श्रेणी-62 की भूमि को लेकर उठे गंभीर सवाल, जांच रिपोर्ट लंबित होने से बढ़ी लोगों की नाराजगी
फर्रूखाबाद
तहसील अमृतपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत भरखा में स्थित एक विद्यालय की भूमि को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है शिकायतकर्ता द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। मामला उस भूमि से जुड़ा है, जिसे राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से श्रेणी-62 के अंतर्गत दर्ज बताया जा रहा है। यह श्रेणी सामान्यतः सार्वजनिक उपयोग की भूमि मानी जाती है।शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस भूमि का उपयोग सार्वजनिक हित और विद्यालय भवन के लिए होना चाहिए था, उस पर वर्षों से निजी विद्यालय संचालित किया जा रहा है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा भारी भरकम डोनेशन भी लिया जाता है, जबकि भूमि की स्थिति को लेकर आज तक स्पष्टता नहीं हो सकी है।मामले में वर्ष 1980 के दौरान हुई चकबंदी प्रक्रिया का भी उल्लेख किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस समय विद्यालय प्रबंधन द्वारा भूमि को निजी संस्था के नाम दर्ज कराने का प्रयास किया गया था, जिसे तत्कालीन चकबंदी अधिकारी द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था। इसके बावजूद वर्तमान में भूमि का उपयोग निजी संस्था द्वारा किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।प्रकरण में नायब तहसीलदार अभिषेक यादव एवं क्षेत्रीय लेखपाल पवन यादव की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि भूमि सरकारी नहीं है तो संबंधित अभिलेख, आदेश और राजस्व रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उनका आरोप है कि अब तक स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है कि श्रेणी-62 की भूमि को किस आधार पर सरकारी दायरे से बाहर माना जा रहा है।जनता के बीच भी यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि विद्यालय भवन की भूमि को सरकारी नहीं माना जा रहा है तो ग्राम समाज, तालाब और अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि के मामलों में प्रशासन का क्या रुख होगा। कई ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर प्रशासन को स्पष्ट नीति सामने रखनी चाहिए।
शिकायतकर्ता ने बताया कि 30 अप्रैल 2026 को पूरे मामले की शिकायत अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार से की गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। हालांकि एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि जांच टीम गठित हुई थी तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और अनावश्यक विवाद समाप्त हो सके। लोगों का आरोप है कि जांच में देरी से संदेह की स्थिति और गहरी होती जा रही है।विवाद बढ़ने के बाद अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर पर टिक गई हैं। लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और राजस्व अभिलेखों की गहन समीक्षा कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए। यदि भूमि सरकारी है तो उसे सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित किया जाए और यदि निजी है तो उसके वैध दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। अब देखना यह होगा कि लंबे समय से चर्चा में बने इस मामले में प्रशासन कब तक स्थिति स्पष्ट करता है और जांच रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई सामने आती है। फिलहाल अमृतपुर क्षेत्र में यह मुद्दा लोगों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।


