– अभिनव कुमार पर टिकी नजरें
उन्नाव। सदर विधानसभा सीट पर दशकों तक कायम रहे एक परिवार के राजनीतिक दबदबे की कहानी अब नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। पूर्व मंत्री मनोहर लाल से शुरू हुआ यह सिलसिला उनके पुत्र दीपक कुमार तक पहुंचा और अब तीसरी पीढ़ी के रूप में अभिनव कुमार राजनीतिक मैदान में सक्रिय हो चुके हैं।
उन्नाव सदर सीट पर इस परिवार ने करीब 27 वर्षों तक मजबूत पकड़ बनाए रखी, जहां पिता-पुत्र की जोड़ी 7 बार विधायक बनी। यह केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि लगातार बने जनाधार और संगठनात्मक ताकत का परिणाम रहा।
अब इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अभिनव कुमार के कंधों पर है। पिछले विधानसभा चुनाव में वे बहुत कम अंतर से हार गए थे, जिसने यह संकेत दे दिया था कि क्षेत्र में उनकी पकड़ तेजी से मजबूत हो रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उस चुनाव में मिली हार ने उनके पक्ष में सहानुभूति और मजबूती दोनों पैदा की है।
जमीनी स्तर पर सक्रियता, युवाओं के बीच पकड़ और लगातार जनसंपर्क अभियान के चलते इस बार उनके पक्ष में माहौल बनता दिख रहा है। क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि आगामी चुनाव में उनकी जीत “करीब-करीब तय” मानी जा रही है, हालांकि अंतिम फैसला हमेशा जनता के वोट से ही होता है।
स्थानीय समीकरण भी तेजी से बदल रहे हैं। जहां एक ओर परिवार की पुरानी राजनीतिक विरासत है, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी की ऊर्जा और सक्रियता इसे नया रूप दे रही है। यही वजह है कि उन्नाव सदर सीट एक बार फिर प्रदेश की चर्चित सीटों में शामिल हो गई है।
उन्नाव की यह सीट अब “विरासत बनाम वर्तमान” की नई कहानी लिखने की तैयारी में है। 27 साल का इतिहास और तीसरी पीढ़ी की दावेदारी अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या अभिनव कुमार इस विरासत को फिर से जीत में बदल पाते हैं या राजनीति नया मोड़ लेती है।
एक सीट, एक परिवार और 27 साल का वर्चस्व अब तीसरी पीढ़ी मैदान में


