आंधी, तूफान और आकाशीय बिजली से मची भारी तबाही के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवारों के लिए बड़े राहत पैकेज का ऐलान किया है। प्रदेश सरकार ने साफ किया है कि प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही फसल बर्बादी, पशुहानि और खेतों में जमा गाद हटाने के लिए भी अलग-अलग आर्थिक मदद देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रदेश में पिछले चौबीस घंटे के भीतर आंधी-तूफान और बिजली गिरने से 111 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 72 लोग घायल हुए हैं। सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और बड़ी संख्या में पशुओं की भी मौत हुई है। प्रयागराज, मीरजापुर, संत रविदास नगर, फतेहपुर और रायबरेली समेत कई जिलों में तबाही के हालात बने हुए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को राहत कार्यों में तेजी लाने और चौबीस घंटे के भीतर प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। जिन किसानों की फसल 33 प्रतिशत से अधिक खराब हुई है, उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। वर्षा सिंचित क्षेत्रों में 8500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सुनिश्चित सिंचित क्षेत्रों में 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तथा बारहमासी फसलों और कृषि वानिकी के लिए 22 हजार 500 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता तय की गई है। यह आर्थिक मदद अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक के किसानों को मिलेगी।
अतिवृष्टि और बाढ़ के कारण खेतों में जमा गाद और मलबा हटाने के लिए भी सरकार ने 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता देने का फैसला किया है, ताकि किसान दोबारा खेती शुरू कर सकें। पशुपालकों को भी राहत देते हुए दुधारू गाय और भैंस की मौत पर 37 हजार 500 रुपये, बैल और घोड़े जैसे पशुओं पर 32 हजार रुपये तथा बछड़ा, गधा, खच्चर और टट्टू के लिए 20 हजार रुपये की सहायता निर्धारित की गई है। भेड़, बकरी और सुअर की मृत्यु पर भी प्रति पशु चार हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।
राहत आयुक्त कार्यालय लगातार हालात की निगरानी कर रहा है। प्रभावित जिलों के अधिकारियों को गांव-गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिलने और राहत वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए।
सरकार ने लोगों से यह भी अपील की है कि आपदा में मौत होने पर पोस्टमार्टम अवश्य कराया जाए, क्योंकि सरकारी मुआवजा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही जारी किया जाता है। प्रदेश में आई इस प्राकृतिक आपदा ने हजारों परिवारों को संकट में डाल दिया है, ऐसे में अब लोगों की नजर सरकार की राहत व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।


