– दुनिया के सामने चमकेगी बनारस की कला, संस्कृति और कारीगरी
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी सांस्कृतिक ताकत दिखाने का अवसर मिलने जा रहा है। जी-20 बैठकों की सफल मेजबानी के बाद अब 4 और 5 जून को काशी में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक आयोजित होगी। ताज होटल में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में ब्रिक्स देशों के वरिष्ठ राजनयिक, नीति-निर्माता, सांस्कृतिक विशेषज्ञ और विशिष्ट प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश लगातार अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का केंद्र बनता जा रहा है। काशी में होने वाली यह बैठक न केवल सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती देगी बल्कि प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प, जीआई टैग और ओडीओपी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का बड़ा अवसर भी बनेगी।
बैठक के दौरान वाराणसी के विश्व प्रसिद्ध जीआई टैग और ओडीओपी उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसमें काशी की सदियों पुरानी कला और शिल्प परंपरा से जुड़े छह प्रमुख उत्पादों का प्रदर्शन होगा। इनमें बनारस ब्रोकेड एवं साड़ी, गुलाबी मीनाकारी, वुडेन लेकर वेयर एंड टॉयज, मेटल रिपोजी क्राफ्ट, सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क और ग्लास बीड्स प्रमुख रूप से शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शनी केवल उत्पाद प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और उद्यमियों के लिए वैश्विक व्यापार के नए द्वार भी खोलेगी। विदेशी प्रतिनिधियों के सामने सीधे उत्पादों की प्रस्तुति से निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।
जीआई विशेषज्ञ एवं पद्मश्री सम्मानित रजनीकांत ने कहा कि ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी स्थानीय कलाकारों और उद्यमियों के लिए सुनहरा अवसर है। इससे काशी के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का मार्ग और मजबूत होगा।
नेशनल अवार्डी रामेश्वर सिंह ने कहा कि ऐसे वैश्विक मंच शिल्पियों के हुनर को “लोकल टू ग्लोबल” बनाने का काम करते हैं। वहीं गुलाबी मीनाकारी के नेशनल अवार्डी कुञ्ज बिहारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं जीआई और ओडीओपी उत्पादों के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर बनकर उभरे हैं, जिनके प्रयासों से कई पारंपरिक कलाओं को नया जीवन मिला है।
ग्लास बीड्स कला से जुड़े शिल्पकार दुर्गा प्रसाद पटेल का कहना है कि देश की सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर प्रदर्शित करने का यह अवसर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगा।
ब्रिक्स के सदस्य देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इस समूह का हिस्सा हैं।


