लखनऊ। प्रदेश में सुनार और स्वर्णकार समाज की बढ़ती परेशानियों को लेकर विपक्ष ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। व्यापारियों का कहना है कि एक तरफ प्रदेश में दिनदहाड़े ज्वेलरी दुकानों में लूट और अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर सोने के कारोबार पर लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव ने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है।
विपक्षी नेताओं और व्यापारी संगठनों का आरोप है कि पहले “सोनाबंदी” जैसे आह्वानों से बाजार प्रभावित हुआ और अब सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने से छोटे सुनारों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के बाजार में तेजी से विस्तार के कारण पारंपरिक सुनार पहले से ही प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे थे, लेकिन नई नीतियों के बाद उनकी स्थिति और खराब हो गई है।
व्यापारियों का आरोप है कि बड़े कॉरपोरेट शोरूमों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों के चलते छोटे और मध्यम स्तर के सुनार धीरे-धीरे बाजार से बाहर होते जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में लाखों पारंपरिक स्वर्णकारों का रोजगार समाप्त हो सकता है और बड़े ब्रांडेड शोरूम छोटे शहरों तक बाजार पर कब्जा कर लेंगे।
सुनार समाज के लोगों ने यह भी कहा कि सोने के व्यापार में भारी पूंजी लगती है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने और टैक्स-ड्यूटी के बढ़ते बोझ से व्यापारी खुद को असुरक्षित और आर्थिक संकट में महसूस कर रहे हैं। कई व्यापारियों ने आशंका जताई कि कारोबार लगातार घटने से परिवारों के पालन-पोषण और रोजगार का संकट गहरा सकता है।
प्रदेश के कई जिलों में व्यापारी संगठनों ने सरकार से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, सोने पर बढ़ी इम्पोर्ट ड्यूटी पर पुनर्विचार करने और छोटे व्यापारियों के हित में विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है। वहीं राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने में जुट गए हैं।


