नई दिल्ली। शुक्रवार को राज्यसभा के इतिहास में एक अहम और ऐतिहासिक घटना दर्ज हुई, जब पहली बार किसी मनोनीत सांसद को उपसभापति पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह जिम्मेदारी वरिष्ठ पत्रकार और राजनेता हरिवंश नारायण सिंह को मिली, जिन्हें हाल ही में द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था। उल्लेखनीय है कि हरिवंश नारायण सिंह लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति निर्विरोध चुने गए हैं, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
इस अवसर पर नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि सदन को उनकी कार्यशैली पर पूरा विश्वास है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हरिवंश जी का जन्म जेपी के गांव में हुआ और उनके विचारों में वही प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक मूल्यों की झलक दिखाई देती है। साथ ही उन्होंने हरिवंश के लेखक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लेखों में गहराई और धार है, जो उनके व्यक्तित्व को और मजबूत बनाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि हरिवंश नारायण सिंह की कार्यशैली संतुलित और समावेशी है, वे सभी पक्षों की बात को ध्यानपूर्वक सुनते हैं और सदन को सुचारू रूप से संचालित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनका यह नया कार्यकाल भी सदन के लिए प्रभावी और प्रेरणादायक रहेगा।
वहीं, मल्लिकार्जुन खरगे ने भी हरिवंश को बधाई देते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहां राज्यसभा में उपसभापति का चुनाव समय पर हो गया, वहीं लोकसभा में 2019 से उपाध्यक्ष का पद खाली पड़ा है, जो संविधान की भावना के विपरीत है। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि लोकतंत्र की बात करने वाली सरकार को इस दिशा में भी गंभीरता दिखानी चाहिए।
खरगे ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जब भी वे संसद भवन के गेट नंबर सात से गुजरते हैं, तो उपाध्यक्ष कक्ष पर लगा ताला उन्हें लोकतंत्र की अधूरी तस्वीर का अहसास कराता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हरिवंश नारायण सिंह अपने कार्यकाल में विपक्ष की आवाज को भी बराबर महत्व देंगे और सदन में संतुलन बनाए रखेंगे।
राज्यसभा में ऐतिहासिक क्षण: हरिवंश नारायण सिंह तीसरी बार उपसभापति निर्विरोध चुने गए


