नई दिल्ली/वायनाड। केरल के वायनाड जिले में मंगलवार को हुए भीषण भूस्खलन ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मानसूनी आपदा का खतरा उजागर कर दिया। मेप्पाडी ग्राम पंचायत के कल्लडी टनल निर्माण स्थल पर हुए लैंडस्लाइड में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। इस बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कांग्रेस और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के कार्यकर्ताओं से प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता करने की अपील की है।
राहुल गांधी, जो वायनाड से पूर्व सांसद भी रह चुके हैं, ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि वायनाड में भूस्खलन की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में सभी कांग्रेस कार्यकर्ता प्रशासन के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं और प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद करें।
प्रशासन के अनुसार, मेप्पाडी क्षेत्र के मीनाक्षी ब्रिज के पास स्थित कल्लडी-अनक्कमपोइल टनल परियोजना स्थल पर अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा खिसक गया, जिससे निर्माण कार्य में लगे कई मजदूर मलबे में दब गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 18 लोग हादसे की चपेट में आए थे। इनमें से नौ घायलों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि लापता लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ, पुलिस, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं। घटना के बाद मेप्पाडी-चूरलमाला मार्ग को एहतियातन बंद कर दिया गया है।
राहुल गांधी ने वायनाड के अलावा महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश से जान गंवाने वाले लोगों के प्रति भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित सभी राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर राहत कार्यों में सहयोग करें तथा जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाएं।
उधर मौसम विभाग ने केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में अगले कुछ दिनों तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। देश के कई राज्यों में मानसून के सक्रिय होने के साथ भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।


