
=सरकार और तेजतर्रार आईपीएस एसपी आरती सिंह को बदनाम करने की साजिश का भी पर्दाफाश
=मास्टर माइंड शातिर अवधेश मिश्रा के गैंग का पहला पर्दाफाश
=माफिया अनुपम दुबे के गैंग का कर रहा संचालन
= सात महीने बाद पुलिस का बड़ा प्रहार
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। जनपद में कथित फर्जी गैंगरेप मुकदमों के जरिए ब्लैकमेलिंग, धन उगाही और प्रतिष्ठित लोगों को फंसाने वाले संगठित गिरोह पर आखिरकार पुलिस का शिकंजा कस गया। गुरुवार को थाना जहानगंज पुलिस ने माफिया अनुपम दुबे के बेहद करीबी अवधेश मिश्रा के गैंग की बहुचर्चित विषकन्या मीनू शर्मा को गिरफ्तार कर उस नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दीं, जिसने पिछले कई वर्षों से गैंगरेप जैसे संवेदनशील मामलों को कथित तौर पर उगाही का हथियार बना रखा था।
इस पूरे ऑपरेशन को जिले की पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की अब तक की सबसे बड़ी और संवेदनशील कार्रवाई माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक यह वही मामला है जिसमें पुलिस और शासन को बदनाम करने के लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद तक कथित रूप से भ्रामक तथ्य पेश किए गए थे।
पुलिस रिकॉर्ड और शिकायतों के अनुसार गिरफ्तार मीनू शर्मा कथित तौर पर ऐसे गिरोह का चेहरा बन चुकी थी, जो अलग-अलग मामलों में बयान बदलकर प्रतिष्ठित लोगों पर गैंगरेप जैसे गंभीर आरोप लगाता था। बाद में समझौते और दबाव के जरिए कथित उगाही का खेल शुरू होता था। इस पूरे नेटवर्क में कथित तौर पर स्वयंभू कानूनी सलाहकार अवधेश मिश्रा का नाम सामने आया है, जिसे पुलिस जांच में गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। और पत्रकार अजय चौहान की ओर से दर्ज मुकदमे में अवधेश मुख्य आरोपी भी है।
जांच में सामने आया कि कई सम्मानित लोगों को इस नेटवर्क ने निशाना बनाया। इनमें प्रधानाचार्य प्रभात यादव, पत्रकार अजय चौहान, इलाहबाद हाईकोर्ट अधिवक्ता सुमित सक्सेना, जितेंद्र सक्सेना, रामानंद बालिका इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य अमित कठेरिया, सेंट्रल स्कूल के शिक्षक योगेश सहित कई अन्य नाम शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन लोगों के खिलाफ बार-बार बयान बदलकर गंभीर मुकदमे दर्ज कराने और फिर समझौते के नाम पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जाती थी।
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब पत्रकार अजय चौहान ने पुलिस अधीक्षक और शासन को विस्तृत प्रार्थना पत्र देकर पूरे रैकेट की शिकायत की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसपी आरती सिंह ने मामले में एसआईटी गठित कराई गईं थी,जांच के बाद मुकदमा 11 अक्टूबर 2025 को कोतवाली फतेहगढ़ में मुकदमा दर्ज किया गया था। प्रभारी निरीक्षक रणविजय सिंह ने कार्रवाई करते हुए भोलेपुर-बेवर रोड स्थित अवधेश मिश्रा के ठिकाने पर छापेमारी भी की थी।
सूत्र बताते हैं कि कार्रवाई तेज होते ही गिरोह ने नया खेल शुरू किया। कथित तौर पर हाईकोर्ट में गलत तथ्य पेश कर पुलिस अधीक्षक आरती सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार और जीरो टॉलरेंस नीति को बदनाम करने की कोशिश की गई थी।पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि माफिया अनुपम दुबे और उसके गैंग से जुड़े लोगों के इशारे पर यह पूरा सिस्टम सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ तैयार किया गया, ताकि प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित किया जा सके।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, उच्च न्यायालय में प्रस्तुत कुछ तथ्यों और याचिकाओं को लेकर भी जांच एजेंसियां अब गंभीरता से दस्तावेज खंगाल रही हैं। माना जा रहा है कि यह सिर्फ फर्जी मुकदमों का मामला नहीं, बल्कि कानून और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का बड़ा संगठित नेटवर्क है।
सात माह और तीन दिन तक चली विवेचना के बाद थाना जहानगंज प्रभारी निरीक्षक पूनम अवस्थी ने पहली बड़ी गिरफ्तारी कर पूरे जिले में सनसनी फैला दी। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य चेहरों की तलाश में दबिश दे रही है। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम जांच के घेरे में आ सकते हैं।
फर्जी मुकदमों के जाल में अभी कई चेहरे बाकी!
सूत्रों के मुताबिक फतेहगढ़ पुलिस और एसआईटी की जांच अब सिर्फ मीनू शर्मा तक सीमित नहीं है। पूरे गिरोह से जुड़ी अन्य कथित “विषकन्याएं”, फर्जी मुकदमों के पैरोकार और पर्दे के पीछे से खेल संचालित करने वाले चेहरों पर भी शासन-प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है। जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क के तार केवल फर्रुखाबाद तक सीमित नहीं बल्कि कन्नौज समेत आसपास के जिलों तक फैले हो सकते हैं। कई पुराने मुकदमों, बयान बदलने के पैटर्न, संदिग्ध समझौतों और कथित उगाही से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। पुलिस रडार पर ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने कथित तौर पर महिलाओं का इस्तेमाल कर प्रतिष्ठित लोगों को फंसाने, दबाव बनाने और मोटी रकम वसूलने का संगठित खेल खड़ा किया।
गलियों में बाइक दौड़ाकर पूनम अवस्थी ने बिछाया जाल, आखिर दबोच ली ‘विषकन्या’!
बहुचर्चित फर्जी गैंगरेप सिंडिकेट मामले में थाना जहानगंज प्रभारी निरीक्षक पूनम अवस्थी ने अपनी सक्रियता और जुझारू पुलिसिंग का बड़ा उदाहरण पेश किया। सूत्रों के मुताबिक मीनू शर्मा की गिरफ्तारी कोई सामान्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इसके लिए कई दिनों तक लगातार खुफिया निगरानी और दबिश अभियान चलाया गया। बताया जा रहा है कि प्रभारी निरीक्षक पूनम अवस्थी खुद बाइक से टीम के साथ गलियों, मोहल्लों और संभावित ठिकानों पर लगातार नजर बनाए हुए थीं। कई बार सूचना मिलने के बावजूद शातिर मीनू शर्मा पुलिस को चकमा देकर निकल जाती थी, लेकिन आखिरकार पुलिस ने उसे धर दबोचा। पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के सीधे निर्देशन में हुई।


