– हादसे ने खोली निर्माण और निगरानी तंत्र की पोल
लखनऊ। अलीगंज के पुरनिया क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब इमारत के निर्माण और स्वीकृत मानकों को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस भवन में यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसके लिए कथित तौर पर केवल एकल आवास का नक्शा स्वीकृत कराया गया था, जबकि मौके पर चार मंजिला व्यावसायिक स्वरूप की इमारत खड़ी कर दी गई।
सूत्रों के मुताबिक भवन स्वामी वीपी शुक्ला द्वारा स्वीकृत मानकों से कहीं अधिक निर्माण किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। हादसे के बाद यह सवाल उठने लगा है कि यदि भवन का उपयोग आवासीय श्रेणी के लिए स्वीकृत था, तो उसमें व्यावसायिक गतिविधियां और कोचिंग संस्थान किस आधार पर संचालित हो रहे थे।
लखनऊ अग्निकांड ने केवल अग्नि सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि निर्माण स्वीकृति, नक्शा पासिंग और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि भवन नियमों के विपरीत तैयार किया गया था तो संबंधित विभागों द्वारा समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यह सवाल अब जनचर्चा का विषय बन गया है।
शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि कई शहरों में आवासीय भवनों को बाद में व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया जाता है, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी होने लगती है। संकरी सीढ़ियां, सीमित निकास मार्ग, अपर्याप्त पार्किंग और अग्निशमन संसाधनों की कमी किसी भी आपदा को भयावह बना सकती है।
हादसे के बाद प्रशासन ने भवन निर्माण से जुड़े दस्तावेजों, नक्शों और स्वीकृतियों की जांच शुरू कर दी है। यह भी देखा जा रहा है कि भवन निर्माण और उपयोग परिवर्तन से संबंधित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।


