लखनऊ।पोस्टमार्टम व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक और मेडिकल सुधार लागू किया गया है। अब पोस्टमार्टम पैनल में केवल फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टरों को ही शामिल किया जाएगा। इस नई व्यवस्था को लागू करने वाला लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है।
अब तक पोस्टमार्टम पैनल में दो PHMS डॉक्टरों को भी शामिल किया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत केवल प्रशिक्षित फॉरेंसिक एक्सपर्ट ही पोस्टमार्टम प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। माना जा रहा है कि इससे मौत के वास्तविक कारणों का अधिक वैज्ञानिक और सटीक खुलासा हो सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह बदलाव उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी मेडिकल मैनुअल के निर्देशों के अनुरूप किया गया है। लंबे समय से विशेषज्ञ यह मांग उठा रहे थे कि संवेदनशील और विवादित मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका अनिवार्य की जाए।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद हत्या, संदिग्ध मौत, सड़क हादसे, दहेज हत्या और पुलिस कस्टडी जैसे मामलों में जांच एजेंसियों को अधिक मजबूत वैज्ञानिक साक्ष्य मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कई मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर उठने वाले विवाद और अदालतों में चुनौती की स्थिति भी कम हो सकती है।
मेडिकल और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में अपराध और संदिग्ध मौतों के बढ़ते मामलों के बीच यह कदम बेहद अहम है। खासतौर पर उन मामलों में जहां पुलिस जांच पर सवाल उठते रहे हैं, वहां फॉरेंसिक आधारित पोस्टमार्टम रिपोर्ट न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बना सकती है।
लखनऊ मॉडल सफल रहा तो आने वाले समय में प्रदेश के अन्य जिलों में भी यही व्यवस्था लागू की जा सकती है।
लखनऊ बना प्रदेश का पहला शहर, पोस्टमार्टम व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अब केवल फॉरेंसिक एक्सपर्ट करेंगे जांच


