नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया मंगलवार को राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी भी मौजूद रहीं। इस दौरान आप नेताओं ने अपने निर्णय को गांधीवादी सत्याग्रह से जोड़ते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया।
इससे पहले अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर घोषणा की कि वे अब इस मामले में न तो खुद अदालत में पेश होंगे और न ही उनके वकील कोई पैरवी करेंगे। उन्होंने अपने इस कदम को “सत्याग्रह” करार दिया और इसे अंतरात्मा की आवाज पर लिया गया निर्णय बताया।
केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा सम्मान है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं रही। उन्होंने कहा कि यह एक संवेदनशील मामला है और वे इसके परिणामों का सामना करने के लिए तैयार हैं, भले ही इससे उनके कानूनी हित प्रभावित हों। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात भी कही।
वहीं, मनीष सिसोदिया ने भी अपने पत्र में स्पष्ट किया कि उनकी ओर से भी कोई वकील पेश नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में न्याय मिलने की उम्मीद खत्म हो गई है और सत्याग्रह ही एकमात्र विकल्प बचा है।
दरअसल, यह मामला कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़ा है, जिसमें सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिसमें केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इस अपील पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा सुनवाई कर रही हैं। पूर्व में केजरीवाल ने उनसे मामले से अलग होने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दिल्ली की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है और आम आदमी पार्टी तथा भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।


