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Saturday, May 16, 2026

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का बड़ा बदलाव

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– अब 9वीं में तीन भाषाएं पढ़ना होगा अनिवार्य
– देशभर के लाखों छात्रों पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन ने देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए सत्र 2026-27 से कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया है। बोर्ड की ओर से जारी नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। इस फैसले के तहत छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल करना जरूरी रहेगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा के लिए अलग से बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी, बल्कि उसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा।
सीबीएसई देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में शामिल है और इसके अंतर्गत देश-विदेश के लगभग 30 हजार से अधिक स्कूल संबद्ध हैं। हर वर्ष लाखों विद्यार्थी कक्षा 9वीं में प्रवेश लेते हैं, ऐसे में इस फैसले का सीधा असर बड़ी संख्या में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों पर पड़ेगा। नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू की जा रही है, जिसमें बहुभाषी शिक्षा और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।
बोर्ड का मानना है कि इस कदम से छात्रों में भारतीय भाषाओं के प्रति रुचि बढ़ेगी और सांस्कृतिक समझ मजबूत होगी। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत जैसे बहुभाषी देश में विद्यार्थियों को विभिन्न भाषाओं का ज्ञान देना राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय भाषाओं और मातृभाषा को शिक्षा से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है।
हालांकि इस फैसले को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि पहले से ही भारी पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव के बीच छात्रों पर अतिरिक्त भाषाई बोझ बढ़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे स्कूलों में भाषा शिक्षकों की कमी को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों, पाठ्य सामग्री और स्कूलों में बेहतर संसाधनों की आवश्यकता होगी।
सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि नई व्यवस्था लागू करने के लिए समय रहते आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। बोर्ड का कहना है कि यह बदलाव विद्यार्थियों को बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक वातावरण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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