संघर्ष, सपनों और जिंदगी के अनकहे सवालों को शब्द देती है पुस्तक
प्रशांत कटियार
मैनपुरी। मैनपुरी के परौंखा गांव से निकलकर युवाओं के बीच शिक्षा और मार्गदर्शन के क्षेत्र में सक्रिय शिवा ठाकुर अब लेखक के रूप में भी अपनी पहचान बनाने जा रहे हैं। उनकी पहली पुस्तक ‘सपनों का किराया’ जल्द ही पाठकों के बीच आने वाली है। यह पुस्तक उन युवाओं के सपनों, संघर्षों, असफलताओं और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को शब्द देती है, जो अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश में लगातार जूझते रहते हैं।
शिवा ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह दिल्ली में शिक्षा एवं विद्यार्थी मार्गदर्शन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। विद्यार्थियों के साथ लंबे समय से काम करने के दौरान उन्होंने युवाओं के करीब से संघर्षों को समझा है। यही अनुभव उनकी लेखनी का आधार बना और धीरे-धीरे ‘सपनों का किराया’ आकार लेती गई।
सिर्फ परीक्षा नहीं, जिंदगी की तैयारी की बात
शिवा ठाकुर का मानना है कि आईएएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी केवल किताबों और परीक्षा तक सीमित नहीं होती। इसके पीछे परिवार की उम्मीदें, असफलता का डर, अकेलापन और खुद को साबित करने की जद्दोजहद भी होती है। युवाओं की इसी अनदेखी दुनिया को उनकी पुस्तक में जगह मिली है।
‘सपनों का किराया’ सफलता की चमक दिखाने के बजाय उस रास्ते की कठिनाइयों को सामने लाने का प्रयास है, जिस पर चलकर युवा अपने सपनों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। पुस्तक में संघर्ष के साथ उन भावनाओं को भी महत्व दिया गया है, जिन्हें अक्सर सफलता की दौड़ में पीछे छोड़ दिया जाता है।
विद्यार्थियों के बीच मार्गदर्शक की भूमिका
विद्यार्थियों के बीच शिवा ठाकुर की पहचान एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में बनी है, जो जरूरत पड़ने पर केवल सलाह ही नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों के संघर्ष में उनके साथ खड़े भी रहते हैं। उनका प्रयास रहता है कि विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी मानसिक रूप से तैयार हों।
विद्यार्थियों के साथ निरंतर संवाद और उनके जीवन के अनुभवों को करीब से देखने ने शिवा ठाकुर को लेखन की ओर प्रेरित किया। इसी अनुभव का परिणाम उनकी पहली पुस्तक ‘सपनों का किराया’ है।
लेखक का परिचय
मैनपुरी के परौंखा गांव के रहने वाले शिवा ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए वह लंबे समय से विद्यार्थियों को सिविल सेवा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मार्गदर्शन दे रहे हैं। विद्यार्थियों के साथ निरंतर संवाद और उनके संघर्षों को करीब से देखने ने उन्हें लेखन के लिए प्रेरित किया।
‘सपनों का किराया’ युवाओं के सपनों, संघर्षों और उन भावनाओं पर केंद्रित है, जो अक्सर सफलता की दौड़ में अनकही रह जाती हैं। पुस्तक के माध्यम से शिवा ठाकुर ने युवाओं को यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सपनों की कीमत केवल सफलता से नहीं, बल्कि उस सफर में किए गए संघर्ष और अनुभवों से भी तय होती है।


