– अब घर खरीदार ऑनलाइन दर्ज करेंगे शिकायत, अवैध ट्रांसफर फीस पर कसेगा शिकंजा
लखनऊ। फ्लैट, प्लॉट और मकान खरीदने वालों से ट्रांसफर फीस के नाम पर मनमानी वसूली करने वाले बिल्डरों और प्रमोटरों पर अब बड़ा शिकंजा कसने जा रहा है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा ) ने घर खरीदारों के लिए नई ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था शुरू कर दी है, जिसके तहत अब खरीदार सीधे रेरा की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कर सकेंगे।
नई व्यवस्था के अनुसार बिल्डरों द्वारा तय सीमा से अधिक ट्रांसफर शुल्क वसूले जाने की शिकायतें “फॉर्म-एम” के जरिए ऑनलाइन दर्ज होंगी और मामला सीधे ई-कोर्ट सिस्टम में पहुंचेगा। इससे शिकायतों के निस्तारण में तेजी आने और खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
रेरा ने फ्लैट, प्लॉट और मकान के ट्रांसफर शुल्क की अधिकतम सीमा भी तय कर दी है। इसके बावजूद यदि कोई प्रमोटर अतिरिक्त रकम वसूलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई बिल्डर ट्रांसफर फीस के नाम पर खरीदारों से लाखों रुपये तक वसूल रहे हैं, जबकि इसका कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं था।
नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद अब पीड़ित खरीदारों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। शिकायत दर्ज होते ही उसका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और संबंधित प्रमोटर को जवाब देना होगा। यदि आरोप सही पाए गए तो रेरा आर्थिक दंड समेत अन्य कार्रवाई भी कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ जैसे शहरों में ट्रांसफर फीस को लेकर सबसे ज्यादा विवाद सामने आए थे। कई खरीदारों ने आरोप लगाया था कि बिल्डर रजिस्ट्री या स्वामित्व हस्तांतरण के दौरान मनमाने शुल्क वसूलते हैं।
रेरा अधिकारियों के अनुसार इस नई प्रणाली का मकसद घर खरीदारों को आर्थिक और कानूनी सुरक्षा देना है। साथ ही रियल एस्टेट बाजार में भरोसा कायम करना भी प्राथमिकता है।
अब देखना होगा कि ऑनलाइन शिकायत प्रणाली लागू होने के बाद बिल्डरों की मनमानी पर कितनी लगाम लगती है, लेकिन इतना तय है कि यूपी में रियल एस्टेट सेक्टर की कार्यप्रणाली पर निगरानी पहले से कहीं ज्यादा सख्त होने जा रही है।
बिल्डरों की मनमानी पर यूपी रेरा का बड़ा वार


