लखनऊ। प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में दवा प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यूरोलॉजी विभाग में सामने आए कथित दवा अनियमितता प्रकरण के बाद प्रशासन ने अब हर दवा की खरीद, भंडारण और वितरण की ऑनलाइन निगरानी का फैसला लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार केजीएमयू में जल्द ही हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम को और प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, जिसके माध्यम से दवाओं की पूरी आवाजाही डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कौन-सी दवा कब खरीदी गई, किस विभाग को भेजी गई और किस मरीज को उपलब्ध कराई गई।
संस्थान प्रशासन का मानना है कि ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था लागू होने से दवा वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम होगी। साथ ही दवा स्टॉक की वास्तविक स्थिति भी रियल टाइम में उपलब्ध रहेगी।
बताया जा रहा है कि यूरोलॉजी विभाग में कथित दवा घोटाले की चर्चाओं के बाद संस्थान ने दवा प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा की थी। इसी क्रम में डिजिटल मॉनिटरिंग को मजबूत करने का निर्णय लिया गया है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को रोका जा सके।
नई व्यवस्था के तहत दवा भंडार, विभिन्न विभागों और मरीजों तक दवा पहुंचने की पूरी प्रक्रिया कंप्यूटरीकृत होगी। इससे स्टॉक का मिलान करना आसान होगा और जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सरकारी अस्पतालों में डिजिटल दवा प्रबंधन प्रणाली लागू होने से मरीजों को भी लाभ मिलेगा, क्योंकि दवाओं की उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि संस्थान में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।


