नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज है, इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम और निर्विवाद प्रमाण नहीं माना जा सकता। मंत्रालय की इस स्पष्टता के बाद नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
इससे पहले विभिन्न न्यायिक टिप्पणियों और मामलों में भी यह कहा जा चुका है कि केवल आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड के आधार पर किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम निर्धारण नहीं किया जा सकता। आधार मुख्य रूप से पहचान और कल्याणकारी योजनाओं के लिए जारी किया जाता है, जबकि वोटर आईडी मतदान के अधिकार से जुड़ा दस्तावेज है।
विशेषज्ञों के अनुसार नागरिकता का निर्धारण संबंधित कानूनों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है। जन्म प्रमाण पत्र, नागरिकता प्रमाण पत्र, वंश संबंधी अभिलेख और अन्य वैधानिक दस्तावेज विभिन्न परिस्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विदेश मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण ने यह साफ कर दिया है कि पासपोर्ट, आधार और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज महत्वपूर्ण पहचान पत्र तो हैं, लेकिन नागरिकता के अंतिम और सर्वमान्य प्रमाण के रूप में इन्हें स्वतः स्वीकार नहीं किया जा सकता। नागरिकता से जुड़े मामलों में सक्षम प्राधिकरण उपलब्ध दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्णय लेते हैं।


