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Tuesday, May 12, 2026

आईटी सिटी योजना में प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा, 100 करोड़ की जमीन अटैच होने से बढ़ी मुश्किलें

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लखनऊ
सुल्तानपुर रोड स्थित लखनऊ विकास प्राधिकरण की महत्वाकांक्षी आईटी सिटी योजना अब नई कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियों में घिरती दिखाई दे रही है। पहले वेलनेस सिटी योजना में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी 50 बीघे से अधिक जमीन का मामला सामने आया था, और अब आईटी सिटी योजना में करीब 100 करोड़ रुपये की ऐसी जमीन चिन्हित हुई है जिसे प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताते हुए अटैच कर दिया है। इस कार्रवाई ने लखनऊ विकास प्राधिकरण की बहुचर्चित परियोजना की रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लखनऊ विकास प्राधिकरण सुल्तानपुर रोड पर किसान पथ के किनारे लगभग 1054 हेक्टेयर क्षेत्र में आईटी सिटी योजना विकसित कर रहा है। यह परियोजना लैंड पूलिंग मॉडल पर आधारित है, जिसमें 11 गांवों की जमीन शामिल की गई है। प्राधिकरण भूस्वामियों से जमीन लेकर बदले में विकसित प्लॉट देने की व्यवस्था कर रहा है। सामान्य रूप से जमीन देने वालों को 25 प्रतिशत विकसित भूमि वापस दी जा रही है, जबकि 10 एकड़ से अधिक जमीन देने वालों को 50 प्रतिशत तक विकसित भूमि देने का प्रावधान रखा गया है।

जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि योजना में शामिल कई गांवों की जमीन पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दायरे में है। सूत्रों के अनुसार एक बिल्डर ने कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग के जरिये इन जमीनों की खरीद की थी। बताया जा रहा है कि ये जमीनें वर्ष 2013 के आसपास रमेश कुमार नामक व्यक्ति के नाम पर खरीदी गई थीं। प्रवर्तन निदेशालय ने संबंधित रजिस्ट्रियों और दस्तावेजों की जानकारी जिला प्रशासन और तहसील अधिकारियों को भी भेज दी है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।

आईटी सिटी योजना में शामिल गांवों में बक्कास, सिकंदरपुर अमोलिया, सिद्धपुरा, परेहटा, रकीबाबाद, मोहारी खुर्द, मोहारी कला, खुजौली, भटवारा, सोनई कंजेहरा और पहाड़नगर टिकरिया प्रमुख हैं। इन गांवों की जमीनों पर अब कानूनी जांच और स्वामित्व विवाद की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच लंबी चली तो अधिग्रहण प्रक्रिया और निवेश दोनों प्रभावित हो सकते हैं, जिससे परियोजना की समयसीमा आगे बढ़ सकती है।

हालांकि प्राधिकरण प्रशासन का कहना है कि योजना पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने स्पष्ट किया कि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान जिलाधिकारी द्वारा मुआवजे की घोषणा होने पर सभी विवादों का निस्तारण कर लिया जाएगा। इसके बावजूद, प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने राजधानी की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर नई बहस छेड़ दी है और अब सबकी नजरें आगे की जांच और प्रशासनिक फैसलों पर टिकी हैं।

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