– कई लोगों पर जांच की आंच
लखनऊ। राजधानी में गोमती नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध खनन का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। आरोप है कि चिनहट क्षेत्र के देवरिया-फुसलौना गांव के पास गोमती नदी के तटीय इलाके से करोड़ों रुपये मूल्य की मिट्टी का अवैध खनन कर उसे बेच दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराकर जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र के एक व्यक्ति पर अवैध खनन में शामिल होने का संदेह जताया जा रहा है। वहीं बीबीडी क्षेत्र के चार अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। प्रशासन अब खनन से जुड़े दस्तावेजों, वाहनों और आर्थिक लेनदेन की पड़ताल कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक खनन गतिविधियां लंबे समय से संचालित हो रही थीं और बड़ी मात्रा में मिट्टी निकालकर विभिन्न स्थानों पर बेची गई। मामले में कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित विभागों को इसकी जानकारी थी या नहीं और यदि थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अवैध खनन के कारण पर्यावरणीय क्षति की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी तटों से अनियंत्रित तरीके से मिट्टी निकाले जाने से कटाव बढ़ सकता है तथा जलधारा और आसपास के पारिस्थितिक तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद अवैध खनन के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की संभावना है।
गोमती किनारे हुए इस कथित अवैध खनन ने प्रशासनिक निगरानी और खनन नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जांच के नतीजों और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।


