– डीएम ने बनाई विशेष टीमें
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई ) के तहत बच्चों को प्रवेश दिलाने को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी तरह सख्त मोड में आ गया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में फैसला लिया गया कि सोमवार से प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीमें शहर के 97 निजी स्कूलों का दौरा करेंगी और प्रवेश प्रक्रिया की जमीनी हकीकत जांचेंगी।
बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी पात्र बच्चे को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा। कई निजी स्कूलों पर पहले भी सीटें खाली होने के बावजूद प्रवेश में टालमटोल और नियमों की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं। इसी को देखते हुए अब प्रशासन ने सीधे मॉनिटरिंग का फैसला लिया है।
अधिकारियों के अनुसार टीमें स्कूलों में जाकर यह जांचेंगी कि चयनित बच्चों को समय पर प्रवेश दिया गया या नहीं, स्कूल प्रबंधन द्वारा किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क तो नहीं मांगा जा रहा और आरटीई नियमों का पालन सही तरीके से हो रहा है या नहीं।
राजधानी लखनऊ में अब तक लगभग 13 हजार बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश मिल चुका है। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बताई जा रही है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे अभिभावक हैं जो स्कूलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
सूत्रों के मुताबिक प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ निजी स्कूल चयनित बच्चों के दस्तावेजों में अनावश्यक आपत्तियां लगाकर प्रवेश प्रक्रिया को लंबा खींच रहे हैं। अब ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि आरटीई केवल कानून नहीं बल्कि गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा से जोड़ने का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण के दौरान मिली गड़बड़ियों की रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत की जाए। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर जुर्माना और मान्यता संबंधी कार्रवाई भी हो सकती है।
आरटीई प्रवेश में लापरवाही पर सख्त हुआ प्रशासन: 97 निजी स्कूलों पर होगी निगरानी


