– सुरक्षा मांगने वाले पीड़ित पर पुलिस रवैये पर उठे सवाल
प्रयागराज।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बदायूं पुलिस प्रशासन के रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था और नागरिक की सुरक्षा बनाए रखना पुलिस की संवैधानिक जिम्मेदारी है। अदालत की यह टिप्पणी उस मामले में आई जिसमें बदायूं के एक व्यक्ति ने अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बदायूं के एसएसपी के रवैये को “उदासीन” बताते हुए कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई नागरिक खतरे की आशंका जताते हुए सुरक्षा मांग रहा है तो पुलिस का दायित्व केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“अपराध हो जाना एक अलग बात है, लेकिन शांति व्यवस्था बनाए रखना और अपराध को रोकना पुलिस की मूल जिम्मेदारी है।”
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने एसएसपी को एक और विस्तृत एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट पूछा कि पिटीशनर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं और भविष्य में क्या रणनीति अपनाई जाएगी।
इस टिप्पणी को प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग मॉडल पर एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ती सुरक्षा मांगों और संवेदनशील मामलों के बीच हाईकोर्ट का यह रुख प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा संदेश माना जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की यह टिप्पणी केवल बदायूं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के पुलिस अधिकारियों के लिए चेतावनी है कि सुरक्षा मांगने वाले नागरिकों की शिकायतों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
बदायूं एसएसपी पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी


